वन भूमि घोटाला: आईएएस अधिकारी विनय चौबे की जमानत पर सुनवाई पूरी, फैसला सुरक्षित

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Jharkhand High Court

झारखंड हाईकोर्ट का मुख्य द्वार. फाइल फोटो.

Jharkhand High Court: झारखंड हाईकोर्ट में हजारीबाग वनभूमि घोटाला मामले में आईएएस विनय कुमार चौबे की जमानत याचिका पर सुनवाई पूरी हो गई. अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनकर फैसला सुरक्षित रख लिया है. यह मामला एसीबी कांड संख्या 11/2025 से जुड़ा हुआ है. अब सभी की नजर फैसले पर है. इससे जुड़ी खबर नीचे पढ़ें.

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रांची से राणा प्रताप की रिपोर्ट

Jharkhand High Court: झारखंड हाईकोर्ट में हजारीबाग वनभूमि घोटाला मामले से जुड़े आरोपी आईएएस अधिकारी विनय कुमार चौबे की जमानत याचिका पर महत्वपूर्ण सुनवाई पूरी हो गई. यह सुनवाई जस्टिस अनुभा रावत चौधरी की अदालत में हुई, जहां दोनों पक्षों की विस्तृत दलीलें सुनी गईं. अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है.

एसीबी और बचाव पक्ष ने रखा अपना पक्ष

सुनवाई के दौरान एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) की ओर से अदालत में आरोपों को मजबूत आधार देने की कोशिश की गई. एसीबी ने कहा कि जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर आरोपी की भूमिका संदिग्ध प्रतीत होती है और मामले में आगे की जांच आवश्यक है. वहीं दूसरी ओर, आईएएस विनय कुमार चौबे की ओर से पेश वकीलों ने अदालत में जोर देकर कहा कि उनके मुवक्किल निर्दोष हैं. बचाव पक्ष ने दलील दी कि उन पर लगाए गए आरोप न तो तथ्यात्मक रूप से सही हैं और न ही उनके खिलाफ कोई ठोस साक्ष्य मौजूद है.

जमानत की मांग और निर्दोष होने का दावा

प्रार्थी की ओर से अदालत में यह भी कहा गया कि उन्हें झूठे आरोपों में फंसाया गया है. उनकी ओर से जमानत देने का अनुरोध करते हुए कहा गया कि जांच में सहयोग करने के लिए वे हमेशा तैयार हैं. बचाव पक्ष ने यह भी तर्क दिया कि उन्हें हिरासत में रखने का कोई औचित्य नहीं बनता.

एसीबी कांड संख्या 11/2025 से जुड़ा मामला

यह मामला एसीबी हजारीबाग द्वारा दर्ज कांड संख्या 11/2025 से संबंधित है. इसी मामले में विनय कुमार चौबे ने जमानत के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर की है. मामला वनभूमि से जुड़े कथित घोटाले और प्रशासनिक अनियमितताओं से जुड़ा हुआ बताया जा रहा है.

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अदालत का अगला कदम

सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है. अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि हाईकोर्ट इस मामले में जमानत को मंजूरी देता है या फिर जांच को और मजबूत आधार देने के लिए याचिका खारिज करता है.

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कुमार विश्वत सेन

लेखक के बारे में

By कुमार विश्वत सेन

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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