Ranchi News : अपनी सत्ता को ध्यान में रख भाजपा करना चाहती है परिसीमन, होगा विरोध : सुप्रियो

Updated at : 08 Mar 2025 9:06 PM (IST)
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Ranchi News : अपनी सत्ता को ध्यान में रख भाजपा करना चाहती है परिसीमन, होगा विरोध : सुप्रियो

झामुमो ने परिसीमन के लिए तैयार हो रहे ड्राफ्ट पर उठाया सवाल

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रांची. झामुमो ने देश में परिसीमन को लेकर तैयार किये जा रहे ड्राफ्ट पर सवाल उठाया है. पार्टी के केंद्रीय महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि भाजपा अपनी सत्ता को ध्यान में रख कर परिसीमन करना चाहती है. इसका पार्टी हर स्तर पर विरोध करेगी. हरमू स्थित पार्टी के कैंप कार्यालय में पत्रकारों से श्री भट्टाचार्य ने कहा कि 2026 के बाद पूरे देश में परिसीमन होगा. इसके पहले दो बार 1976 और 2008 में परिसीमन हुआ था. दोनों वक्त लोकसभा की कुल संख्या 543 ही रही. क्योंकि संविधान का आर्टिकल 81 स्पष्ट रूप से कहता है कि देश के संसद में अधिकतम 530 सदस्य होंगे और केंद्रीय शासित राज्य 20 होगा. यानि लोकसभा में सदस्यों की संख्या 550 होगी. लेकिन अब जो ड्राफ्ट को लेकर बातें सामने आ रही है, वह चौंकाने वाले हैं. इसके अनुसार अब लोकसभा में सदस्यों की संख्या बढ़ 846 हो जायेगी. श्री भट्टाचार्य ने कहा कि 2008 में हुए परिसीमन से पहले झामुमो ने आंदोलन किया था. इसके बाद केंद्र सरकार ने झारखंड व नार्थ ईस्ट को इससे अलग रखा, क्योंकि झारखंड के प्रतिनिधित्व के प्रतिशत में आघात होने वाला था. लेकिन अब जो बात सामने आ रही है, उसमें वर्ष 2001 की जनगणना के अनुसार देश के सभी राज्यों में परिसीमन किया जायेगा. केंद्र सरकार 25 वर्षों में हुए बदलाव को नजरअंदाज करने की कोशिश कर रही है. 2011 की जनगणना रिपोर्ट है, लेकिन उसका प्रकाशन नहीं हुआ. उन्होंने कहा कि नये परिसीमन के बाद उत्तर प्रदेश में 80 सांसद हैं, जो बढ़ कर 143 हो जायेंगे, बिहार में सदस्यों की संख्या 40 से बढ़ कर 79, मध्यप्रदेश में 29 से बढ़ कर 52, गुजरात में 26 से बढ़ कर 43, राजस्थान में 25 से बढ़ कर 50, महाराष्ट्र में 48 से बढ़ कर 76, तमिलनाडु में 39 से बढ़ कर 49, कर्नाटक में 28 से बढ़ कर 41, आंध्र प्रदेश व तेलंगाना में 42 से बढ़ कर 54, झारखंड में 14 से बढ़ कर 24 की बात चल रही है. इसके हिसाब से 10 राज्यों की कुल सीटें बढ़ कर 647 हो जायेगी. यह कुल सीटों का लगभग 77 प्रतिशत है. केंद्र सरकार की ओर से पूर्वी व पूर्वोत्तर भारत को वंचित करने का प्रयास किया जा रहा है. खास कर आदिवासी क्षेत्र व अनुसूचित जाति को टारगेट किया जा रहा है, ताकि इनकी चुनावी राजनीति से दखल समाप्त हो जाये. केंद्र सरकार गलत राजनीतिक मंशा के साथ इसे लाना चाह रही है.

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