रांची : सरकार पर लगाया 50,000 का हर्जाना
Updated at : 20 Feb 2020 9:10 AM (IST)
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रांची : सरकारी कर्मी से उसके जीवन काल में वसूल नहीं कर पाये, तो मरने के 10 वर्षों के बाद उससे रिकवरी नहीं हो सकती है. पूर्व में सुप्रीम कोर्ट ने भी आदेश पारित किया है. मामले को गंभीरता से लेते हुए हाइकोर्ट ने सरकार के खिलाफ 50,000 रुपये का हर्जाना लगाया तथा प्रार्थी को […]
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रांची : सरकारी कर्मी से उसके जीवन काल में वसूल नहीं कर पाये, तो मरने के 10 वर्षों के बाद उससे रिकवरी नहीं हो सकती है. पूर्व में सुप्रीम कोर्ट ने भी आदेश पारित किया है.
मामले को गंभीरता से लेते हुए हाइकोर्ट ने सरकार के खिलाफ 50,000 रुपये का हर्जाना लगाया तथा प्रार्थी को राशि भुगतान करने का निर्देश दिया. साथ ही आठ सप्ताह में प्रार्थी को 5.39 लाख रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया. मामले की सुनवाई हाइकोर्ट के जस्टिस डॉ एसएन पाठक की अदालत में हुई. दोनों पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए उक्त आदेश पारित किया. अदालत ने डीसी को यह भी निर्देश दिया कि वह विलंब के लिए दोषी की पहचान कर उससे राशि की रिकवरी करें.
प्रार्थी रानी किस्कू की अोर से अधिवक्ता सदाब बिन हक ने बताया कि उनके पति बहरागोड़ा में पंचायत सेवक के पद पर कार्यरत थे. वर्ष 2000 में सेवानिवृत्त हुए. वर्ष 2010 में उनका निधन हो गया. वर्ष 2011 में पारिवारिक पेंशन शुरू हुई. वर्ष 2000 से लेकर 2010 तक के बकाया पेंशन का भुगतान नहीं किया गया है. उन्होंने बकाया पेंशन आदि भुगतान करने के लिए उचित आदेश देने का आग्रह किया. वहीं, सरकार की अोर से बताया गया कि पंचायत सेवक को 2000 में सेवानिवृत्त होना था, लेकिन उन्होंने 2006 तक कार्य किया. उनसे छह साल के वेतन की वसूली की जानी है. यदि उनकी राशि निकलेगी, तो भुगतान कर दिया जायेगा.
टेरर फंडिंग मामले में 18 को होगी सुनवाई: हाइकोर्ट में टेरर फंडिंग मामले के आरोपी की अोर से दायर याचिका पर आंशिक सुनवाई हुई. जस्टिस अमिताभ कुमार गुप्ता व जस्टिस राजेश कुमार की खंडपीठ ने अगली सुनवाई के लिए 18 मार्च की तिथि निर्धारित की. प्रार्थी आधुनिक ग्रुप के मैनेजर संजय जैन ने क्वैशिंग याचिका दायर की है. नक्सलियों को आर्थिक सहयोग का आरोप लगाते हुए एनआइए ने प्राथमिकी दर्ज की है, जिसमें संजय जैन को भी आरोपी बनाया गया है.
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