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सरना आदिवासी धर्म कोड लागू करने की मांग तेज, आदिवासी संगठनों ने केंद्र सरकार को फिर दिया अल्टीमेटम, इस तारीख को कई राज्यों में होगा रेल-रोड जाम

Updated at : 13 Dec 2020 5:03 PM (IST)
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सरना आदिवासी धर्म कोड लागू करने की मांग तेज, आदिवासी संगठनों ने केंद्र सरकार को फिर दिया अल्टीमेटम, इस तारीख को कई राज्यों में होगा रेल-रोड जाम

रांची : सरना आदिवासी धर्म कोड लागू करने की मांग को लेकर एक बार फिर रेल-रोड चक्का जाम की तैयारी की जा रही है. केंद्र सरकार को 30 दिसंबर तक का अल्टीमेटम दिया गया है. सरना आदिवासी धर्म कोड लागू नहीं किया गया, तो 31 जनवरी को झारखंड, बिहार, बंगाल, असम, ओडिशा और छत्तीसगढ़ समेत आदिवासी बहुल राज्यों में रेल-रोड जाम किया जायेगा. आज रविवार को रांची के करमटोली स्थित धुमकुड़िया में केंद्रीय सरना समिति, अखिल भारतीय आदिवासी विकास परिषद एवं आदिवासी सेंगेल अभियान के नेताओं ने प्रेस वार्ता कर ये जानकारी दी.

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रांची : सरना आदिवासी धर्म कोड लागू करने की मांग को लेकर एक बार फिर रेल-रोड चक्का जाम की तैयारी की जा रही है. केंद्र सरकार को 30 दिसंबर तक का अल्टीमेटम दिया गया है. सरना आदिवासी धर्म कोड लागू नहीं किया गया, तो 31 जनवरी को झारखंड, बिहार, बंगाल, असम, ओडिशा और छत्तीसगढ़ समेत आदिवासी बहुल राज्यों में रेल-रोड जाम किया जायेगा. आज रविवार को रांची के करमटोली स्थित धुमकुड़िया में केंद्रीय सरना समिति, अखिल भारतीय आदिवासी विकास परिषद एवं आदिवासी सेंगेल अभियान के नेताओं ने प्रेस वार्ता कर ये जानकारी दी.

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केंद्रीय सरना समिति के केंद्रीय अध्यक्ष फूलचंद तिर्की ने कहा कि छह दिसंबर को रेल-रोड चक्का जाम सफल रहा. आदिवासी अपने हक अधिकार के लिए जागरूक हो चुके हैं. आदिवासी हर हाल में 2021 की जनगणना में धर्म कोड चाहते हैं. इसके लिए पूरे देश के आदिवासी लगातार आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन केंद्र सरकार आदिवासियों की मांग को अनसुना कर रही है.

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केंद्रीय सरना समिति, अखिल भारतीय आदिवासी विकास परिषद और आदिवासी सेंगेल अभियान द्वारा सरना आदिवासी धर्म कोड लागू नहीं करने के कारण रेल-रोड जाम के दूसरे चरण की तैयारी की जा रही है. अखिल भारतीय आदिवासी विकास परिषद के महासचिव ललित कच्छप ने कहा कि 2021 की जनगणना में महज डेढ़ महीने बाकी हैं. ऐसे में केंद्र की सरकार आदिवासियों को उनका धर्मकोड ना देकर उनके साथ सौतेला व्यवहार कर रही है. देश में 15 करोड़ आदिवासी अपने अधिकार के लिए संघर्ष कर रहे हैं. यदि आदिवासियों को धर्म कोड नहीं दिया गया तो 15 करोड़ आदिवासी जनगणना का विरोध करेंगे.

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मौके पर आदिवासी सेंगेल अभियान के राष्ट्रीय अध्यक्ष व पूर्व सांसद सालखन मुर्मू, संयोजक सुमित्रा मुर्मू, केंद्रीय सरना समिति के संरक्षक ललित कच्छप, अखिल भारतीय आदिवासी विकास परिषद के उपाध्यक्ष लखन मिंज, महासचिव संजय तिर्की, अखिल भारतीय आदिवासी विकास परिषद के अध्यक्ष सत्यनारायण लकड़ा, महिला शाखा अध्यक्ष नीरा टोप्पो, विनय उरांव, सुखवरो उरांव, ज्योत्स्ना भगत, अमर तिर्की, प्रशांत टोप्पो, प्रमोद एक्का, सूरज तिग्गा, बोंगाई बेड़ा पंचायत के ग्राम प्रधान सोमरा उरांव, कजरू मुंडा एवं अन्य उपस्थित थे.

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Posted By : Guru Swarup Mishra

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