‘आज भी मेडल के लिए हूं भूखी’ रांची में बोलीं मैरी कॉम, कोल इंडिया मैराथन के धावकों में भरा जोश, सफलता का दिया ये मंत्र

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विजेता को पुरस्कृत करतीं मैरी कॉम

पद्म विभूषण मैरी कॉम ने रांची के मोरहाबादी स्थित बिरसा मुंडा फुटबॉल स्टेडियम में आयोजित कोल इंडिया मैराथन में धावकों में जोश भरा. उन्होंने कहा कि उनके अंदर की भूख मरी नहीं है. आज भी वह मेडल के लिए भूखी हैं. यही भूख आपके अंदर भी होनी चाहिए. उन्होंने सफलता का मंत्र दिया.

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रांची-पद्म विभूषण मैरी कॉम किसी परिचय की मोहताज नहीं है. महिला मुक्केबाजी की दुनिया में मैरी कॉम भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में धूम मचा चुकी हैं. उन्होंने कठिन परिश्रम से यह साबित कर दिया कि प्रतिभा का अमीरी और गरीबी से कोई संबंध नहीं होता और अगर आप के अन्दर कुछ करने का जज्बा है, तो सफलता हर हाल में आपके कदम चूमती है. रविवार को मोरहाबादी स्थित बिरसा मुंडा फुटबॉल स्टेडियम में आयोजित कोल इंडिया मैराथन में धावकों में उन्होंने जोश भरा. उन्होंने कहा कि उनके अंदर की भूख मरी नहीं है. आज भी वह मेडल के लिए भूखी हैं. यही भूख आपके अंदर भी होनी चाहिए.

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खुद पर विश्वास होना जरूरी-मैरी कॉम 


मैरी कॉम ने कहा कि खुद पर विश्वास होना जरूरी है तभी आप सफल हो पायेंगे. तमाम बाधाओं के बाद भी मैंने खुद को साब��त किया. अब मैं आपके सामने हूं. मैरी कॉम बताती हैं कि बचपन से मैं देश के लिए खेलना चाहती थी, शादी के पहले और शादी के बाद भी मेरा खेल चलता रहा. फिर मां बनी लेकिन मुक्केबाजी के प्रति लगाव कभी भी कम नहीं हुआ. पत्नी के साथ-साथ मां की जिम्मेवारी निभाना एक औरत के लिए संघर्ष से कम नहीं होता. लेकिन हर कदम पर पति का साथ मिला. पत्नी और मां की जिम्मेवारी के साथ खेल भी चलता रहा. संघर्ष से एक बात तो समझ में आ गयी कि जिंदगी में कुछ भी आसान नहीं है. जब मैं प्रूफ कर सकती हूं तो आप क्यों नहीं?

जिंदगी में कई उतार-चढ़ाव आयेंगे, घबराना नहीं है-मैरी कॉम

एक किसान परिवार में जन्मी ओलंपियन मैरी कॉम बताती हैं कि वो पहले एथलीट थी, बाद में उनकी रुचि मुक्केबाजी में हुई. जब उन्होंने मुक्केबाजी शुरू की तो लोग ताने देते थे कि ये लड़की है इससे कुछ नहीं होगा. लेकिन, मेरे अंदर देश के लिए मेडल लाने की भूख थी. हमने दिन रात मेहनत की. हमने जो कुछ भी किया पिता जी से छुपकर किया, क्योंकि वो मुझे एथलीट बनाना चाहते थे. लेकिन ये स्पष्ट है कि आपका लक्ष्य तय है और मेहनत करती हैं तो आप जरूर सफल होंगे. उतार-चढ़ाव से घबराने की जरूरत नहीं है.

मैरी कॉम को कौन-कौन से पुरस्कार मिले हैं?

2003 में अर्जुन पुरस्कार

2006 में पद्मश्री अवॉर्ड

2009 में मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार

2009 में देश का सर्वोच्च खेल सम्मान राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार

2020 में भारत का दूसरा सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार पद्म विभूषण

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