ePaper

वन उत्पाद से कैसे बढ़े कमाई, रांची में 12 राज्यों के 15 IFS ऑफिसर को ट्रेनिंग दे रहा वन उत्पादकता संस्थान

Updated at : 13 Sep 2022 7:36 PM (IST)
विज्ञापन
वन उत्पाद से कैसे बढ़े कमाई, रांची में 12 राज्यों के 15 IFS ऑफिसर को ट्रेनिंग दे रहा वन उत्पादकता संस्थान

वन उत्पादकता संस्थान रांची की ओर से ‘वन सीमांत गांवों में आजीविका संवर्धन की रणनीतियां’ विषय पर आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम में झारखंड के वन विभाग के अधिकारी उन्हें बता रहे हैं कि जंगल के आसपास के गांवों के लोगों की आजीविका को कैसे बढ़ा सकते हैं.

विज्ञापन

भारत की बड़ी आबादी जंगलों में रहती है. करीब 10 करोड़ लोगों को जंगल से आजीविका मिलती है. जंगल को सुरक्षित रखते हुए किस तरह से जंगलों के आसपास रहने वाले लोगों के जीवन स्तर में सुधार लाया जा सकता है, उसके बारे में देश के एक दर्जन राज्यों के वन सेवा के 15 अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है. 12 सितंबर को शुरू हुआ यह प्रशिक्षण कार्यक्रम 16 सितंबर तक चलेगा.

जंगल खत्म न हों और वनोपज से बढ़े रोजगार

वन उत्पादकता संस्थान रांची की ओर से ‘वन सीमांत गांवों में आजीविका संवर्धन की रणनीतियां’ विषय पर आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम में झारखंड के वन विभाग के अधिकारी उन्हें बता रहे हैं कि जंगल के आसपास के गांवों के लोगों की आजीविका को कैसे बढ़ा सकते हैं. उन्हें बताया जा रहा है कि जंगल खत्म भी न हो और फॉरेस्ट प्रोड्यूस से ज्यादा से ज्यादा लोगों को रोजगार मिल सके. झारखंड के मॉडल के बारे में भी उन्हें बताया जा रहा है.

Also Read: #MannKiBaat में झारखंड के आरा और केरम गांव की पीएम ने की तारीफ, जानें कैसे हैं ये गांव
आरा-केरम गांव से प्रभावित हैं पीएम नरेंद्र मोदी

इसके तहत देश के अलग-अलग राज्यों से आये वन विभाग के अधिकारियों को तसर इंस्टीट्यूट, रामकृष्ण मिशन, जेएसपीएल का भ्रमण करवाया जायेगा. ये लोग मॉडल विलेज आरा-केरम गांव भी जायेंगे. रांची के इस गांव के ट्रांसफॉर्मेशन की चर्चा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने ‘मन की बात’ में भी कर चुके हैं.

प्रशिक्षण के उद्देश्यों के बारे में बताया

भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद, देहरादून (आभासी मंच) के महानिदेशक डॉ एएस रावत, झारखंड के प्रधान मुख्य वन संरक्षक (ईडी) डॉ संजय श्रीवास्तव की उपस्थिति में दूसरे दिन मंगलवार को प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरुआत हुई. वैज्ञानिक-ई और पाठ्यक्रम निदेशक संजीव कुमार ने सभी का स्वागत किया और प्रशिक्षण के उद्देश्यों और कार्यक्रम की रूपरेखा के बारे में जानकारी दी.

आजीविका वृद्धि मॉड्यूल के महत्व की दी जानकारी

वन उत्पादकता संस्थान रांची के निदेशक डॉ नितिन कुलकर्णी ने वन सीमांत ग्रामीणों के लिए आजीविका वृद्धि मॉड्यूल के महत्व के बारे में बताया, जिसमें लाख, तसर, बांस, शहद आदि शामिल हैं. समूह समन्वयक (अनुसंधान) डॉ योगेश्वर मिश्रा, डॉ अनिमेष सिन्हा, डॉ आदित्य कुमार, अंजना तिर्की और रूबी कुजूर कार्यक्रम में उपस्थित रहीं.

प्रतिभागियों ने कई संस्थानों का किया दौरा

तकनीकी सत्र में डॉ योगेश्वर मिश्रा और डॉ आदित्य कुमार और वरिष्ठ वैज्ञानिकों ने आजीविका बढ़ाने के लिए संस्थान द्वारा की गयी विभिन्न गतिविधियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी. पूर्वाह्न सत्र में सभी प्रतिभागियों ने रामकृष्ण मिशन, मोराबादी का दौरा किया, जहां संगठन द्वारा की जा रही गतिविधियों को प्रदर्शित किया गया. प्रतिभागियों को नामकुम स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ नेचुरल रेजिन एंड गम्स और खूंटी स्थित तजाना शेलैक फैक्ट्री में चल रहे कार्यों की जानकारी दी.

प्रशिक्षण कार्यक्रम वक्त की जरूरत

इससे पहले, सोमवार को मुख्य अतिथि भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद, देहरादून के महानिदेशक डॉ एएस रावत ने आजीविका उत्थान की सफल कहानियों के साथ प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने के लिए बधाई दी. झारखंड के प्रधान मुख्य वन संरक्षक (ईडी) डॉ संजय श्रीवास्तव ने कहा कि भारत में लगभग 10 करोड़ लोग अपनी आजीविका के लिए पूरी तरह से जंगल पर निर्भर हैं. वर्तमान में वन सीमांत गांवों के लिए आजीविका वृद्धि की रणनीतियों पर प्रशिक्षण कार्यक्रम की आवश्यकता है.

विज्ञापन
Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola