क्या है 5G Network Slicing, जिसका यूज करके एयरटेल अपने पोस्टपेड यूजर्स को दे रहा फास्ट इंटरनेट?

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Airtel 5G Network Slicing

5G नेटवर्क स्लाइसिंग (Photo: Canva)

Airtel की नई Priority Postpaid सर्विस ने 5G Network Slicing को चर्चा में ला दिया है. यह टेक्नोलॉजी एक ही 5G नेटवर्क के अंदर अलग-अलग ‘फास्ट लेन’ बनाकर चुनिंदा यूजर्स को ज्यादा फास्ट और स्टेबल इंटरनेट देने में मदद करती है. आइए इसे डिटेल में समझते हैं.

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इस हफ्ते एयरटेल ने भारत में एक बिल्कुल नई और पहली तरह की सर्विस लॉन्च की है. इसका नाम है प्रायोरिटी पोस्टपेड (Priority Postpaid). आसान शब्दों में समझें तो अब पोस्टपेड यूजर्स को भीड़भाड़ वाली जगहों पर नेटवर्क स्लो होने या बार-बार अटकने की परेशानी कम झेलनी पड़ेगी. कंपनी का कहना है कि यह सर्विस 5G Network Slicing टेक्नोलॉजी पर काम करती है. यानी एक ही 5G नेटवर्क के अंदर सॉफ्टवेयर की मदद से कुछ फास्ट लेन तैयार की जाती हैं, ताकि प्रायोरिटी यूजर्स को तेज और ज्यादा स्टेबल इंटरनेट मिल सके. आइए अब थोड़ा डिटेल में समझते हैं कि आखिर ये टेक्नोलॉजी क्या है और काम कैसे करती है.

क्या है 5G Network Slicing?

5G Network Slicing एक ऐसी टेक्नोलॉजी है जो टेलीकॉम कंपनियों को एक ही 5G नेटवर्क को कई अलग-अलग वर्चुअल नेटवर्क यानी ‘स्लाइस’ में बांटने की सुविधा देती है. आसान शब्दों में समझें तो पहले सभी यूजर्स और सर्विसेज एक ही नेटवर्क का यूज करते थे, इसलिए जब ज्यादा लोग एक साथ इंटरनेट चलाते थे तो नेटवर्क स्लो पड़ने लगता था.

लेकिन Network Slicing इस परेशानी का स्मार्ट सॉल्यूशन लेकर आता है. अब पूरा नेटवर्क एक ही सड़क की तरह काम नहीं करता, बल्कि अलग-अलग जरूरतों के हिसाब से उसके भीतर कई ‘स्पेशल लेन’ बना दी जाती हैं. उदाहरण के लिए, एक स्लाइस ऑनलाइन गेमिंग के लिए बनाई जा सकती है जहां बेहद कम लेटेंसी मिले, दूसरी इंडस्ट्री और मशीनों के लिए ज्यादा भरोसेमंद कनेक्शन दे सकती है, जबकि तीसरी आम यूजर्स को लगातार अच्छी स्पीड देने पर फोकस कर सकती है. यानी एक ही 5G नेटवर्क हर काम के लिए खुद को अलग तरीके से ढाल सकता है.

कैसे काम करता है 5G Network Slicing?

यह पूरी तरह SDN (Software-Defined Networking) और क्लाउड-नेटिव इंफ्रास्ट्रक्चर पर काम करती है. पहले के टेलीकॉम नेटवर्क फिक्स्ड हार्डवेयर पर डिपेंड होते थे, जहां हर काम के लिए अलग-अलग मशीनें लगी होती थीं. लेकिन 5G स्टैंडअलोन नेटवर्क में कई नेटवर्क फंक्शन वर्चुअल हो चुके हैं. इसका फायदा यह है कि टेलीकॉम कंपनियां जरूरत के हिसाब से अलग-अलग सर्विसेज को अलग प्रायोरिटी दे सकती हैं. यानी कहीं ज्यादा स्पीड चाहिए, कहीं कम लेटेंसी, तो कहीं ज्यादा कंप्यूट पावर, सब कुछ रियल टाइम में मैनेज किया जा सकता है.

यही वजह है कि नेटवर्क स्लाइसिंग को 5G की पहचान माना जाता है. 4G का मेन फोकस सिर्फ स्मार्टफोन यूजर्स को फास्ट इंटरनेट देना था, लेकिन 5G को इस तरह डिजाइन किया गया है कि वह एक ही समय पर कई तरह की जरूरतों को संभाल सके.

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यह टेक्नोलॉजी कंपनियों और नेटवर्क ऑपरेटर्स को हर जरूरत के हिसाब से अलग-अलग तरह की कनेक्टिविटी देने की सुविधा देती है, वो भी बिना नया और पूरी तरह अलग नेटवर्क खड़ा किए. यही वजह है कि यह टेक्नोलॉजी एंटरप्राइज सेक्टर के लिए काफी अहम मानी जा रही है. मैन्युफैक्चरिंग फैक्ट्री हो, लॉजिस्टिक्स का काम, हेल्थकेयर सर्विसेज या फिर दूरदराज के इंफ्रास्ट्रक्चर ऑपरेशन्स. हर जगह कंपनियां अपनी जरूरत के हिसाब से तेज, भरोसेमंद और बिना रुकावट वाला नेटवर्क परफॉर्मेंस पा सकती हैं.

