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आखिरी चुनाव लड़ रहे सीपी सिंह पहली बार कैसे बने थे रांची के विधायक, जानें पूरी कहानी

Updated at : 10 Nov 2024 12:10 PM (IST)
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Jharkhand Chunav: Jharkhand Chunav: रांची विधानसभा सीट पर आखिरी बार चुनाव लड़ रहे सीपी सिंह पहली बार कब और कैसे बने थे विधायक? पढ़ें, यशवंत सिन्हा के इस्तीफे से सीपी सिंह को टिकट मिलने तक की पूरी कहानी.

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Jharkhand Chunav: रांची विधानसभा के विधायक चंद्रेश्वर प्रसाद सिंह (सीपी सिंह) वर्ष 1996 में पहली बार विधायक बने थे. तब से वह लगातार जीत रहे हैं. झारखंड विधानसभा चुनाव 2024 को उन्होंने अपना आखिरी चुनाव बताया है. आइए, आज आपको बताते हैं कि सीपी सिंह पहली बार विधायक कैसे बने थे. किसकी सिफारिश पर उनको टिकट मिला था.

साफगोई पसंद और सर्वसुलभ नेता हैं सीपी सिंह

झारखंड भाजपा के सबसे वरिष्ठ विधायक सीपी सिंह के आखिरी चुनाव में उनका प्रचार करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आ रहे हैं. वह शाम को रोड शो करेंगे. सीपी सिंह को विधानसभा चुनाव का टिकट कैसे मिला, इसको जानने से पहले थोड़ा उनके व्यक्तित्व के बारे में जान लीजिए. झारखंड के पूर्व नगर विकास मंत्री सीपी सिंह साफगोई पसंद और सर्वसुलभ नेता हैं. बेबाकी के लिए जाने वाले चंद्रेश्वर प्रसाद सिंह के विधानसभा पहुंचने का रास्ता बहुत आसान नहीं था. यशवंत सिन्हा के इस्तीफा के बाद उपचुनाव लड़कर वह विधायक निर्वाचित हुए थे. तब से वह लगातार जीत रहे हैं.

1995 में हवाला कांड के बाद यशवंत सिन्हा ने दे दिया इस्तीफा

वर्ष 1995 में विधानसभा चुनाव हुए थे. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कद्दावर नेता यशवंत सिन्हा रांची विधानसभा सीट से निर्वाचित हुए थे. कुछ ही दिनों बाद हवाला का मामला सामने आया और यशवंत सिन्हा ने विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया.

1996 में रांची विधानसभा उपचुनाव में हुआ सीपी सिंह का विरोध

वर्ष 1996 में रांची विधानसभा सीट पर उपचुनाव की घोषणा हुई. यशवंत सिन्हा, गोविंदाचार्य और बिहार प्रदेश के तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष ने सीपी सिंह को चुनाव लड़ाने की सिफारिश की. उनको टिकट दे दिया गया. सिंबल भी मिल गया. लेकिन, पार्टी के अंदर सीपी सिंह का विरोध होने लगा.

अटल बहारी वाजपेयी ने पूछा- किसको दिया गया है टिकट?

सीपी सिंह को टिकट दिए जाने से नाराज कुछ लोगों ने इसकी शिकायत की. बात तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी तक पहुंची. कई शिकायतें मिलने पर अटल बिहारी वाजपेयी ने यशवंत सिन्हा, बिहार प्रदेश भाजपा अध्यक्ष और गोविंदाचार्य को दिल्ली तलब किया. पूछा- किसको टिकट दिया गया है.

गोविंदाचार्य, यशवंत सिन्हा ने कहा – कार्यकर्ता को दिया है टिकट

तीनों नेताओं ने अटलजी को बताया कि पार्टी के एक कार्यकर्ता को टिकट दिया गया है. वाजपेयी ने इनसे फिर पूछा कि किसी अन्य नेता को टिकट का वादा तो नहीं किया था. तीनों नेताओं ने बताया कि किसी से ऐसा वादा नहीं किया गया. इस पर अटलजी ने उनसे कहा कि वे लाल कृष्ण आडवाणी से इस विषय में बात कर लें.

आडवाणी बोले – रांची से सीपी सिंह ही चुनाव लड़ेंगे

तीनों नेता आडवाणी के पास पहुंचे. पूरी बात बतायी. आडवाणी ने सिर्फ एक सवाल किया – क्या सिंबल दे दिया गया है. यशवंत सिन्हा समेत सभी 3 नेताओं ने कहा – हां. सीपी सिंह को सिंबल दिया जा चुका है. इस पर आडवाणी ने कहा कि अब कोई फेरबदल करने की जरूरत नहीं है. सीपी सिंह ही चुनाव लड़ेंगे.

…और युवा टोली के साथ चुनाव के मैदान में कूद गए सीपी सिंह

इसके बाद लाल राजेंद्र नाथ शाहदेव और दुती पाहन ने सीपी सिंह को बताया कि उनका विधानसभा चुनाव लड़ना फाइनल हो गया है. इसके बाद सीपी सिंह युवा कार्यकर्ताओं की टोली के साथ मैदान में कूदे और पहले ही चुनाव में बाजी मार ली. इसके बाद से वह लगातार रांची विधानसभा सीट से चुनाव जीत रहे हैं. अब तक उनको कोई नहीं हरा पाया. रघुवर दास सरकार में नगर विकास एवं आवास मंत्री बनने से पहले वह विधानसभा के अध्यक्ष भी रहे.

अलग झारखंड राज्य के लिए आंदोलन में निभाई थी सक्रिय भूमिका

सीपी सिंह ने अलग झारखंड राज्य के लिए होने वाले आंदोलनों में भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया था. एकीकृत बिहार में पार्टी के अंदर तर्कसंगत तरीके से अपनी बातें केंद्रीय नेतृत्व के समक्ष रखीं. अलग राज्य की मांग पर जब आर्थिक नाकेबंदी की गयी, तो सीपी सिंह ने मुरी स्टेशन पर नाकेबंदी को सफल बनाने में अहम भूमिका निभायी. 15 नवंबर 2000 को जब झारखंड अलग राज्य बना, उस वक्त नये प्रदेश की राजधानी रांची के विधायक सीपी सिंह ही थे.

झारखंड विधानसभा चुनाव की ताजा खबरें यहां पढ़ें

झारखंड विधानसभा में बने पार्टी के मुख्य सचेतक

बिहार से अलग होकर झारखंड राज्य बना, तो झारखंड विधानसभा में सत्तारूढ़ दल का पहला मुख्य सचेतक सीपी सिंह को बनाया गया. मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी बने थे. इतना ही नहीं, वर्ष 2019 में जब झारखंड विधानसभा चुनाव खत्म हुए, तो बाबूलाल मरांडी को नेता प्रतिपक्ष की मान्यता स्पीकर ने नहीं दी थी. भाजपा के नेता के रूप में स्पीकर ने सीपी सिंह को ही बैठक में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया था.

नक्सलियों को राजनीतिक संरक्षण का हमेशा किया विरोध

नक्सलियों को राजनीतिक संरक्षण के सीपी सिंह घोर विरोधी रहे. उनका कहना था कि नक्सलियों को राजनीतिक संरक्षण मिलना बंद हो जाये, तो काफी हद तक इस समस्या का निदान संभव है. उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में गुमराह हो चुके युवाओं को रोजगार से जोड़ना होगा. ग्रामीणों को जान-माल की सुरक्षा की गारंटी देनी होगी.

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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