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1948 में शुरू हुई रांची में रावण दहन की परंपरा, पाकिस्तान के बन्नू से आये शरणार्थियों ने शुरू की थी परंपरा

Updated at : 01 Oct 2025 9:40 PM (IST)
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Ranchi Me Ravan Dahan History

रांची में रावण दहन की शुरुआत करने वाली टीम. फोटो : प्रभात खबर

Ranchi Me Ravan Dahan History: आज की झारखंड की राजधानी रांची में दशहरा के दिन रावण, कुंभकर्ण और मेघदान के पुतला के दहन की शुरुआत वर्ष 1948 में हो चुकी थी. पाकिस्तान के बन्नू से आये 10-12 शरणार्थियों ने इसकी शुरुआत की थी. पहले 10-12 फीट के पुतले जलाये जाते थे. धीरे-धीरे पुतले का आकार बढ़ता गया और आयोजन का पैमाना भी बड़ा और भव्य होता गया. रांची में रावण दहन का क्या है इतिहास, यहां पढ़ें.

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Ranchi Me Ravan Dahan History: रांची में रावण दहन की शुरुआत 1948 में हुई थी. उस समय बन्नू (पाकिस्तान) से आये 10-12 शरणार्थी परिवारों ने पहली बार दशहरा पर 12 फीट के रावण का पुतला बनाया था. डिग्री कॉलेज (वर्तमान रांची कॉलेज) के प्रांगण में लाला मनोहर लाल नागपाल, कृष्ण लाल नागपाल, अमीर चंद सतीजा (तीनों अब स्वर्गीय) आदि ने अपने हाथों से रावण का निर्माण किया. गाजे-बाजे और पंजाबी ढोल-नगाड़ों के बीच लगभग 300-400 लोगों की मौजूदगी में पुतले का दहन हुआ था.

  • पहले रावण का पुतला 12 फीट का बनाया गया था
  • आयोजन की जिम्मेदारी पंजाबी हिंदू बिरादरी को सौंपी गयी
  • 1960 से मोरहाबादी मैदान बना रावण दहन का स्थायी स्थल
रांची में हर साल धू-धूकर जलता है रावण का पुतला.

रावण के पुतले की लंबाई बढ़ी, बारी पार्क में होने लगा रावण दहन

वर्ष 1950 से 1955 के बीच पुतले का आकार 25 से 35 फीट तक बढ़ा और बारी पार्क में रावण दहन होने लगा, जहां 25-40 हजार लोग जुटते थे. धीरे-धीरे खर्च बढ़ने पर आयोजन की जिम्मेदारी पंजाबी हिंदू बिरादरी को सौंपी गयी. लाला देशराज, लाला केएल खन्ना और अन्य समाजसेवियों ने इसे आगे बढ़ाया.

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1960 से मोरहाबादी में हो रहा है रावण दहन

कुछ वर्षों तक आयोजन राजभवन के सामने हुआ, लेकिन बढ़ती भीड़ को देखते हुए 1960 से इसे मोरहाबादी मैदान में स्थायी रूप से आयोजित किया जाने लगा. आज यह परंपरा सिर्फ रावण नहीं, बल्कि मेघनाथ और कुंभकर्ण के पुतलों के दहन के साथ भव्य उत्सव का रूप ले चुकी है. एक छोटे से प्रयास से शुरू हुई यह परंपरा अब रांची का सबसे बड़ा सांस्कृतिक आकर्षण बन चुकी है.

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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