My Mati: डायबिटीज-अल्सर समेत आधा दर्जन से अधिक बीमारियों की दवा है करंज

National Ayurveda Day|My Mati|Jharkhand Foundation Day 2022|मधुमेह यानी डायबिटीज, अल्सर, गठिया, वात, कफ, उदर रोग यानी पेट की बीमारियां और आंख की बीमारियों के इलाज में करंज से बनी दवाएं रामबाण का काम करती हैं. आयुर्वेदिक चिकित्सा में इसके तेल का प्रयोग किया जाता है.
My Mati|Jharkhand Foundation Day 2022|आज राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस (National Ayurveda Day) है. झारखंड में आयुर्वेदिक वनस्पतियों की भरमार है. आयुर्वेदिक दवा बनाने वाली कंपनियां जंगल के आसपास बसे गांवों से इनकी खरीद करती है और ऊंचे दामों पर दवाएं बेचतीं हैं. प्रदेश की वनस्पतियों पर चूंकि कोई प्रामाणिक अध्ययन नहीं हुआ है, इसलिए लोगों को उसके गुणों के बारे में बहुत ज्यादा जानकारी नहीं है. नेशनल आयुर्वेद डे पर हम आपको बता रहे हैं झारखंड में बहुतायत में पाये जाने वाले करंज के पेड़ और उसके आयुर्वेदिक इस्तेमाल के बारे में.
डायबिटीज, अल्सर समेत आधा दर्जन से अधिक बीमारियों की दवा है करंज. इसका इस्तेमाल दवा बनाने में तो होता ही है, कई उद्योगों में भी इसका इस्तेमाल होता है. करंज के तेल, फूल और पत्ती से कई गंभीर रोगों की दवा बनती है. मधुमेह यानी डायबिटीज, अल्सर, गठिया, वात, कफ, उदर रोग यानी पेट की बीमारियां और आंख की बीमारियों के इलाज में करंज से बनी दवाएं रामबाण का काम करती हैं. आयुर्वेदिक चिकित्सा में इसके तेल का प्रयोग किया जाता है.
Also Read: वन उत्पाद से कैसे बढ़े कमाई, रांची में 12 राज्यों के 15 IFS ऑफिसर को ट्रेनिंग दे रहा वन उत्पादकता संस्थान
वन उत्पादकता संस्थान रांची के बीडी पंडित के मुताबिक, झारखंड में बड़े पैमाने पर करंज के पेड़ पाये जाते हैं. पेड़ के अलग-अलग हिस्से का अलग-अलग उपयोग होता है. इसलिए प्रदेश के किसान इससे मोटी कमाई कर सकते हैं. इसकी पतली टहनी दातुन करने के काम आता है. करंज के तेल का इस्तेमाल दीपावली में दीये जलाने में होता है. इसके तेल का इस्तेमाल कई प्रकार के चर्म रोग के उपचार में भी होता है. ग्रामीण इलाकों में लोग इस तेल का ईंधन के रूप में भी इस्तेमाल करते हैं.
इतना ही नहीं, इसके और भी कई गुण हैं. यह बायो-डीजल बनाने में काम आता है. इससे निकलने वाले तेल का उपयोग चमड़ा उद्योग, साबुन उद्योग, फिनाइल बनाने के उद्योग में भी होता है. ग्रीस व अन्य तेलों के साथ करंज का तेल मिलाकर पॉलिस बनाया जाता है. इसकी खल्ली का इस्तेमाल किसान खेतों की उपज बढ़ाने के लिए करते हैं. करंज का तेल खेतों में कीटनाशक का भी काम करता है.
Also Read: झारखंड में किसानों को 3,000 में मिल रहा 2.5 लाख रुपये का वर्मी कंपोस्ट पिट, IFP के वैज्ञानिकों का कमाल
इसकी लकड़ी भी बड़े काम की चीज है. इससे कृषि के औजार बनाये जाते हैं. मकान बनाने में इसकी लकड़ी का उपयोग होता है. साथ ही ईंधन के रूप में इसका उपयोग होता है. करंज देश के अधिकांश भागों में पाया जाता है. फेबेसी कुल का यह एक सदाबहार वृक्ष है. ऐसे क्षेत्रों में पाया जाता है, जहां साल में 500-2500 मिलीमीटर वर्षा होती है. न्यूनतम तापमान 0 डिग्री सेंटीग्रेड से 16 डिग्री सेंटीग्रेड और अधिकतम तापमान 27 डिग्री से 50 डिग्री सेंटीग्रेड के बीच होनी चाहिए.
माना जाता है कि करंज का उत्पत्ति स्थल भारत ही है. इस छायादार वृक्ष की छांव में घास की अच्छी-खासी वृद्धि होती है. इसलिए इसे चारागाह तैयार करने के लिए उपयुक्त माना जाता है. भारत में सालाना 200 मीट्रिक टन करंज के तेल का उत्पादन होता है. बायो-डीजल का बेहतरीन स्रोत है, जो झारखंड के सभी क्षेत्रों में पाया जाता है. इसके गुणों को देखते हुए हाल के वर्षों में सड़कों और राजमार्गों के किनारे बड़े पैमाने पर करंज के पौधे लगाये गये हैं.
Also Read: वन विभाग के अधिकारी रांची में ले रहे इंटरनेट GIS और रिमोट सेंसिंग टेक्नोलॉजी का प्रशिक्षण
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
लेखक के बारे में
By Mithilesh Jha
मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए




