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झारखंड : मिलावटी खाद्य पदार्थ खाकर लोग हो रहे बीमार, हाइकोर्ट ने कहा सरकार को नहीं है चिंता

Updated at : 05 Mar 2024 4:06 AM (IST)
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झारखंड : मिलावटी खाद्य पदार्थ खाकर लोग हो रहे बीमार, हाइकोर्ट ने कहा सरकार को नहीं है चिंता

उल्लेखनीय है कि दूध में मिलावट की खबर को झारखंड हाइकोर्ट ने गंभीरता से लेते हुए उसे जनहित याचिका में तब्दील कर दिया था.

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झारखंड हाइकोर्ट ने दूध सहित अन्य खाद्य पदार्थों में मिलावट को लेकर स्वत: संज्ञान से दर्ज जनहित याचिका पर सुनवाई की. जस्टिस रंगन मुखोपाध्याय व जस्टिस दीपक रोशन की खंडपीठ ने माैखिक रूप से कहा कि मिलावटी खाद्य पदार्थ की बिक्री गंभीर बात है. मिलावटी खाद्य पदार्थों के सेवन से लोग बीमार हो रहे हैं, लेकिन राज्य सरकार को कोई चिंता नहीं है. खंडपीठ ने जानना चाहा कि लोगों को नुकसान से बचाने के लिए राज्य में क्या कदम उठाये जा रहे हैं. राज्य के 24 जिलों में सिर्फ रांची के नामकुम में मिलावटी खाद्य पदार्थों की जांच के लिए फूड लैब बनाया गया है. राज्य में कम से कम चार फूड लैब होना चाहिए. मिलावटी खाद्य पदार्थ की जांच के लिए 24 जिलों में मोबाइल वैन की सुविधा होनी चाहिए थी, ताकि मिलावटी खाद्य पदार्थों की तुरंत जांच हो सके. खंडपीठ ने जेपीएससी से पूछा कि वर्ष 2023 में फूड सेफ्टी ऑफिसर के 56 पदों सहित माइक्रोबायोलॉजिस्ट आदि के पदों को भरने के लिए विज्ञापन निकाला गया था. अब तक नियुक्ति प्रक्रिया पूरी क्यों नहीं हुई. मामले की अगली सुनवाई के लिए खंडपीठ ने 12 मार्च की तिथि निर्धारित की. इससे पूर्व मामले के एमिकस क्यूरी अधिवक्ता पीयूष पोद्दार ने पैरवी की. उल्लेखनीय है कि दूध में मिलावट की खबर को झारखंड हाइकोर्ट ने गंभीरता से लेते हुए उसे जनहित याचिका में तब्दील कर दिया था.


एनटीपीसी नोर्थ कर्णपुरा की दूसरी यूनिट का भी पीएम ने किया उदघाटन

रांची. एनटीपीसी की 660 मेगावाट की दूसरी यूनिट का भी सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तेलंगाना से उदघाटन किया. एक मार्च को धनबाद से पीएम ने 660 मेगावाट की यूनिट नंबर एक का उदघाटन किया था. अब दूसरी यूनिट का ट्रायल रन पूरा होने के बाद उदघाटन किया गया है. बताया गया कि इस यूनिट को बनाने में 4609 करोड़ रुपये खर्च किया गया है. यह भारत की पहली सुपर क्रिटिकल थर्मल पावर परियोजना है, जो एयर कूल्ड कंडेंसर तकनीक से बनी है. इस तकनीक में सामान्य वाटर कूल्ड कंडेंसर की तुलना में एक-तिहाई कम पानी की आवश्यकता होती है. बताया गया कि ऊर्जा मंत्रालय से यूनिट दो ट्रायल रन पूरा करने का प्रमाण पत्र मिल चुका है. 15 से 30 दिनों के अंदर कॉमर्शियल उत्पादन की अनुमति भी मिल जायेगी. इसके बाद इस यूनिट से भी झारखंड को 170 मेगावाट बिजली मिलने लगेगी.

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