झारखंड स्टेट बार काउंसिल की आमसभा का फैसला, कोर्ट फीस संशोधन बिल वापस हो, वरना दो से काम नहीं करेंगे

राज्य सरकार नवीनतम संशोधन विधेयक, जो विधानसभा से पारित करवाया गया है, उसे तत्काल वापस ले, अन्यथा राज्य के 33000 अधिवक्ता दो जनवरी 2023 से अगले आदेश तक अदालती कार्यों से अपने को अलग रखेंगे.
Jharkhand News: झारखंड स्टेट बार काउंसिल ने राज्य सरकार से कोर्ट फीस संशोधन विधेयक-2022 को अविलंब वापस लेने की मांग की है. काउंसिल की शनिवार को हुई आमसभा में प्रस्ताव पारित कर संशोधन विधेयक को वापस लेने को कहा गया. कहा गया कि कोर्ट फीस में किया गया यह संशोधन सिर्फ दिखावा है. निम्न स्तर के सूट वैल्यू में शुल्क को कुछ कम किया गया है, बाकी सब कुछ यथावत है. अधिकतम कोर्ट फीस तीन लाख रुपये जस का तस है. वर्ष 2021 के एक्ट में संशोधन करने के पूर्व अधिवक्ताओं से किसी प्रकार का सुझाव भी नहीं लिया गया.
राज्य सरकार नवीनतम संशोधन विधेयक, जो विधानसभा से पारित करवाया गया है, उसे तत्काल वापस ले, अन्यथा राज्य के 33000 अधिवक्ता दो जनवरी 2023 से अगले आदेश तक अदालती कार्यों से अपने को अलग रखेंगे. किसी प्रकार का न्यायिक कार्यों में हिस्सा नहीं लेगें. इससे पूर्व राज्यपाल व मुख्यमंत्री से काउंसिल का प्रतिनिधिमंडल मिलेगा. यदि सरकार काउंसिल की मांग मान लेती है, तो आंदोलन स्थगित कर दिया जायेगा. इसके लिए काउंसिल ने उपाध्यक्ष राजेश कुमार शुक्ल की अध्यक्षता में सात सदस्यीय समिति का गठन किया है, जिसमें अमर कुमार सिंह, संजय कुमार विद्रोही, परमेश्वर मंडल, राधेश्याम गोस्वामी, एके रशीदी व अन्य को शामिल किया गया है.
आमसभा ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआइ) से मेडिकल एड को 10,000 से बढ़ा कर 25000 करने की मांग की. सभी अधिवक्ता सदस्यों को ग्रुप बीमा का लाभ दिलाने के लिए समिति गठित की गयी, जो अपनी अनुशंसा काउंसिल को देगी. अधिवक्ता प्रोटेक्शन एक्ट लागू करने तथा राज्य के बजट में अधिवक्ता कल्याण के लिए 100 करोड़ रुपये का प्रावधान करने की मांग की गयी.
काउंसिल का पांच वर्षों का कार्यकाल जुलाई 2023 में पूरा होगा. काउंसिल के अगले सत्र के लिए चुनाव प्रक्रिया शुरू करने का निर्णय लिया गया. वर्तमान में वरीय अधिवक्ता राजीव रंजन के महाधिवक्ता बनने से रिक्त हुए काउंसिल के एक सदस्य पद पर तत्काल चुनाव कराने पर सहमति बनी. अगले कुछ दिनों में रिटर्निंग ऑफिसर की नियुक्ति व चुनाव कार्यक्रम घोषित करने को कहा गया.
आमसभा में अधिवक्ताओं के खिलाफ प्राप्त शिकायतों पर भी विचार किया गया. इसमें शिकायतकर्ता ज्योति आनंद, सुशील कुमार झा व श्रवण कुमार की शिकायतों पर निर्णय लेने के लिए काउंसिल की अनुशासनिक समिति (डीसी) को भेजने का निर्णय लिया गया.
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झारखंड कोर्ट फीस अमेंडमेंट एक्ट 2022 विधेयक विधानसभा से पास हो चुका है. इस संशोधन विधेयक पर झारखंड स्टेट बार काउंसिल ने अपना विरोध दर्ज किया है. काउंसिल के अध्यक्ष राजेंद्र कृष्ण व उपाध्यक्ष राजेश कुमार शुक्ल ने कहा कि राज्य सरकार ने संशोधन के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की है. संशोधन सिर्फ दिखावा है. अधिकतम कोर्ट फीस की दर तीन लाख रुपये ही रखी गयी है, जबकि वर्ष 2021 के संशोधन एक्ट में भी अधिकतम कोर्ट फीस तीन लाख रुपये था. जब विवादित वस्तु का मूल्य 30 हजार रुपये हो, उसका 15 प्रतिशत, उत्तराधिकार प्रमाण पत्र मूल्य का प्रतिशत कोर्ट फीस लगेगा. अनुच्छेद 226, 227 के अंतर्गत हाइकोर्ट में आवेदन देने पर 500 रुपये अन्य आवेदनों पर 250 रुपये का शुल्क लगेगा. इसके अलावा सूट वैल्यू के आधार पर अलग-अलग कोर्ट फीस तय किया गया है.
काउंसिल की आमसभा ने जिला बार एसोसिएशन के विभिन्न पदों पर चुनाव के लिए न्यूनतम प्रैक्टिस की अवधि नये सिरे से तय की गयी. एसोसिएशन के अध्यक्ष पद के लिए कम से कम 25 वर्षों का प्रैक्टिस अनिवार्य होगा. उपाध्यक्ष के लिए 20 वर्ष, महासचिव व कोषाध्यक्ष के लिए 15-15 वर्ष, संयुक्त सचिव प्रशासन, सहायक कोषाध्यक्ष पद के लिए 10-10 वर्ष का प्रैक्टिस जरूरी है. कार्यकारिणी समिति के सदस्यों के लिए भी प्रैक्टिस की अवधि तय की गयी है.
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By Prabhat Khabar News Desk
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