बांग्लादेशियों की घुसपैठ पर बोले गवर्नर- विदेशी बदल देंगे झारखंड के आदिवासियों की जीवनशैली, देखें VIDEO

बांग्लादेशी घुसपैठियों की वजह से झारखंड के आदिवासियों की जीवनशैली बदल जायेगी. झारखंड की डेमोग्राफी भी बदल जायेगी. बांग्लादेशियों की तेजी से घुसपैठ हो रही है. यह बेहद चिंता की बात है. हमें सतर्क रहना होगा. ये बातें झारखंड के राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन ने कहीं.
झारखंड के राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन ने लगातार हो रही बांग्लादेशियों की घुसपैठ पर चिंता जतायी है. उन्होंने कहा है कि दूसरे देश से आने वाले ये लोग झारखंड के आदिवासियों की पूरी जीवनशैली बदलकर रख देंगे. यह बेहद घातक है. उन्होंने कहा कि सबसे चिंता की बात यह है कि वे घुसपैठ करके झारखंड में आते हैं और आदिवासी बेटियों, महिलाओं से शादी कर लेते हैं. यह बेहद खतरनाक है. इस मामले में हमें बेहद सावधान रहना होगा.
घुसपैठ पर सीएम और सीएस से की बात : राज्यपाल
राज्यपाल ने श्री राधाकृष्णन ने कहा कि इस मुद्दे पर उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से बात की है. राज्य के मुख्य सचिव का भी ध्यान इस ओर आकृष्ट करवाया है. राज्यपाल ने यह भी कहा कि विदेशी घुसपैठियों की वजह से झारखंड की डेमोग्राफी नहीं बदलनी चाहिए. हमें इस विषय में बेहद सतर्क और सावधान रहना होगा.
झारखंड में बढ़ी बांग्लादेशियों की घुसपैठ
पत्रकारों के एक सवाल के जवाब में झारखंड के राज्यपाल ने सोमवार को ये बातें कहीं. महामहिम सीपी राधाकृष्णन से जब पत्रकारों ने पूछा कि झारखंड में बांग्लादेशियों की घुसपैठ तेजी से हो रही है, तो उन्होंने ये बातें कहीं. उन्होंने कहा कि यह बेहद चिंता का विषय है. इस मामले में बेहद गंभीरता से विचार करने की जरूरत है. झारखंड में बांग्लादेशियों की संख्या बहुत ज्यादा हो गयी है.
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झारखंड की डेमोग्राफी बदल देंगे बांग्लादेशी घुसपैठिये
राज्यपाल ने कहा कि बांग्लादेशियों की संख्या झारखंड में तेजी से बढ़ रही है. अगर इसे नियंत्रित नहीं किया गया, तो यह झारखंड के लिए खतरनाक होगा. खासकर तब जब घुसपैठिये अवैध तरीके से हमारे राज्य में प्रवेश कर रहे हैं और यहां की आदिवासी महिलाओं से शादी कर रहे हैं. अगर इस स्थिति को नियंत्रित नहीं किया गया, तो ये विदेशी घुसपैठिये झारखंड की डेमोग्राफी को बदलकर रख देंगे. झारखंड के आदिवासियों के लाइफस्टाइल को ही बदल देंगे.
आदिवासियों की जीवनशैली नहीं बदलनी चाहिए
राज्यपाल ने कहा कई संगठनों और व्यक्तियों के जरिये यह बात मुझ तक पहुंची है. उन्होंने कहा कि आदिवासियों के रहन-सहन में बदलाव नहीं आना चाहिए. उनकी जीवनशैली में बदलाव नहीं आना चाहिए. झारखंड की डेमोग्राफी भी नहीं बदलनी चाहिए. इसका हम सबको ध्यान रखना होगा. हमें बेहद सावधानी बरतनी होगी.
#WATCH | Ranchi, Jharkhand: CP Radhakrishnan, Jharkhand Governor on the matter of intrusion of Bangladeshi people rising in Jharkhand, "…This is very dangerous because the intrusion of foreigners will change the entire lifestyle of the tribal people. Especially when they are… pic.twitter.com/vm3h2MOeqL
— ANI (@ANI) July 24, 2023
बीजेपी का भी है आरोप- बढ़ रही है घुसपैठ
बता दें कि झारखंड की मुख्य विपक्षी पार्टी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) लगातार आरोप लगाती रही है कि झारखंड में बांग्लादेशियों की राजनीतिक साजिश के तहत घुसपैठ करायी जा रही है. बीजेपी विधायक दल के नेता बाबूलाल मरांडी खुलकर झारखंड सरकार पर वोट की राजनीति और तुष्टीकरण के लिए घुसपैठ को बढ़ावा देने का आरोप लगाते हैं.
पाकुड़ और साहिबगंज में तेजी से बढ़े बांग्लादेशी
झारखंड के किसी भी हिस्से से बांग्लादेश की सीमा नहीं सटती है. बावजूद इसके तेजी से बांग्लादेशियों की झारखंड में घुसपैठ बढ़ी है. खासकर सूबे के पूर्वोत्तर के जिलों में. पाकुड़ और साहिबगंज में अवैध रूप से घुसपैठिये आ रहे हैं. यहां जमीन खरीद रहे हैं और आदिवासी महिलाओं से शादी करके यहीं बस जा रहे हैं.
गुमानी प्रखंड में 80 फीसदी आबादी मुसलमानों की
बता दें कि पाकुड़ और साहिबगंज दो ऐसे जिले हैं, जो पश्चिम बंगाल के मुस्लिम बहुल जिले मुर्शिदाबाद और मालदा से मिलते हैं. साहिबगंज जिले का गुमानी प्रखंड मालदा जिले के फरक्का से महज 20 किलोमीटर की दूरी पर है, जबकि बांग्लादेश की सीमा यहां से महज 50 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. इस ब्लॉक में 80 फीसदी से अधिक परिवार मुस्लिम समुदाय के हैं. इनकी जड़ें या तो बांग्लादेश में हैं या पश्चिम बंगाल में.
पाकुड़ के तीन पहाड़ में पकड़ाया था बर्दवान ब्लास्ट का आरोपी
इन परिवारों के सदस्यों का कहना है कि 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के समय इनमें से अधिकांश के परिजन बांग्लादेश से यहां आये थे. तब से यहीं रह रहे हैं. उन्हें भारतीय कहलाने में गर्व की अनुभूति होती है. वहीं, तीन पहाड़ के स्थानीय लोग कहते हैं कि पश्चिम बंगाल के बर्दवान में हुए बम धमाके का एक आरोपी यहां पाया गया था. इनकी संख्या तेजी से बढ़ी है. इनसे पूछेंगे कि आप कहां के रहने वाले हैं, तो ये सच नहीं बतायेंगे.
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By Mithilesh Jha
मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.
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