रांची में भू-माफिया की अब खैर नहीं, जमीन कब्जा करने वालों की लिस्ट बनाकर पुलिस करेगी सख्त कार्रवाई

Published by :Mithilesh Jha
Published at :20 Jul 2023 12:30 PM (IST)
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रांची में भू-माफिया की अब खैर नहीं, जमीन कब्जा करने वालों की लिस्ट बनाकर पुलिस करेगी सख्त कार्रवाई

झारखंड की राजधानी रांची में भूमि विवाद के बढ़ते मामलों के बीच हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है. इसके बाद से पुलिस भी रेस है. रांची के भू-माफियाओं की लिस्ट तैयार की जा रही है, जिनके खिलाफ सख्त ऐक्शन हो सकता है.

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झारखंड राज्य के गठन के बाद से ही राजधानी रांची में जमीन की कीमतें आसमान छूने लगीं थीं. अब यहां की जमीन बेशकीमती हो चुकी है. इसलिए भू-माफिया जमीन पर कब्जा कर रहे हैं. रांची में जमीन विवाद के मामले लगातार बढ़ रहे हैं. ये हम नहीं कह रहे. ये पुलिस के आंकड़े बता रहे हैं. जी हां, पिछले 5 साल में ही भूमि विवाद के कम से कम 560 मामले हैं, जो थाने पहुंचे हैं.

भू-माफिया की लिस्ट बना रही रांची पुलिस

नक्सलियों और अपराधियों से निपटने की चुनौती के बीच पुलिस का वास्ता भूमि विवाद से भी पड़ रहा है. यही वजह है कि पुलिस ने भू-माफिया की लिस्ट बनानी शुरू कर दी है, क्योंकि राजधानी में जमीन विवाद में हर साल कई मौतें हो जातीं हैं. आम अपराध की घटनाएं हैं, सो अलग. पुलिस से कोर्ट तक में अगर सबसे ज्यादा कोई मामला लंबित है, तो वो जमीन से जुड़े मामले हैं. जमीन विवाद से जुड़े कुछ आंकड़ों पर गौर कीजिए.

2021 : तमाड़ में वकील की गोली मारकर हत्या

आइए, थोड़ा फ्लैश बैक में चलते हैं. साल-दर-साल घटनाओं की आपको याद दिलाते हैं. 27 जुलाई 2021 को राजधानी रांची के तमाड़ प्रखंड में वकील मनोज झा की गोली मारकर हत्या कर दी गयी थी. वे उस वक्त एक शिक्षण संस्थान की घेराबंदी करवा रहे थे. तभी बाइक पर सवार होकर कुछ अपराधी वहां आये और मनोज झा को गोली मार दी. उनकी मौत हो गयी.

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2022 : सब्जी बेचने वाली को मार डाला

अब बात करते हैं वर्ष 2022 की. 27 मार्च 2022 को रांची के चिरौंदी बाजार में फल बेचने वाली दुलारी देवी की हत्या कर दी गयी. दुलारी देवी को भी गोली मारी गयी थी. आशंका जतायी गयी थी कि दुलारी देवी की हत्या भूमि विवाद में हुई है.

2022 : जमीन विवाद में दो पक्षों के बीच हुई झड़प

नामकुम थाना क्षेत्र में 24 सितंबर 2022 को एक प्लॉट पर विवाद हुआ. ग्रामीणों ने जमीन पर निर्माण का विरोध किया, तो दो पक्षों में झड़प हो गयी. मामले को शांत कराने के लिए पुलिस को आना पड़ा. मामला शांत हो गया.

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2022 : जमीन कारोबारी की गोली मारकर हत्या

इसी साल 24 नवंबर 2022 को रांची के बरियातू थाना क्षेत्र में जमीन कारोबारी धवन राम को अपराधियों ने मार डाला. धवन को दो गोली मारी गयी थी.

2023 : नामकुम में हुई फायरिंग में दो युवक घायल

वर्ष 2023 में भी भूमि विवाद में फायरिंग हुई. इसमें दो युवक घायल हो गये. मामला नामकुम थाना क्षेत्र का था. 17 मार्च 2023 को नामकुम के केतारीबगान में अपराधियों ने कृष्णापुरी के राहुल और कांके के आशीष पर गोली चलायी थी. दोनों घायल हो गये थे.

रांची जिले में 5 साल में जमीन कब्जा करने के 560 मामले

अब जरा पुलिस में दर्ज हो रहे जमीन विवाद के मामलों पर ध्यान दीजिए. आंकड़े बताते हैं कि पिछले 5 साल में पुलिस के पास 560 मामले दर्ज हुए हैं, जो जमीन विवाद से जुड़े हैं. रांची पुलिस के वरीय अधिकारी बताते हैं कि ग्रामीण क्षेत्रों में 215 प्राथमिकी और शहरी क्षेत्र के थानों में 345 प्राथमिकी दर्ज हुई है. इन सभी मामलों की समीक्षा की जा रही है.

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सुप्रीम कोर्ट के जज की जमीन पर कब्जा करने की कोशिश

राजधानी रांची के लोअर बाजार थाना क्षेत्र में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस की जमीन पर भी कब्जा करने की कोशिश हुई. मामला प्रकाश में आया, तो झारखंड हाईकोर्ट ने इस पर सख्त रुख अपनाया. इसके बाद रांची पुलिस भी एक्शन में आयी. अब भू-माफिया की लिस्ट तैयार की जा रही है. सबसे पहले उन लोगों की सूची बन रही है, जिनके खिलाफ सबसे ज्यादा और लगातार शिकायतें आ रहीं हैं. सूत्र बता रहे हैं कि पुलिस ऐसे भू-माफिया को जिलाबदर करने की तैयारी कर रही है.

हाईकोर्ट में शपथ पत्र दाखिल करेगी रांची पुलिस

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश की जमीन पर कब्जा मामले में कोर्ट ने रांची पुलिस से भूमि विवाद से जुड़े मामलों पर शपथ पत्र दायर करने को कहा है. अब पुलिस को हाईकोर्ट में यह बताना होगा कि रांची जिले में भूमि विवाद के कितने केस दर्ज हुए हैं और उन मामलों में क्या कार्रवाई हुई है. पुलिस को यह भी बताना है कि रांची में कौन-कौन से गिरोह हैं, जो जमीन पर कब्जा कर रहे हैं.

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जमीन विवाद में तत्काल कदम उठायें थाना प्रभारी

रांची के एसपी (ग्रामीण) नौशाद आलम ने कहा है कि सभी थाना प्रभारियों को हिदायत दी गयी है कि भूमि विवाद में किसी की जान नहीं जाये, इसकी व्यवस्था करें. भूमि विवाद पर थानेदारों को तत्काल कदम उठाने के निर्देश दिये गये हैं. नौशाद आलम ने यह भी कहा है कि अगर भूमि विवाद में किसी की जान जाती है, तो थाना प्रभारी भी नहीं बचेंगे.

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मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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