Ranchi News : झारखंड को नयी दिशा देने पर सहमत व्यापारी

झारखंड के साथ ही छत्तीसगढ़ और उत्तराखंड राज्य बने थे. झारखंड को छोड़कर दोनों राज्य विकास की दौड़ में आगे निकल गये.
प्रभात खबर परिचर्चा. प्रदेश के विकास में झारखंड चेंबर कंधे-से-कंधे मिला कर चलने को तैयार
चेंबर का संकल्प, सरकार के साथ मिलकर बनायेंगे आत्मनिर्भर झारखंड
राजनीतिक स्थिरता के बाद आर्थिक प्रगति की बारी, उद्योग जगत ने दिखाई राह
लाइफ रिपोर्टर @ रांचीझारखंड के साथ ही छत्तीसगढ़ और उत्तराखंड राज्य बने थे. झारखंड को छोड़कर दोनों राज्य विकास की दौड़ में आगे निकल गये. अब झारखंड में राजनीतिक स्थिरता आई है. ऐसे में राज्य के विकास की रफ्तार तेज होनी चाहिए. सरकार के साथ झारखंड चेंबर कंधे से कंधा मिलाकर चलने को तैयार है. यह बातें झारखंड चेंबर भवन में प्रभात खबर की परिचर्चा में व्यापारियों ने कही.
झारखंड चेंबर की भागीदारी सुनिश्चित करनी होगी : रोहितबिहार से अलग होकर झारखंड बना था, तब काफी उम्मीदें थीं. चाहकर भी बहुत कुछ नहीं किया जा सका, लेकिन अब आगे बढ़कर काम करना होगा, वरना हम पीछे रह जायेंगे. सरकार को चेंबर की भागीदारी सुनिश्चित करनी चाहिए. ऐसा पैनल बनाया जाये, जिसमें झारखंड चेंबर के पदाधिकारी भी शामिल हों.रोहित अग्रवाल, महासचिव, झारखंड चेंबर
—————————–नीतियां अच्छी, पर क्रियान्वयन कमजोर : राम बांगड़
हमारी नीतियां अच्छी हैं, लेकिन उनका क्रियान्वयन समय पर नहीं हो पाता. समयबद्ध क्रियान्वयन से उद्यमियों में विश्वास बढ़ता है. दीर्घकालिक नीति बने तो निवेशकों का भरोसा भी बढ़ेगा. संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय होनी चाहिए. औद्योगिक क्षेत्रों में सड़क व नाली की सुविधाओं की स्थिति दयनीय है. राम बांगड़, उपाध्यक्ष, झारखंड चेंबर———————-
व्यापारी समाज की उम्मीदें अब भी अधूरी : प्रवीण लोहियाझारखंड गठन के बाद सोचा था कि राज्य व्यापार, उद्योग और निवेश का केंद्र बनेगा, लेकिन जटिल नीतियों और प्रशासनिक देरी ने विकास की गति को थाम दिया. व्यापारी समाज ने हमेशा राज्य के विकास में योगदान दिया है. अब समय है कि सरकार व्यापारिक वातावरण को सरल, सुरक्षित और पारदर्शी बनाये.प्रवीण लोहिया, उपाध्यक्ष, झारखंड चेंबर
————————-सिंगल विंडो सिस्टम कारगर नहीं : मुकेश अग्रवालराज्य गठन के समय कई एमओयू हुए थे, लेकिन उनका धरातल पर क्रियान्वयन नहीं हुआ. सिंगल विंडो सिस्टम प्रभावी नहीं हो सका. इंडस्ट्रियल पार्क और इकनॉमिक जोन नहीं बन पाये. टाटा स्टील जैसी प्रमुख कंपनी ने भी नया उद्योग ओडिशा में स्थापित किया. सरकार को इस पर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए.
मुकेश अग्रवाल, चेयरमैन, लाॅ एंड ऑर्डर——————–वर्ष 2040 तक झारखंड बन सकता है आत्मनिर्भर : संजय
खनिज, जल, वन और मानव संसाधनों के बावजूद नीतिगत स्पष्टता, भूमि उपलब्धता, बुनियादी ढांचे और निवेशकों को सुविधा देने में राज्य पीछे रह गया है. एचइसी, टाटा मोटर्स, बोकारो स्टील जैसी इकाइयों के आसपास डाउनस्ट्रीम इंडस्ट्री विकसित नहीं हो पायी. यदि ठोस नीति के साथ आगे बढ़ा जाये, तो वर्ष 2040 तक झारखंड आत्मनिर्भर बन सकता है.संजय अखौरी, अध्यक्ष, जेसीपीडीए
—————-झारखंड में लैंड बैंक नहीं : किशोर मंत्रीछत्तीसगढ़ और उत्तराखंड के साथ बने झारखंड को अब राजनीतिक स्थिरता मिली है, पर चुनौतियां अब भी हैं. राज्य में लैंड बैंक नहीं है, खासमहाल की जमीनों का लीज रिन्यूअल लंबित है. इंडस्ट्रियल पार्क अब तक नहीं बन पाये हैं. सुरक्षा और मूलभूत सुविधाओं पर ध्यान देना जरूरी है. आधुनिक बस स्टैंड की आवश्यकता है.
