झारखंड : मुठभेड़ के वैसे मामलों की जांच लटका रहा CID, जिनमें फंस सकते हैं बड़े पुलिस अफसर

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 07 Sep 2016 1:26 AM

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रांची : झारखंड सीआइडी मुठभेड़ में निर्दोष की मौत के करीब चार दर्जन मामलों की जांच पिछले कई वर्षों से कर रहा है. पर जांच अब तक पूरी नहीं हुई है. पुलिस महकमे में चर्चा है कि इन मामलों की जांच होने पर पुलिस के कई सीनियर अफसर फंस सकते हैं. इस कारण मामलों की […]

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रांची : झारखंड सीआइडी मुठभेड़ में निर्दोष की मौत के करीब चार दर्जन मामलों की जांच पिछले कई वर्षों से कर रहा है. पर जांच अब तक पूरी नहीं हुई है. पुलिस महकमे में चर्चा है कि इन मामलों की जांच होने पर पुलिस के कई सीनियर अफसर फंस सकते हैं. इस कारण मामलों की जांच लटका दी गयी है.

चाईबासा के छोटानागरा थाना क्षेत्र में 2011 में पुलिस की गोली से सोमा गुड़िया व 2012 में मंगल होनहागा की मौत हुई थी. इसी तरह 2014 में गुमला के गुड़दड़ी क्षेत्र में पुलिस की गोली से दो मजदूर मारे गये थे. 2015 में पलामू के बकोरिया में 12 कथित नक्सली मारे गये थे. पर इनमें से किसी की जांच अब तक पूरी नहीं हुई. गुमला के मामले में तो पुलिस के सीनियर अफसरों ने जिम्मेदार अफसरों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई पर भी रोक लगा दी है. हालांकि सीआइडी उन मामलों की जांच पूरी कर लेती है, जिनमें पुलिस की कोई गलती नहीं होती.

बकोरिया में नाबालिग भी मारा गया था : 2015 में पलामू के बकोरिया में पुलिस ने मुठभेड़ में 12 नक्सलियों को मारने का दावा किया था. हालांकि पुलिस के पास सिर्फ एक के नक्सली होने का रिकाॅर्ड था. मरनेवालों में एक नाबालिग भी था. घटना के कुछ दिन बाद सामने आयी मुठभेड़ स्थल की तसवीरों व जब्ती सूची ने पुलिस के दावे पर गंभीर सवाल खड़ा कर
दिया था. पुलिस के सीनियर अफसरों में चर्चा है कि मामले की सही जांच की जाये, तो दारोगा से लेकर आइजी रैंक तक के अफसर फंसेंगे.
डर से भाग रहा था, पुलिस ने मार दी गाेली : 2011 में पुलिस ने सारंडा में ऑपरेशन ग्रीन हंट चलाया था. इस दौरान सात सितंबर 2011 को चाईबासा के छोटानागरा थाना क्षेत्र में नक्सलियों का ट्रेनिंग कैंप ध्वस्त किया था. कैंप के सामान को ढोने के लिए सीआरपीएफ ने ग्रामीणों की मदद ली थी. लौटने के दौरान रात और बारिश होने के कारण पुलिस एक जगह रुक गयी थी. इसी दौरान मंगल होनहागा की मौत गोली लगने से हो गयी. ग्रामीणों ने आरोप लगाया था कि रात में जब पुलिस के डर से मंगल होनहागा भागने लगा था, तब पुलिस ने उसे गोली मार दी थी. मामले की सही तरीके से जांच हुई तो सीआरपीएफ के डिप्टी कमांडेंट रैंक के एक अफसर फंसेंगे.
ट्रक पर की थी फायरिंग : तीन सितंबर 2014 के तड़के गुरदरी थाना क्षेत्र में पुलिस ने मजदूरों को ले जा रहे ट्रक पर फायरिंग कर दी. छह मजदूरों को गोली लगी थी. इनमें दो की मौत हो गयी. सरकार ने तत्कालीन आइजी व आयुक्त से जांच करायी. जांच रिपोर्ट में गुमला के एएसपी ऑपरेशन पवन कुमार सिंह समेत अन्य पुलिसकर्मियों को जिम्मेदार ठहराया गया.
काउज लिस्ट से हटा दिया गया मामला
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग सात और आठ सितंबर को धुर्वा स्थित ज्यूडिशियल अकेडमी में खुली सुनवाई करेगा. सुनवाई के लिए पहले से तैयार काउज लिस्ट में से एक मामले को हटा दिया गया है. आठ सितंबर को जारी काउज लिस्ट 10वें नंबर पर फरजी नक्सल सरेंडर मामले की सुनवाई होनी थी. इस मामले की शिकायत संख्या- 1087/34/16/2014 है. पर बाद में जारी काउज लिस्ट से इसे हटा दिया गया. इसमें यह शिकायत नंबर है ही नहीं. मानवाधिकार आयोग ने इस मामले को स्वत: संज्ञान लिया था. मामला 2012-13 का है. रांची, खूंटी, गुमला, सिमडेगा समेत अन्य जिलों के 400 से अधिक युवकों को रांची में पुराने जेल परिसर में रखा गया. युवकों से कहा गया था कि उन्हें हथियार दिये जायेंगे. वे हथियार के साथ सरेंडर करेंगे, तो सरकार उन्हें पुलिस में नौकरी देगी. युवकों से लाख-डेढ़ लाख रुपये की वसूली भी की गयी थी. युवकों को सीआरपीएफ की कोबरा बटालियन की निगरानी में रखा गया था. उस समय सीआरपीएफ के आइजी रहे डीके पांडेय अभी राज्य के डीजीपी हैं. युवकों के भोजन-पानी का प्रबंध रांची के तत्कालीन एसएसपी की ओर से किया जा रहा था. डीके पांडेय के तबादले के बाद एमवी राव सीआरपीएफ के रांची के आइजी बने. उन्होंने इस मामले की जानकारी तत्कालीन डीजीपी को दी. इसके बाद लोअर बाजार थाने में प्राथमिकी दर्ज की गयी. जिस एनजीओ की ओर से यह काम किया गया था, उसके रवि बोदरा को पुलिस ने गिरफ्तार किया. इसके बाद से अनुसंधान रुका हुआ है. भुक्तभोगी युवकों का आरोप है कि पूरे मामले की जानकारी सीआरपीएफ के तत्कालीन आला अफसरों को भी थी.
कुछ मामले, जो वर्षों से लंबित हैं
2009 : सिमडेगा में अपहरण के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे लोगों पर पुलिस फायरिंग में दो लोगों की मौत हुई थी
2011 : चाईबासा के छोटानागरा थाना क्षेत्र में युवक सोमा गुड़िया की पुलिस की गोली से मौत
2011 : धनबाद में पुलिस फायरिंग में चार लोगों की मौत
2012 : चाईबासा के छोटानागरा थाना क्षेत्र में पुलिस की गोली से युवक मंगल होनहागा की मौत
2013 : खूंटी में पुलिस मुठभेड़ में संदीप आइंद की मौत
2014 : गुमला के गुड़दड़ी थाना क्षेत्र में सीआरपीएफ की गोली से दो ग्रामीणों की मौत
2015 : पलामू के बकोरिया में मुठभेड़ में नाबालिग समेत 12 कथित नक्सली की मौत
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