केज कल्चर से जुड़े हैं खलारी प्रखंड के 160 ग्रामीण

Updated at : 22 Jun 2025 6:46 PM (IST)
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केज कल्चर से जुड़े हैं खलारी प्रखंड के 160 ग्रामीण

डीएमएफटी मद से वर्ष 2019-20 में मत्स्य विभाग योजना शुरू

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प्रतिनिधि, खलारी.

प्रखंड के तुमांग पंचायत में सीसीएल के दो बंद खदानों के जल संसाधनों का उपयोग करके डीएमएफटी मद से लगाया गया केज कल्चर ग्रामीणों को आत्मनिर्भर बना रहा है. ग्रामीण मछली पालन कर लाभान्वित हो रहे हैं. केज कल्चर बेरोजगार युवाओं के लिए रोजगार के रूप में वरदान साबित हो रहा है. पलायन रोकने में अहम भूमिका निभा रहा है. खलारी प्रखंड मत्स्य जीव सहयोग समिति से 160 ग्रामीण जुड़कर मछली पालन कर रहे हैं. गौरतलब है कि खलारी प्रखंड अंतर्गत कोई बड़ी फैक्ट्री नहीं है. ऐसे में सीसीएल एनके एरिया की तुमांग पंचायत के खिलानधौड़ा स्थित सी ब्लॉक बंद खदान की जलाशय में डीएमएफटी मद से जिला योजना के तहत वर्ष 2019-20 में मत्स्य विभाग योजना की शुरुआत की गयी. खलारी प्रखंड मत्स्य जीव सहयोग समिति बनायी गयी. समिति में दर्जनों स्थापित विस्थापित बेरोजगार युवाओं को जोड़ा गया. वहीं सी ब्लॉक बंद खदान के बाद आवश्यकता अनुसार तुमांग के धमधमिया स्थित बंद नौ नंबर खदान की जलाशय में वर्ष 2021-22 में मत्स्य पालन की शुरुआत हुई. सी ब्लॉक बंद खदान में 17 केज तथा नौ नंबर खदान स्थित तालाब में 78 केज में मछली का पालन किया जा रहा है. एक केज में लगभग चार टन मछली का उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित है. इस योजना में अनुमानित आंकड़ा अनुसार चार लाख रुपये समिति के लाभुक सदस्य को मिलता है.

बंद खदान की जलाशय मत्स्य पालन के लिए बेहतर :

खलारी में बंद कोयला खदान की जलाशय मत्स्य पालन के लिए अच्छा जलस्रोत है. पूर्व में कोयला निकल जाने के बाद अथाह पानी भरा है. अब केज कल्चर योजना के माध्यम से मछली पालन किया जा रहा है और रोजगार के नये अवसर मिल रहे हैं. ऐसे में बढ़ती बेरोजगारी को दूर करने के लिए इसी के तर्ज पर खलारी के बाकी बंद खदानों के जलाशयों व खलारी के चूना-पत्थर झील तालाब में केज कल्चर की शुरुआत कर काफी संख्या में बेरोजगार युवाओं को जोड़कर मत्स्य पालन की शुरुआत हो सकती है.

क्या कह रहे हैं समिति के अध्यक्ष :

खलारी प्रखंड मत्स्य जीव सहयोग समिति के अध्यक्ष बालेश्वर गंझू बताते हैं कि खिलानधौड़ा स्थित तालाब में 17 केज तथा नौ नंबर स्थित तालाब में 78 केज में मछली का पालन किया जा रहा है. एक केज में लगभग चार टन मछली का उत्पादन होगा: जिससे चार लाख रुपया समिति लाभुक के सदस्य को मिलेगा. गंझू बताते हैं कि आसपास के बाजारों में मछलियों की खपत कम है. ऐसे में मछली रखनेवाले कोल्ड स्टोरेज की जरूरत है. उन्होंने बताया कि इस वर्ष समय से पहले वर्षा होने से मछलियों के उत्पादन में बढ़ोतरी हो सकती है.

फ्लैग :::::::: डीएमएफटी मद से वर्ष 2019-20 में मत्स्य विभाग योजना शुरू

बेरोजगारी रोकने के लिए मछली पालन योजना बेहतर

22 खलारी01, धमधमिया स्थित नौ नंबर खदान की जलाशय में बना केज कल्चर.

22 खलारी02, केज से मछली निकालते अध्यक्ष बालेश्वर गंझू.

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