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रिम्स में अपने इलाके के मरीजों का इलाज कराने के लिए विधायक परेशान, हर दिन पैरवी लेकर पहुंच रहे हैं 150 लोग

Updated at : 07 Sep 2023 7:18 AM (IST)
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रिम्स में अपने इलाके के मरीजों का इलाज कराने के लिए विधायक परेशान, हर दिन पैरवी लेकर पहुंच रहे हैं 150 लोग

विधायक के रिम्स प्रतिनिधि मरीजों की भर्ती से लेकर उनकी दवा तक का ख्याल रखते हैं. हर दिन औसतन विधायकों के ही 150 मरीज रिम्स पहुंच रहे हैं. इनके इलाज के लिए वे निदेशक से लेकर डॉक्टरों के फोन घनघनाते हैं.

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राज्य के विधायक अपने-अपने क्षेत्र के मरीजों का इलाज कराने में परेशान हैं. जिलों में सदर अस्पताल की हालत खराब है. ऐसे में दुर्घटना से लेकर छोटी-मोटी बीमारियों के लिए भी रिम्स रेफर किया जाता है. इसके बाद विधायकों की परेशानी बढ़ जाती है. रिम्स में मरीजों को बेड दिलाना व बेहतर इलाज कराना चुनौती है. इस संबंध में विधायकों से बात करने पर पता चला कि एक विधायक को प्रतिदिन तीन से पांच मरीजों को रिम्स भेजना पड़ता है. इसके लिए विधायकों ने रिम्स में बकायदा आदमी को तैनात कर रखा है.

विधायक के रिम्स प्रतिनिधि मरीजों की भर्ती से लेकर उनकी दवा तक का ख्याल रखते हैं. हर दिन औसतन विधायकों के ही 150 मरीज रिम्स पहुंच रहे हैं. इनके इलाज के लिए वे निदेशक से लेकर डॉक्टरों के फोन घनघनाते हैं. रात के 12 बजे भी मरीजों को भर्ती कराने के लिए परिजनों का फोन आता है. विधायकों ने बताया कि सदर अस्पतालों की हालत खराब है. यहां डॉक्टरों की भी कमी है. इन अस्पतालों में सर्दी-बुखार से ज्यादा इलाज नहीं हो पाता है. विधायकों का कहना है कि रिम्स में हॉर्निया और अपेंडिक्स के इलाज के लिए भी पैरवी करनी पड़ती है.

बोले विधायक

जिलों में आधारभूत संरचना नहीं है. लोग परेशान रहते हैं. हर दिन दो-चार गंभीर रूप से बीमार लोग संपर्क में आते हैं. गिरिडीह सदर अस्पताल में डॉक्टरों की कमी है. स्वीकृत पद के विरुद्ध 50 प्रतिशत लोग भी कार्यरत नहीं हैं. मरीजों को तुरंत रेफर कर दिया जाता है. रिम्स पर दबाव बढ़ेगा ही.

– विनोद सिंह, माले

मैं हर दिन चार से पांच मरीजों को रिम्स भेजता हूं. क्षेत्र के लोगों को परेशानी न हो, इसके लिए मैंने एक लड़के को रिम्स में रखा है. हमें लगातार रिम्स प्रबंधन को पैरवी करनी पड़ती है. अस्पताल भी लाचार है. दुर्घटना में घायलों को बचाना एक चुनौती है.

-विरंची नारायण, भाजपा

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पलामू-गढ़वा के सरकारी अस्पतालों में कोई व्यवस्था नहीं है. ऐसे में रिम्स भेजना पड़ता है. इसके लिए हमने दो लड़के को रिम्स में लगा कर रखा है. रिम्स की हालत भी खराब है. रिम्स को बेहतर करने और सदर अस्पतालों को ठीक करने की तत्काल योजना बनाने की जरूरत है.

-भानु प्रताप शाही, भाजपा

हर दिन पांच से ज्यादा मरीजों का इलाज रिम्स में कराना पड़ता है. गरीबी से त्रस्त लोग प्राइवेट अस्पताल में नहीं जा सकते हैं. कई बार तो प्राइवेट अस्पताल भी रिम्स रेफर करते हैं. सड़क दुर्घटना में घायलों को तुरंत सुविधा दिलानी पड़ती है. ऐसे में रिम्स प्रबंधन भारी दबाव में काम करता है.

डॉ लंबोदर महतो, आजसू

क्रिटिकल केयर में 80 बेड मरीज आते हैं 400 : निदेशक

रिम्स के निदेशक राजीव कुमार गुप्ता ने कहा कि रिम्स पर मरीजों का काफी दबाव होता है. क्रिटिकल केयर में 80 बेड हैं. जबकि, हर दिन 400 के करीब मरीज आते हैं. गंभीर रूप से बीमार और घायलों का इलाज हमारी प्राथमिकता है. विधायकों का भी फोन आता है. कई बार हम लाचार होते हैं. पैरवी के बाद भी बेड दिलाना संभव नहीं होता है.

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