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संताल परगना से मुख्यमंत्री बनने वालों में सबसे लंबा कार्यकाल हेमंत सोरेन का

Updated at : 09 Dec 2024 12:15 PM (IST)
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सीएम हेमंत सोरेन

सीएम हेमंत सोरेन

Hemant Soren News: संताल परगना से मुख्यमंत्री बनने वालों में हेमंत सोरेन का कार्यकाल सबसे लंबा रहा. उनके पहले शिबू सोरेन 3 बार सीएम बने, लेकिन कार्यकाल छोटा था.

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Hemant Soren News: अल्पकाल के लिए ही सही, दुमका से सांसद रहते झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के सुप्रीमो शिबू सोरेन 3 बार झारखंड के मुख्यमंत्री बने. फिर उनके पुत्र हेमंत सोरेन झामुमो के कद्दावर नेता के रूप में उभरे. हेमंत सोरेन 4 बार झारखंड के मुख्यमंत्री बने.

शिबू सोरेन 2005 में पहली बार बने थे झारखंड के मुख्यमंत्री

दिशोम गुरु शिबू सोरेन वर्ष 2005 में मात्र 10 दिनों के लिए झारखंड के मुख्यमंत्री बने. तब संताल परगना में झामुमो के 5 और भाजपा के 7 विधायक थे. वर्ष 2008-09 में शिबू सोरेन 6 माह के लिए फिर मुख्यमंत्री बने. तब भी इस प्रमंडल में भाजपा की 8 सीटें थीं. झामुमो के खाते में तब 5 सीटें थीं.

18 महीने के लिए मुख्यमंत्री बने हेमंत सोरेन

शिबू सोरेन तीसरी बार 30 दिसंबर 2009 से 31 मई 2010 तक के लिए मुख्यमंत्री बने. उसके बाद संताल परगना से ही विधायक बने उनके पुत्र हेमंत सोरेन राज्य के मुख्यमंत्री बने. इनका भी कार्यकाल छोटा ही रहा. वह 13 जुलाई 2013 से 23 दिसंबर 2014 (18 महीने) तक मुख्यमंत्री रहे.

2014 में झामुमो के 10 विधायक चुने गए संताल परगना में

वर्ष 2014 में संताल परगना में भाजपा को महज 2 सीटों पर ही जीत मिली थी. झामुमो के टिकट पर 10 विधायक निर्वाचित होकर झारखंड विधानसभा पहुंचे थे. वर्ष 2019 के चुनाव में झामुमो को इस प्रमंडल से 9 सीटें मिलीं और भाजपा को 4 सीटें.

2019 में झामुमो-कांग्रेस-राजद महागठबंधन की बनी सरकार

झामुमो के कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन के नेतृत्व में झारखंड में झामुमो-कांग्रेस-राजद की महागठबंधन की सरकार बनी. हेमंत सोरेन ने 29 दिसंबर 2019 को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली. वह 31 जनवरी 2024 तक मुख्यमंत्री रहे. कथित जमीन घोटाला मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने उन्हें गिरफ्तार किया, तो हेमंत सोरेन ने पद से इस्तीफा दे दिया.

चंपाई सोरेन को सत्ता सौंपकर जेल गए हेमंत सोरेन

हेमंत सोरेन ने जेल जाने से पहले अपनी जगह झामुमो के वरिष्ठ नेता और शिबू सोरेन के साथ झारखंड आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाने वाले चंपाई सोरेन को सूबे की कमान सौंपी गई. जुलाई 2024 में जेल से बाहर आने के बाद 4 जुलाई 2024 को हेमंत सोरेन ने फिर सत्ता की कमान संभाली.

हेमंत सोरेन 2024 में प्रचंड बहुमत के साथ चौथी पर मुख्यमंत्री बने

नवंबर 2024 में झारखंड विधानसभा चुनाव में प्रचंड बहुमत के साथ उन्होंने एक बार फिर से सरकार का गठन किया. इस बार संताल परगना की 11 सीटों पर झामुमो ने जीत दर्ज की है. 4 सीटें कांग्रेस और 2 सीट पर राजद को जीत मिली है. संताल परगना की एक सीट भाजपा के खाते में आई है.

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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