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सुप्रीम कोर्ट ने आजीवन कारावास में बदल दी अजय पाल की सजा

Updated at : 21 Dec 2014 3:06 AM (IST)
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सुप्रीम कोर्ट ने आजीवन कारावास में बदल दी अजय पाल की सजा

निचली अदालत व हाईकोर्ट ने फांसी की सजा सुनायी थी रांची : सुप्रीम कोर्ट ने वन संरक्षक धीरेंद्र कुमार की पत्नी, बेटा व बेटी समेत पांच लोगों की हत्या के आरोपी अजय पाल की फांसी की सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया है. निचली अदालत और हाईकोर्ट द्वारा फांसी की सजा सुनाये जाने के […]

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निचली अदालत व हाईकोर्ट ने फांसी की सजा सुनायी थी
रांची : सुप्रीम कोर्ट ने वन संरक्षक धीरेंद्र कुमार की पत्नी, बेटा व बेटी समेत पांच लोगों की हत्या के आरोपी अजय पाल की फांसी की सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया है. निचली अदालत और हाईकोर्ट द्वारा फांसी की सजा सुनाये जाने के बाद अजय पाल ने राष्ट्रपति के यहां दया याचिका भेजी थी.
20 फरवरी 2014 को यह सूचना आयी थी कि राष्ट्रपति ने दया याचिका को खारिज कर दिया है. इसके बाद अजय पाल ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी और कहा था कि राष्ट्रपति द्वारा उसकी याचिका पर बहुत समय तक विचार नहीं किया गया. सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने फांसी की सजा को आजीवन कारावास की सजा में तब्दील कर दिया है. इसकी सूचना जेल प्रशासन को दे दी गयी है. अजय पाल रांची जेल में बंद है.
दो जून 2003 की रात हुई थी दिल दहलानेवाली घटना
दो जून 2003 की रात बरियातू रोड के गांधी विहार मुहल्ला स्थित वन संरक्षक धीरेंद्र कुमार की पत्नी, दो बेटे, एक रिश्तेदार और एक नौकर की मौत जल कर हो गयी थी. नौकर अजय पाल धीरेंद्र के घर के कुएं में लटका हुआ मिला था. इस मामले में पुलिस ने अजय पाल को हिरासत में लिया. पूछताछ के दौरान उसने बताया कि नौ साल से वह वन संरक्षक के यहां नौकरी कर रहा था. सिर्फ खाना बनाता था. दो जून की रात आलू की सब्जी बनायी थी. संरक्षक की पत्नी अमिता ने उससे कहा था कि कल सुबह तुम अपने घर चले जाना. इस पर उसे गुस्सा आया और पांच लोगों की हत्या करने की ठान ली.
रात के करीब तीन बजे वह पहले अमिता उर्फ रूबी के कमरे में गया. वह बेटे आयन और रिश्तेदार अनमोल के साथ सोयी हुई थी. अजय पाल ने उस कमरे में रखे अखबार और कपड़ों में आग लगा दी. सभी की मौत दम घुटने से हो गयी. फिर वह दूसरे कमरे में गया. वहां हर्षित सोया हुआ था. अजय पाल ने पहले हर्षित का गला दबाया और किसी वजनदार सामान से उसके सीने पर वार किया, जिससे उसकी मौत हो गयी थी. अजय पाल ने पकड़े जाने के डर से दूसरे नौकर बिट्ट को भी डंडा से मार कर बेहोश कर दिया और आग में फेंक दिया था.
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