किशोर मंत्री, पूर्व अध्यक्ष, झारखंड चेंबर————————–
चेंबर के सहयोग से विकास में तेजी आयेगी : तुलसी पटेलराज्य गठन के समय काफी उम्मीदें थीं. शुरुआती वर्षों में प्रगति दिखी, लेकिन नयी कंपनियों का आगमन नहीं हुआ. पर्यटन क्षेत्र में कार्य हो रहा है. झारखंड चेंबर के सहयोग से राज्य के विकास में तेजी आ सकती है. सरकार को ठोस कदम उठाने और रणनीति बनाकर काम करने की जरूरत है.तुलसी पटेल, व्यापारी
————–उद्योग को सर्वोच्च प्राथमिकता मिले : शशांक भारद्वाजराज्य गठन के बाद से प्रति व्यक्ति आय और बजट में वृद्धि हुई है. कृषि क्षेत्र में अच्छे प्रयोग हुए हैं. अब उद्योग-धंधों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए. राइट टू सर्विस एक्ट लागू होना चाहिए, क्योंकि उनकी आवश्यकताएं अलग हैं. झारखंड के औद्योगिक विकास के लिए एक समर्पित समिति बननी चाहिए.
शशांक भारद्वाज, व्यापारी——————
ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स और टेक्सटाइल पर फोकस जरूरी : प्रमोदऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स और टेक्सटाइल के क्षेत्र में पहल की जानी चाहिए. ऑनलाइन सिस्टम आज भी अधिकारियों पर निर्भर है. लाइसेंस की प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद रिन्यूअल नहीं हो पाता. छोटे उद्योगों का व्यापार बढ़ा है और टेक्सटाइल क्षेत्र में भी प्रगति हुई है.प्रमोद सारस्वत
—————फिल्म नीति में संशोधन की जरूरत : आनंद जालानराज्य की फिल्म नीति बनी हुई है, लेकिन फिल्म सब्सिडी बंद है. इससे झारखंड में फिल्म शूटिंग नहीं हो पा रही है. नयी फिल्म नीति बननी चाहिए, जिसमें झारखंड चेंबर के प्रतिनिधियों को शामिल किया जाये. इससे राज्य के विकास को नयी दिशा मिलेगी.आनंद जालान
——————इंडस्ट्री पर फोकस करना होगा : सुबोध वर्माराज्य गठन के समय जो उम्मीदें थीं, वे पूरी नहीं हुईं. अब जागरूकता अभियान चलाने और उद्योग पर फोकस करने की जरूरत है. उद्योगों के विकास के बिना प्रदेश का समग्र विकास संभव नहीं है. नये आइडिया लाने होंगे.
सुबोध वर्मा—————सीएनटी-एसपीटी एक्ट विकास में बाधक : रमेश साहूझारखंड के विकास में सीएनटी और एसपीटी एक्ट सबसे बड़ी बाधा हैं. गैर मजरूआ भूमि की रजिस्ट्री, दाखिल-खारिज और रसीद निर्गत नहीं होने से माइनिंग लीज प्रभावित हैं. सरकार को राजस्व हानि हो रही है. गैर मजरूआ भूमि पर बने उद्योगों के बैंक खाते फ्रीज हो रहे हैं. बैंक इन्हें वैध संपत्ति नहीं मानते.
रमेश साहू—————–
सरकार में इच्छाशक्ति की कमी : सुबोध चौधरीझारखंड में जमीन की कमी नहीं है, कमी है तो इच्छाशक्ति की. यदि सरकार ठान ले तो बहुत कुछ संभव है. राज्य गठन के 25 वर्ष बाद भी विकास का स्तर संतोषजनक नहीं है. सरकार ठोस नीति के तहत आगे बढ़े तो निश्चित रूप से झारखंड का विकास संभव है.
सुबोध चौधरी—————-स्वास्थ्य क्षेत्र पर फोकस जरूरी : अमित मिश्राझारखंड की पहचान अभी भी राष्ट्रीय स्तर पर सशक्त नहीं बन पायी है. इज ऑफ डूइंग बिजनेस को वास्तविक अर्थों में लागू करना होगा. स्वास्थ्य क्षेत्र में फोकस बढ़ाना होगा, ताकि सप्लाई और डिमांड के बीच की खाई कम हो सके.
अमित मिश्रा————–
अभी बहुत कुछ करना बाकी : राजीव प्रकाश चौधरीखेल और शिक्षा योजनाओं का लाभ सही तरीके से नहीं मिल रहा है. झारखंडी कलाकारों की स्थिति भी चिंताजनक है. राज्य के समग्र विकास के लिए सरकार को कई क्षेत्रों में ठोस पहल करनी होगी.
राजीव प्रकाश चौधरीडिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
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By Prabhat Khabar News Desk
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