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रांची की जनरल सीटों पर महिलाओं का दबदबा, पुरुषों को चटाईं धूल

Updated at : 06 Feb 2026 11:28 AM (IST)
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Ranchi Civic Polls

रांची में नगर निकाय चुनाव 23 फरवरी को होगा.

Ranchi Civic Polls: रांची नगर निगम चुनाव में महिलाओं का दबदबा लगातार बढ़ता जा रहा है. 2008, 2013 और 2018 के चुनावों में महिलाओं ने न सिर्फ आरक्षित बल्कि सामान्य सीटों पर भी जीत दर्ज की. मेयर पद पर भी महिला उम्मीदवार का वर्चस्व रहा, जिसने शहरी राजनीति में महिला नेतृत्व को मजबूती दी. नीचे पूरी खबर पढ़ें.

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रांची से उत्तम महतो और क्रांति दीप की रिपोर्ट

Ranchi Civic Polls: रांची नगर निगम के चुनावी अखाड़े में महिलाओं की भागीदारी और प्रतिनिधित्व में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गयी है. आंकड़ों पर गौर करें, तो निगम के गठन के बाद हुए तीनों चुनाव में बड़ी संख्या में महिलाओं ने जीत दर्ज की. यह बदलाव शहरी राजनीति में महिलाओं की मजबूत होती भूमिका को रेखांकित करता है. वर्ष 2008 में झारखंड गठन के बाद रांची नगर निगम का पहला चुनाव हुआ था. उस चुनाव में कुल 15 महिला प्रत्याशियों ने जीत हासिल की थी.

महिला आरक्षण व्यवस्था का प्रभाव

यह वह दौर था, जब नगर निकाय चुनाव में महिला आरक्षण नयी व्यवस्था के रूप में सामने आया था. सामाजिक स्तर पर राजनीति में महिलाओं की सक्रियता सीमित मानी जाती थी, इसके बावजूद 15 महिलाओं ने पार्षद बन निगम बोर्ड तक अपनी उपस्थिति दर्ज करायी. इसके बाद 2013 में दूसरे नगर निगम चुनाव में महिलाओं की भागीदारी और अधिक बढ़ी. इस चुनाव में 27 महिला प्रत्याशियों ने जीत दर्ज की. यह संख्या पहले के चुनाव की तुलना में लगभग दोगुनी रही. विशेषज्ञों की मानें, तो इस दौरान महिला आरक्षण व्यवस्था का प्रभाव साफ दिखा. स्थानीय मुद्दों पर महिलाओं की पकड़ मजबूत हुई. कई वार्डों में महिलाओं ने सीधे पुरुष प्रत्याशियों को हराकर जीत दर्ज की.

2018 में 32 महिलाएं बनी पार्षद

साल 2018 में हुए तीसरे नगर निगम चुनाव में महिलाओं की स्थिति और सशक्त हुई. इस चुनाव में 32 महिलाएं पार्षद चुनी गयीं. यह अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा रहा. इससे यह स्पष्ट हुआ कि शहरी मतदाता महिलाओं को केवल आरक्षण के कारण नहीं, बल्कि उनके काम और जनसंपर्क के आधार पर भी स्वीकार कर रहे हैं. हालांकि विशेषज्ञ मानते हैं कि संख्या बढ़ने के बावजूद नीति निर्धारण और निर्णय प्रक्रिया में महिलाओं की भूमिका को और मजबूत करने की जरूरत है. फिर भी निगम चुनावों में महिलाओं की यह बढ़ती मौजूदगी शहरी लोकतंत्र के लिए सकारात्मक संकेत मानी जा रही है.

पहले 33% ही था महिलाओं का आरक्षण

झारखंड गठन के बाद संपन्न नगर निकाय चुनावों में महिलाओं के आरक्षण प्रतिशत में भी वृद्धि हुई है. 2008 में संपन्न राज्य के पहले और 2013 में संपन्न दूसरे नगर निकाय चुनाव में महिलाओं को एक तिहाई पदों पर ही आरक्षण दिया गया था. यह व्यवस्था संविधान के 74वें संशोधन और तत्कालीन नगर निकाय कानून के अनुरूप लागू की गयी थी. दोनों चुनावों में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत ही सीटें आरक्षित थी. 2018 में हुये निकाय चुनाव में महिलाओं का आरक्षण बढ़ाकर 50 प्रतिशत कर दिया गया. खास बात यह रही कि हर चुनाव में महिलाओं ने अनारक्षित सीटों पर भी कब्जा जमाया. पुरुषों को पछाड़ते हुए उन्होंने कई सीटों पर जीत हासिल की.

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मेयर सीट पर महिला का दबदबा

वर्ष 2008 में रांची नगर निगम के पहले चुनाव में मेयर पद महिला के लिए आरक्षित था. इस चुनाव में रमा खलखो ने जीत दर्ज कर इतिहास रचा. रांची की पहली महिला मेयर बनीं. यह चुनाव न केवल नगर निगम की शुरुआत का प्रतीक था, बल्कि शहरी शासन में महिलाओं की मजबूत उपस्थिति की नींव भी साबित हुआ. इसके बाद 2013 में दूसरे व 2018 में हुए तीसरे नगर निगम चुनाव में भी मेयर पद पर महिला उम्मीदवार का दबदबा कायम रहा. दोनों बार आशा लकड़ा ने चुनाव जीता. 2018 का चुनाव पहले की तुलना में अधिक प्रतिस्पर्धी था. कई पुरुष उम्मीदवार भी मैदान में थे. लेकिन मतदाताओं ने महिला नेतृत्व पर भरोसा जताया. आशा लकड़ा पुरुषों को धूल चटा कर लगातार दूसरी बार रांची की मेयर बनी थी.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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