रातू किला की भव्य दुर्गा पूजा: हर साल दी जाती है भैंसे की बलि, प्रसाद के रूप में बंटता है रक्त से सना कपड़ा
Published by : Dipali Kumari Updated At : 18 Sep 2025 2:17 PM
रातू किला में स्थापित मां दुर्गा की प्रतिमा (फाइल फोटो)
Ratu Kila Durga Puja: रातू किला का भव्य दुर्गा पूजा सदियों से चला आ रहा है. यहां की एक खास और अनोखी बलि की प्रथा है. नवरात्र के महानवमी के दिन रातू किला में भैंसे की बलि दी जाती है. बलि के बाद उसके रक्त से सना कपड़ा प्रसाद के रूप में भक्तों के बीच बांटा जाता है. आइये इस लेख में विस्तार से जानते हैं रातू किला के भव्य दुर्गा पूजा से जुड़ी अनोखी बातें.
Ratu Kila Durga Puja: राजधानी रांची में विभिन्न जगहों पर धूमधाम से दुर्गा पूजा का आयोजन किया जाता है. इन्हीं में से एक है रातू किला का भव्य दुर्गा पूजा, जहां नागवंशी राजाओं द्वारा सदियों पहले दुर्गा पूजा की शुरुआत की गयी थी. कई पीढ़ियां बीत गयी, लेकिन इस लंबे अरसे में अगर कुछ नहीं बदला तो वो है यहां आयोजित होने वाली भव्य दुर्गा पूजा. यहां आज भी धूमधाम से पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ भव्य दुर्गा पूजा का आयोजन किया जाता है. रातू किला में दुर्गा पूजा के दौरान भैंसे की बलि की एक अनोखी प्रथा है, जो सदियों से चली आ रही है.
रातू किला में होती है विशेष पूजा
रातू किला में दुर्गा पूजा की शुरुआत षष्ठी को बेलवरण के साथ होती है. इसी दिन यहां मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित की जाती है. इसके अगले दिन सप्तमी को रातू महाराजा तालाब के पास पारंपरिक विधि-विधान से पूजा होती है. वहां के पुजारी का कहना है कि किला में तांत्रिक पद्धति से विशेष पूजा होती है, इस कारण संधि बलि से पहले रातू किला का दरवाजा आम जनों के लिए बंद कर दिया जाता है. वहीं नवरात्र के महानवमी के दिन रातू किला में भैंसे की बलि दी जाती है.

भक्तों के बीच बंटता है रक्त से सना कपड़ा
महानवमी के दिन भैंसे की बलि के बाद उसके रक्त को एक कपड़े में संजोया जाता है. इसके बाद रक्त से सने उस कपड़े को श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद के रूप में वितरित किया जाता है. श्रद्धालु इस कपड़े को अपने घर के कोने में रक्षा कवच के रूप में रखते हैं. उनकी मान्यता है कि इस कपड़े को घर में रखने से बुरी शक्तियां दूर होती है.
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भैंसे की बलि की प्रथा
मालूम हो दुर्गा पूजा में भैंसे की बलि देने की परंपरा पूर्वी भारत के कुछ क्षेत्रों में काफी प्रचलित है. खासकर शाक्त परंपरा में इसका खास महत्त्व है. भैंसे की बलि देवी को प्रसन्न करने और शक्ति प्राप्त करने का एक प्राचीन तरीका माना जाता है. यह प्रथा अक्सर नवमी को होती है और इसे देवी मां द्वारा राक्षस महिषासुर के वध के प्रतीक के रूप में भी देखा जाता है.
केवल 5 दिनों के लिए खुलता है रातू किला
रातू किला का राजमहल यूं तो सालों भर आम जनता के लिए बंद रहता है. लेकिन, दुर्गा पूजा के दौरान केवल 5 दिनों के लिए राजमहल सभी श्रद्धालुओं के लिए खुलता है. षष्ठी से दशमी तक बड़ी संख्या में श्रद्धालु मां दुर्गा का आशीर्वाद लेने रातू किला पहुंचते हैं. रातू किला में आयोजित होने वाला यह भव्य दुर्गा पूजा लाखों श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र है.
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By Dipali Kumari
नमस्कार! मैं दीपाली कुमारी, एक समर्पित पत्रकार हूं और पिछले 3 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं. वर्तमान में प्रभात खबर में कार्यरत हूं, जहां झारखंड राज्य से जुड़े महत्वपूर्ण सामाजिक, राजनीतिक और जन सरोकार के मुद्दों पर आधारित खबरें लिखती हूं. इससे पूर्व दैनिक जागरण आई-नेक्स्ट सहित अन्य प्रतिष्ठित समाचार माध्यमों के साथ भी कार्य करने का अनुभव है.
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