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झारखंड को बड़ी राहत, दूसरी लहर में ऑक्सीजन बेड थे फुल लेकिन इस बार खाली, जानें कैसे हार रहा कोरोना

Updated at : 17 Jan 2022 6:32 AM (IST)
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झारखंड को बड़ी राहत, दूसरी लहर में ऑक्सीजन बेड थे फुल लेकिन इस बार खाली, जानें कैसे हार रहा कोरोना

झारखंड के लिए राहत की खबर है. दरअसल दूसरी लहर में कोरोना कम संक्रमण होने के बावजूद एक्टिव मरीजों के साथ त्राहिमाम की स्थिति थी. क्यों कि उस वक्त ज्यादातर बेड फुल थे. लेकिन आज ज्यादातर बेड खाली हैं.

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रांची : आज से नौ महीने पहले 16 मई 2021 को झारखंड में 36 हजार एक्टिव मरीजों के साथ त्राहिमाम की स्थिति थी. उस समय 10,000 से अधिक ऑक्सीजन बेड, 2000 आइसीयू और 1000 वेंटिलेटर कोरोना संक्रमित मरीजों से भरे पड़े थे. ऑक्सीजन बेड नहीं होने से अस्पताल के बाहर ही संक्रमित दम तोड़ रहे थे. तब दूसरी लहर ढलान पर थी. उसके विपरीत अभी जब तीसरी लहर का पीक आना बाकी है, तो 15 जनवरी 2022 को 33 हजार एक्टिव केस होने के बाद भी स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है.

लोग तब के मुकाबले इस बार ज्यादा संक्रमित हो रहे हैं, लेकिन अस्पताल कम पहुंच रहे हैं. 15 जनवरी तक के आंकड़े के अनुसार, अभी 14,863 ऑक्सीजन बेड में से मात्र 390 पर संक्रमित मरीज हैं. यानी मात्र दो फीसदी ऑक्सीजन बेड पर मरीज हैं 98 फीसदी बेड खाली हैं. वहीं 3,204 आइसीयू बेड में से 65 पर संक्रमितों को रखा गया है. इसके अलावा वेंटिलेटर के 1,456 बेड में से सात पर संक्रमित हैं. फिलहाल झारखंड में ओमिक्रोन की पुष्टि के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि इसी वायरस का फैलाव है, लेकिन इसका रूप विकराल नहीं है. इससे अस्पताल पर भी काफी कम बोझ पड़ रहा है और प्रशासन राहत की सांस ले रहा है.

ऐसे समझें, कैसे हार रहा कोरोना

दूसरी लहर 36,000

तीसरी लहर 33,000

एक्टिव केस 16 मई 2021 को

15 जनवरी 2022 को इस आंकड़े पर ढलान पर था संक्रमण

अभी पीक आने का हो रहा इंतजार

ऑक्सीजन बेड 100 % फुल थे

98 % खाली

10,000 ऑक्सीजन बेड, 2000 आइसीयू, 1000 वेंटिलेटर बेड मरीजों से फुल थे

3,204 आइसीयू बेड में से 65 पर ही संक्रमित, वेंटिलेटर के 1,456 बेड में से सात पर ही मरीज

मौत का आंकड़ा

48 तक पहुंची थी मौत की संख्या एक दिन में

19 गुना कम मौत हुई दूसरी लहर की तुलना में

डरने की नहीं, बचने की है जरूरत

क्रिटिकल केयर विशेषज्ञों का कहना है कि वर्तमान परिस्थिति में घबरानेवाली बात नहीं है, क्योंकि नया वैरिएंट ओमिक्रोन सात गुना फैलाव होने के बाद उतना खतरनाक नहीं है. ओमिक्रोन में संक्रमितों को ऑक्सीजन और वेंटिलेटर बेड की आवश्यकता नहीं पड़ रही है.

यही कारण है कि दो फीसदी को ऑक्सीजन और आइसीयू बेड की जरूरत है. वहीं आंवटित वेंटिलेटर बेड की अपेक्षा 0.5 फीसदी को वेंटिलेटर पर रखने की जरूरत पड़ रही है. इसके अलावा कोरोना टीकाकरण से संक्रमण का दुष्प्रभाव भी कम हुआ है. ऐसे में यह स्पष्ट हो गया है कि टीका ही बचाव है.

एक दिन में 50 तक होती थी मौत, अभी कम

कोरोना संक्रमितों की मौत का आंकड़ा उस समय भयावह थी. एक दिन में 45 से 50 संक्रमितों की मौत हो जाती थी, लेकिन अभी मौत का आंकड़ा कम हो गया है. वर्तमान समय में इकाई में ही मौत का आंकड़ा पहुंचा है. अभी तक संक्रमितों की बढ़ती संख्या के बीच अधिकतम आठ संक्रमितों की मौत एक दिन में हुई है.

ओमिक्रोन में जटिलता कम है, यह राहत की बात है. ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखना नहीं पड़ रहा है. वेंटिलेटर पर वही संक्रमित रखे जा रहे हैं, जिन्हें पहले से कई गंभीर बीमारी है. इसके बावजूद हमें बचाव के लिए टीकाकरण और कोरोना गाइडलाइन का पालन करना होगा.

डॉ कामेश्वर प्रसाद, निदेशक रिम्स

Posted By : Sameer Oraon

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यह प्रभात खबर का न्यूज डेस्क है। इसमें बिहार-झारखंड-ओडिशा-दिल्‍ली समेत प्रभात खबर के विशाल ग्राउंड नेटवर्क के रिपोर्ट्स के जरिए भेजी खबरों का प्रकाशन होता है।

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