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झारखंड में किसानों को 3,000 में मिल रहा 2.5 लाख रुपये का वर्मी कंपोस्ट पिट, IFP के वैज्ञानिकों का कमाल

Updated at : 24 Sep 2022 2:53 PM (IST)
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झारखंड में किसानों को 3,000 में मिल रहा 2.5 लाख रुपये का वर्मी कंपोस्ट पिट, IFP के वैज्ञानिकों का कमाल

जैविक खाद तैयार करने के लिए जो कंपोस्ट पिट (Wormi Compost Pit) बनाया जाता है, उसकी लागत आमतौर पर 2.5 लाख रुपये से 3 लाख रुपये के बीच आती है. लेकिन, झारखंड में किसानों को महज 3,000 रुपये में वर्मी कंपोस्ट पिट उपलब्ध कराया जा रहा है.

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रासायनिक खेती से तबाही के बाद पूरी दुनिया में जैविक खेती (Organic Farming) पर जोर दिया जा रहा है. भारत में भी इस दिशा में तेजी से काम हो रहा है. जैविक खेती को बढ़ावा देने के साथ-साथ किसानों को रासायनिक खाद (Chemical Fertilizer) से बचने की भी सलाह दी जा रही है. इसके लिए उन्हें बाकायदा जैविक खाद (Organic Manure) से खेती करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है. जैविक खाद तैयार करने की ट्रेनिंग भी दी जा रही है.

पोर्टेबल पिट को कहीं ले जा सकते हैं

जैविक खाद तैयार करने के लिए जो कंपोस्ट पिट (Wormi Compost Pit) बनाया जाता है, उसकी लागत आमतौर पर 2.5 लाख रुपये से 3 लाख रुपये के बीच आती है. लेकिन, भारत सरकार के वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के अधीन काम करने वाली संस्था वन उत्पादकता संस्थान रांची के वैज्ञानिकों की मदद से झारखंड में किसानों को महज 3,000 रुपये में वर्मी कंपोस्ट पिट उपलब्ध कराया जा रहा है. यह पोर्टेबल पिट है, जिसे कहीं भी ले जा सकते हैं.

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IFP रांची ने बनाया पोर्टेबल पिट

किसानों की सुविधा के लिए वन उत्पादकता संस्थान (IFP Ranchi) के वैज्ञानिकों ने यह पोर्टेबल पिट तैयार किया है. रांची स्थित वन उत्पादकता संस्थान (Institute of Forest Productivity Ranchi) के सीनियर साइंटिस्ट डॉ संजीव भाटिया ने बताया कि उनके संस्थान की ओर से किसानों के कल्याण के लिए कई काम वैज्ञानिक कर रहे हैं.

प्लास्टिक से तैयार किया वर्मी कंपोस्ट पिट

डॉ भाटिया ने बताया कि अगर कोई किसान कंपोस्ट पिट बनाना चाहे, तो उसे जमीन के साथ-साथी मोटी रकम भी खर्च करनी पड़ती है. लेकिन, वन उत्पादकता संस्थान के वैज्ञानिकों ने उनके लिए एक प्लास्टिक से बना बैग तैयार किया है, जिसमें वर्मी कंपोस्ट तैयार किया जा सकता है. यह पोर्टेबल पिट है, जिसे आप कहीं भी ले जा सकते हैं.

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किसानों को मुफ्त में केंचुआ देता है संस्थान

उन्होंने बताया कि वन उत्पादकता संस्थान की ओर से कुछ लोगों को मुफ्त में भी ये प्लास्टिक पिट दिया जाता है. साथ में केंचुआ भी फ्री में दिया जाता है, ताकि किसान जैविक खाद बना सकें. यह पिट उन लोगों के लिए भी फायदेमंद है, जो शहरों में रहते हैं. वे चाहें, तो इस पिट को मकान की छत पर भी रख सकते हैं. अगर घर बदलना पड़े, तो भी उन्हें कोई परेशानी नहीं होगी.

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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