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Jharkhand: गो-तस्करों को सहयता करने के एवज में मिलते थे BSF कमांडेंट को रिश्वत, ऐसे देता था काम को अंजाम

Updated at : 03 Jan 2023 9:33 AM (IST)
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Jharkhand: गो-तस्करों को सहयता करने के एवज में मिलते थे BSF कमांडेंट को रिश्वत, ऐसे देता था काम को अंजाम

सीमा से तस्करी सहित अन्य आपराधिक गतिविधियों को रोकने के लिए तैनात कमांडेंट ने तस्करों की मदद की. रिश्वत की राशि से कमांडेंट की पत्नी ने अपने नाम बंगाल, गाजियाबाद, अमृतसर में संपत्ति खरीदी.

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गो-तस्करों को मदद पहुंचाने के एवज में बीएसएफ कमांडेंट सतीश कुमार को रिश्वत के रूप में 12.80 करोड़ रुपये मिले थे. तस्करों ने इस रकम का भुगतान कमांडेंट की पत्नी व ससुर के खाते में किया था. प्रवर्तन निदेशालय (इडी) ने पश्चिम बंगाल-बांग्लादेश सीमा से गो-तस्करी के मामले की जांच के दौरान इसका पर्दाफाश किया था.

जांच में पाया गया कि सीमा से तस्करी सहित अन्य आपराधिक गतिविधियों को रोकने के लिए तैनात कमांडेंट ने तस्करों की मदद की. रिश्वत की राशि से कमांडेंट की पत्नी ने अपने नाम बंगाल, गाजियाबाद, अमृतसर में संपत्ति खरीदी. अप्रैल 2022 में इडी ने कमांडेंट को गिरफ्तार कर लिया.

इडी ने जांच में पाया कि स्थानीय लोगों द्वारा गायों के बांग्लादेश भेजने की कोशिश के दौरान बीएसएफ के जवान उसे जब्त कर लेते थे. इसके बाद सुनियोजित तरीके से कमांडेंट के सहयोग से जब्त की गयी गायों की नीलामी होती थी. गो-तस्कर एनामुल हक के लोग नीलामी प्रक्रिया में शामिल होकर कम कीमत पर गायों को खरीद लेते थे.

इसके बाद बीएसएफ कमांडेंट सतीश के सहयोग से उसे बांग्लादेश भेजते थे. इसके बदले कमांडेंट को अनुचित आर्थिक लाभ देते थे. जांच में पाया गया कि दिसंबर 2015 से पोस्टेड कमांडेंट सतीश के नियंत्रण में 14 बॉर्डर पोस्ट थे. बीएसएफ का नियंत्रण भारत-बांग्लादेश सीमा के करीब 50 किलोमीटर के क्षेत्र में था. वर्ष 2016 में बीएसएफ बटालियन-30 को स्थानांतरित कर बटालियन-36 को तैनात किया गया. सतीश ने बटालियन-36 का प्रभार लिया और अप्रैल 2017 तक पदस्थापित रहे.

जांच में पाया गया कि गो-तस्कर एनामुल हक ने सहयोगी मनोज साना के जरिये कमांडेंट सतीश को 12.80 करोड़ रुपये दिये. यह रकम सतीश की पत्नी तान्या व ससुर बालकृष्ण के खाते में भेजी गयी. बालकृष्ण आरबीआइ में डिप्टी ट्रेजरर थे. वर्ष 2001 में उन्होंने वीआरएस ले लिया था. गलत पैसों के जायज करार देने के लिए एनामुल ने राजन नामक सीए को तान्या का हिसाब-किताब देखने के लिए लगा दिया था.

राजन ने रिश्वत के रूप में मिली रकम में से 2.05 करोड़ रुपये बगैर सूद के मिले कर्ज के रूप में दिखाया. इसके अलावा एनामुल की पत्नी के नाम पर बनी शेल कंपनियों के साथ व्यापार दिखा कर 12.80 करोड़ रुपये को जायज कमायी दिखायी.

रिश्वत की राशि को आमदनी घोषित किया

रिश्वत के पैसे से तान्या ने पश्चिम बंगाल में जमी, गाजियाबाद में फ्लैट और अमृतसर में 1.5 एकड़ जमीन खरीदी. तान्या ने अपने व पिता के नाम पर फिक्स डिपॉजिट भी किया. वर्ष 2016 में भारत सरकार द्वारा ‘इनकम डिसक्लोजर स्कीम’ लागू किये जाने के बाद तान्या और उसके पिता ने रिश्वत की राशि को आमदनी बताते हुए अघोषित आय के रूप में घोषणा की और योजना का लाभ उठाया.

इडी की जांच-पड़ताल के दौरान रिश्वत की रकम को जायज करार देने के लिए अपनायी गयी प्रक्रिया का खुलासा हुआ. इसके बाद इडी ने रिश्वत से खरीदी गयी संपत्ति को अस्थायी रूप से जब्त कर लिया.

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