झारखंड में कोरोना और मौसम की मार, गढ़वा में कोयल नदी के किनारे फेंके हजारों चिकन, तो रांची में सड़क पर फेंके मटर

Updated at : 15 Mar 2020 6:12 PM (IST)
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झारखंड में कोरोना और मौसम की मार, गढ़वा में कोयल नदी के किनारे फेंके हजारों चिकन, तो रांची में सड़क पर फेंके मटर

thousands of chicken thrown on the banks of Koyal river in Garhwa, peas thrown on the road in Ranchi district of jharkhand. रांची/मझिआंव : झारखंड (Jharkhand) में एक तरफ कोरोना वायरस (Coronavirus) के डर से पोल्ट्री फार्म (Poultry Farm) के मालिक डरे-सहमे हुए हैं, तो दूसरी तरफ मौसम (Weather) की मार ने किसानों (Farmers) की कमर तोड़ दी है. गढ़वा जिला (Garhwa District) के मझिआंव प्रखंड (Majhiaon Block) में पोल्ट्री फार्म के मालिक ने हजारों चिकन (Chicken) को कोयल नदी के किनारे फेंक दिया है, तो रांची (Ranchi) के बेड़ो (Bero) में किसानों ने मटर (Peas) को सड़क पर फेंक दिया है. लोग यहां से मटर उठाकर ले जा रहे हैं.

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रांची/मझिआंव : झारखंड (Jharkhand) में एक तरफ कोरोना वायरस (Coronavirus) के डर से पोल्ट्री फार्म (Poultry Farm) के मालिक डरे-सहमे हुए हैं, तो दूसरी तरफ मौसम (Weather) की मार ने किसानों (Farmers) की कमर तोड़ दी है. गढ़वा जिला (Garhwa District) के मझिआंव प्रखंड (Majhiaon Block) में पोल्ट्री फार्म के मालिक ने हजारों चिकन (Chicken) को कोयल नदी के किनारे फेंक दिया है, तो रांची (Ranchi) के बेड़ो (Bero) में किसानों ने मटर (Peas) को सड़क पर फेंक दिया है. लोग यहां से मटर उठाकर ले जा रहे हैं.

बेड़ो और आसपास के थोक बाजारों का भी यही हाल है. बताया जा रहा है कि फसल की लागत नहीं मिलने से किसान बेहद निराश हैं. किसान बाजार में मटर बेचने के लिए लाये थे, लेकिन कोई 2 रुपये प्रति किलो की दर से भी खरीदने के लिए तैयार नहीं थे. अब यहां से मटर घर ले जायें, तो जितने की मटर है, उससे ज्यादा किराया लग जायेगा. इसलिए पूरी फसल को फेंकने में ही भलाई समझी.

वहीं, गढ़वा जिला के मझिआंव में सोशल मीडिया में चल रही खबरों से घबराकर एक पोल्ट्री फार्म के मालिक ने अपने तमाम चूजों और मुर्गों को नदी किनारे फेंक दिया. अब लोगों में इस बात को लेकर आशंका है कि चूजे और मुर्गे मरेंगे, तो पूरे इलाके में कोरोना वायरस फैल जायेगा.

कोयल नदी के किनारे पृथ्वी चक में रविवार को हजारों मुर्गे पड़े थे. बताया गया है कि मझिआंव नगर पंचायत क्षेत्र के वार्ड संख्या 4 के कृष्णा मेहता का पोल्ट्री फॉर्म है. उसने ही सारे मुर्गे और चूजे फेंके हैं. कहा जा रहा है कि कोरोना वायरस के डर से लोगों ने चिकन खाना बंद कर दिया है. औने-पौने दाम पर भी मुर्गे की बिक्री नहीं हो रही. इससे पोल्ट्री फार्म के मालिक चिंतित हैं.

उनका कहना है कि मुर्गे को बेवजह दाना खिलाना और उसकी सेवा करना बेकार है. इसलिए इसे फेंक देने में ही भलाई है. कहा जा रहा है कि पोल्ट्री फार्म के मालिक ने जीवित मुर्गों को फेंका था, लेकिन बारिश और ओलावृष्टि में सभी की मौत हो गयी. गनीमत यह रही कि मूसलाधार बारिश के बाद कोयल नदी उफनायी और सारे मुर्गों को बहा ले गयी.

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Mithilesh Jha

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By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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