राज्य के 1487 शिक्षण संस्थानों में शैक्षणिक हड़ताल, पढ़ाई ठप

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 15 Oct 2014 11:02 PM

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इंटर कॉलेज, संस्कृत विद्यालय, स्थापना अनुमति उच्च विद्यालय व मदरसों का नहीं खुला ताला25000 से अधिक शिक्षाकर्मी पठन-पाठन से अलग रहेेवरीय संवाददातारांची : झारखंड राज्य वित्तरहित शिक्षा संयुक्त संघर्ष मोरचा के तत्वावधान में विभिन्न लंबित मांगों को लेकर शिक्षक व कर्मचारी बुधवार को हड़ताल पर रहे. राज्य के 30 स्थायी प्रस्वीकृति प्राप्त संस्कृत विद्यालय, 566 […]

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इंटर कॉलेज, संस्कृत विद्यालय, स्थापना अनुमति उच्च विद्यालय व मदरसों का नहीं खुला ताला25000 से अधिक शिक्षाकर्मी पठन-पाठन से अलग रहेेवरीय संवाददातारांची : झारखंड राज्य वित्तरहित शिक्षा संयुक्त संघर्ष मोरचा के तत्वावधान में विभिन्न लंबित मांगों को लेकर शिक्षक व कर्मचारी बुधवार को हड़ताल पर रहे. राज्य के 30 स्थायी प्रस्वीकृति प्राप्त संस्कृत विद्यालय, 566 स्थापना अनुमति प्राप्त हाइस्कूल, 300 इंटर कॉलेज व 591 मदरसों में पठन-पाठन बंद रहा. इन संस्थानों का ताला तक नहीं खोला गया. विद्यार्थी वहां पहुंचे थे, लेकिन उनको निराश होकर लौटना पड़ा. संयुक्त संघर्ष मोरचा की ओर से इंटर कॉलेजों का अधिग्रहण या घाटानुदान देने, स्थापना अनुमति हाइस्कूलों के शिक्षकों को पूर्ण वेतन देने, संस्कृत विद्यालयों व मदरसा को बिहार की तर्ज पर अनुदान देने की मांग की गयी है.शाम में मोरचा अध्यक्ष मंडल की बैठक हुई, जिसमें आंदोलनात्मक कार्यक्रमों की समीक्षा की गयी. वक्ताओं ने कहा कि मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा. 18 अक्तूबर को राजभवन के समक्ष एक दिवसीय धरना दिया जायेगा. छह नवंबर को मुख्यमंत्री आवास का घेराव होगा. इसके बाद शिक्षक आमरण अनशन पर बैठेंगे. इस अवसर पर रघुनाथ सिंह, सुरेंद्र झा, नरोत्तम सिंह, हरिहर प्रसाद कुशवाहा, विजय झा, मो हाशमी, चंद्रेश्वर पाठक, बलदेव पांडेय, अरविंद सिंह, अशफाक आलम, नरेश घोष, देवनाथ सिंह, अजीत टोप्पो, सनिरिया टोप्पो सहित कई लोग उपस्थित थे. यह है शिक्षकों की मांगें- 30 संस्कृत विद्यालय व 591 मदरसों को बिहार की तर्ज पर अनुदान मिले.-हाइस्कूल व इंटर कॉलेजों की नियमावली में संशोधन हो.-इंटर कॉलेजों का अधिग्रहण या घाटानुदान दिया जाये. – स्थापना अनुमति प्राप्त हाइस्कूलों के शिक्षाकर्मियों को पूर्ण वेतन का भुगतान किया जाये.- कामेश्वर समिति की अनुशंसाओं को लागू किया जाये.

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