Network Slicing की लिमिटेशन

हालांकि नेटवर्क स्लाइसिंग सुनने में काफी फ्यूचरिस्टिक टेक्नोलॉजी लगती है, लेकिन अभी यह पूरी तरह से परफेक्ट हुई नहीं है. इसकी सबसे बड़ी चुनौती यह है कि यह तकनीक सबसे बेहतर तरीके से सिर्फ Standalone 5G यानी 5G SA नेटवर्क पर काम करती है. इसमें 5G का पूरा सिस्टम पुराने 4G इंफ्रास्ट्रक्चर से अलग होकर काम करता है. दिक्कत यह है कि दुनिया भर की कई टेलीकॉम कंपनियां अभी भी पूरी तरह 5G SA पर शिफ्ट नहीं हो पाई हैं और ट्रांजिशन के दौर में हैं.

इसके अलावा इसे मैनेज करना भी आसान काम नहीं है. सोचिए, लाखों यूजर्स और अलग-अलग ऐप्स के लिए एक साथ कई वर्चुअल नेटवर्क स्लाइस चलाने पड़ते हैं. इसके लिए बेहद एडवांस सिस्टम और रियल-टाइम ट्रैफिक मैनेजमेंट की जरूरत होती है, ताकि हर यूजर को स्मूद एक्सपीरियंस मिले.

सिक्योरिटी भी यहां बड़ा मुद्दा बन जाती है. क्योंकि सभी स्लाइस एक ही फिजिकल इंफ्रास्ट्रक्चर पर चलते हैं. इसलिए कंपनियों को बेहद मजबूत सेफ्टी इंतजाम करने पड़ते हैं. सबसे बड़ी चुनौती है कि अगर एक स्लाइस में कोई कमजोरी आ जाए, तो उसका असर बाकी स्लाइस पर न पड़े.

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Ankit Anand

लेखक के बारे में

By Ankit Anand

शॉर्ट बायो

अंकित आनंद टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल जर्नलिस्ट हैं. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रहे हैं. वे स्मार्टफोन, टेलीकॉम, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), कंज्यूमर टेक और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों को कवर करते हैं.

काम के बारे में

अंकित आनंद एक टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल जर्नलिस्ट हैं, जो डिजिटल मीडिया में टेक और ऑटो सेक्टर से जुड़े विषयों पर लगातार लिखते हैं. वर्तमान में वे प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रहे हैं. टेक्नोलॉजी सेक्टर में उनकी रुचि स्मार्टफोन लॉन्च, मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम, टेलीकॉम अपडेट्स, इंटरनेट सेवाओं, AI टूल्स, ऐप्स, गैजेट्स, टिप्स एंड ट्रिक्स और कंज्यूमर टेक्नोलॉजी से जुड़े विषयों में है. वहीं ऑटोमोबाइल सेक्टर में वे नई कारों और बाइक्स की लॉन्चिंग, फीचर्स, कीमत, सेफ्टी, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV), फ्लेक्स-फ्यूल टेक्नोलॉजी और ऑटो इंडस्ट्री के बदलते ट्रेंड्स पर रेगुलर लिखते हैं.

उनकी कोशिश रहती है कि हर खबर में सिर्फ फीचर्स, कीमत या लॉन्च की जानकारी ही न हो, बल्कि यह भी बताया जाए कि वह टेक्नोलॉजी आम लोगों के कितने काम की है, उसे इस्तेमाल करने का एक्सपीरियंस कैसा होगा और उसे खरीदना सही रहेगा या नहीं.

पढ़ाई और करियर

बिहार में जन्मे अंकित आनंद की शुरुआती शिक्षा सीबीएसई बोर्ड से हुई है. इसके बाद उन्होंने साल 2024 में गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी (GGSIPU) के कस्तूरी राम कॉलेज ऑफ हायर एजुकेशन से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन डिग्री हासिल की. पढ़ाई के दौरान ही अंकित की रुचि डिजिटल मीडिया और न्यूज लिखने में बढ़ने लगी. इसी दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों पर काम करना शुरू किया और आगे चलकर उन्होंने इन्हीं विषयों को अपने काम का हिस्सा बना लिया.

प्रभात खबर डिजिटल से पहले अंकित ने Zee News में करीब एक साल तक काम किया. यहां उन्होंने टीवी न्यूज प्रोडक्शन, आउटपुट डेस्क, कंटेंट रिसर्च, फैक्ट वेरिफिकेशन और न्यूज राइटिंग के अलग-अलग पहलुओं पर काम किया.

विजन

अंकित का मानना है कि टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरें केवल नए प्रोडक्ट्स की जानकारी नहीं होतीं, बल्कि लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी, खरीदारी के फैसलों और डिजिटल एक्सपीरियंस पर भी असर डालती हैं.

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