आरोपी पुलिस के कब्जे में नहीं, कैसे करायेंगे पॉलिग्राफिक टेस्ट : हाइकोर्ट

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आरोपी पुलिस के कब्जे में नहीं, कैसे करायेंगे पॉलिग्राफिक टेस्ट : हाइकोर्ट

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रांची : झारखंड हाइकोर्ट में शुक्रवार को हजारीबाग में नाबालिग को एसिड पिलाने के मामले में स्वत: संज्ञान से दर्ज जनहित याचिका पर सुनवाई हुई. चीफ जस्टिस डॉ रवि रंजन व जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान अनुसंधान की स्थिति पर कड़ी टिप्पणी की. खंडपीठ ने सरकार के समय मांगे जाने के आग्रह को स्वीकार करते हुए हजारीबाग के पुलिस अधीक्षक से पूछा कि आरोपी आपके कब्जे में नहीं है. वैसी स्थिति में आप उसका पॉलिग्राफिक टेस्ट कैसे करायेंगे.

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बिना हिरासत में लिये टेस्ट कैसे संभव है. लगता है पुलिस गंभीरता को नहीं समझ रही है. किसी न किसी तरीके से आरोपी को बचाने का प्रयास लगता है. एसपी जवाब नहीं दे सके. पुलिस द्वारा जारी सीआरपीसी के तहत 91/160 के नोटिस पर खंडपीठ ने कहा कि यह नोटिस गवाहों से संबंधित है. पुलिस ने प्राथमिकी में नामजद आरोपी को गवाहों से संबंधित नोटिस जारी किया है. क्या पुलिस आरोपी को गवाह मानती है.

खंडपीठ ने पुलिस अधीक्षक को चेताया कि आगे बहुत ही गंभीर सवाल उठेंगे. साथ ही खंडपीठ ने हजारीबाग की निचली अदालत को संबंधित मामले में रिपोर्ट भेजने का निर्देश दिया. मामले की अगली सुनवाई 25 सितंबर को होगी. सुनवाई के दौरान हजारीबाग के पुलिस अधीक्षक वर्चुअल तरीके से उपस्थित थे.

मामले के अनुसंधानकर्ता कोरोना पॉजिटिव हो जाने के कारण उपस्थित नहीं हो सके. उल्लेखनीय है कि झारखंड हाइकोर्ट की अधिवक्ता अपराजिता झा ने चीफ जस्टिस को पत्र लिख कर इस घटना की जानकारी दी थी. चीफ जस्टिस ने पत्र को गंभीरता से लेते हुए उसे जनहित याचिका में तब्दील कर दिया.

Post by : Pritish Sahay

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