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हिन्दी दिवस: हिन्दी के ऐसे शब्द, जिन्हें लिखने में अक्सर कर बैठते हैं गलती, बता रहे हैं डॉ कमल कुमार बोस

Updated at : 14 Sep 2023 5:10 AM (IST)
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हिन्दी दिवस: हिन्दी के ऐसे शब्द, जिन्हें लिखने में अक्सर कर बैठते हैं गलती, बता रहे हैं डॉ कमल कुमार बोस

हिन्दी में कई शब्द ऐसे हैं, जिन्हें लिखते वक्त हम अक्सर गलती कर देते हैं. कहीं आप भी तो अनजाने में लिखते वक्त ये गलती नहीं कर देते. 14 सितंबर 1949 को अहिन्दी भाषी सदस्यों ने संविधान सभा में देवनागरी में लिखित हिन्दी को भारत की राजभाषा के रूप में स्वीकार किया था. आज (14 सितंबर) हिन्दी दिवस है.

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रांची: आप हिन्दी के विद्यार्थी हैं या हिन्दी भाषा से जुड़े पेशे में हैं, तो ये खबर आपके लिए काफी अहम है. आज हिन्दी दिवस (14 सितंबर) है. इस मौके पर हिन्दी विशेषज्ञ के जरिए हिन्दी के कुछ ऐसे शब्द बता रहे हैं, जिन्हें लिखने में आप अक्सर गलती कर बैठते हैं. एक बार जरूर आप ये लंबी लिस्ट देख लें. हमेशा उपयोग में आने वाले इन शब्दों के लिए गुरुस्वरूप मि‍श्रा ने रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज के हिन्दी विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ कमल कुमार बोस से बातचीत की.

हिन्दी है मेरे हिन्द की धड़कन

शिक्षाविद् डॉ कमल कुमार बोस हिन्दी की महत्ता बताते हुए कहते हैं कि हिन्दी है मेरे हिन्द की धड़कन, हिन्दी से ही पहचान है मेरी, मन के भाव सब तक पहुंचा दे, ऐसी सरस सरल भाषा है हिन्दी मेरी. वे बताते हैं कि 14 सितंबर 1949 को अहिन्दी भाषी सदस्यों ने संविधान सभा में देवनागरी में लिखित हिन्दी को भारत की राजभाषा के रूप में स्वीकार किया.

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हिन्दी को राष्ट्रभाषा के रूप में देखना चाहते थे बापू

महात्मा गांधी के सपनों के भारत में एक सपना राष्ट्रभाषा के रूप में हिन्दी को प्रतिष्ठित करने का भी था. शिक्षाविद् डॉ कमल कुमार बोस कहते हैं कि संविधान ने भले ही हिन्दी को राजभाषा का दर्जा दिया. राजकाज की भाषा के रूप में हिन्दी को स्वीकार किया, लेकिन बापू का कहना था कि सारे देश के लोग हिन्दी का इतना ज्ञान प्राप्त कर लें ताकि देश का राजकाज हिन्दी में चलाया जा सके और सभी भारतवासी एक सामान्य भाषा में संवाद कायम कर सकें.

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ये हैं कुछ शुद्ध शब्द

हिन्दी में कई शब्द ऐसे हैं, जिन्हें लिखते वक्त हम अक्सर गलती कर देते हैं. शुद्ध और अशुद्ध शब्द नीचे दिए गए हैं. एक बार जरूर देख लें. कहीं आप भी तो अनजाने में लिखते वक्त ये गलती नहीं कर देते.

शुद्ध अशुद्ध

अन्तरराष्ट्रीय अन्तर्राष्ट्रीय

उज्ज्वल उज्वल

अनधिकार अनाधिकार

सदुपदेश सदोपदेश

दुरवस्था दुरावस्था

सद्गुरु सतगुरु

नामकरण नामाकरण

उल्लंघन उलंघन

मनोयोग मनयोग

अन्त:कथा अन्तर्कथा

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शुद्ध अशुद्ध

अधोगति अध:गति

निरपराध निरपराधी

सदृश सदृश्य

निराशापूर्ण निराशपूर्ण

गुरु गुरू

प्रकट प्रगट

मदद मदत

चहारदीवारी चहरदीवारी

पारलौकिक परलौकिक

नाविक नावक

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शुद्ध अशुद्ध

अनुगृहीत अनुग्रहीत

एकत्र एकत्रित

दुनिया दुनियों

संगृहीत संग्रहीत

ब्रज बृज

नयन नैन

स्थायी स्थाई

क्यों क्यूं

भण्डार भंडार

पिंजरा पिंजड़ा

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शुद्ध अशुद्ध

कर्तव्य कर्त्तव्य

वर्तमान वर्त्तमान

औद्योगिकीकरण औद्योगीकरण

श्मशान शमशान

मुस्कराना मुस्कुराना

आगामी अगामी

संन्यासी सन्यासी

बरात बारात

दीवाली दिवाली

फजूल फिजूल

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शुद्ध अशुद्ध

छिपकली छिपकिली

दु:ख दुख

बीमारी बिमारी

एकत्र एकत्रित

खीझना खीजना

द्वंद्व द्वंद

घनिष्ठ घनिष्ट

अन्तर्ध्यान अंतर्धान

सम्मुख सन्मुख

गुंजायश गुंजाइश

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शुद्ध अशुद्ध

ग्रसित ग्रस्त

पहिले पहले

बिल्कुल बिलकुल

निर्दोष निर्दोषी

गाँव गांव

दाँत दांत

आँगन आंगन

अंगूर अँगूर

अभीष्ट अभीष्ठ

चिह्न चिन्ह

भिखारिन भिखारिणी

सीधा सादा सीधा साधा

अन्त्याक्षरी अन्ताक्षरी

पूर्वग्रह पूर्वाग्रह

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Guru Swarup Mishra

लेखक के बारे में

By Guru Swarup Mishra

मैं गुरुस्वरूप मिश्रा. फिलवक्त डिजिटल मीडिया में कार्यरत. वर्ष 2008 से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से पत्रकारिता की शुरुआत. आकाशवाणी रांची में आकस्मिक समाचार वाचक रहा. प्रिंट मीडिया (हिन्दुस्तान और पंचायतनामा) में फील्ड रिपोर्टिंग की. दैनिक भास्कर के लिए फ्रीलांसिंग. पत्रकारिता में डेढ़ दशक से अधिक का अनुभव. रांची विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एमए. 2020 और 2022 में लाडली मीडिया अवार्ड.

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