आदिवासी लोक चित्रकला को संरक्षित करेगी सरकार
Updated at : 16 Feb 2020 6:51 AM (IST)
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महुआडांड़ : नेतरहाट में आयोजित पांच दिवसीय प्रथम राष्ट्रीय आदिवासी एवं लोक चित्रकला शिविर का समापन शनिवार को हुआ. मौके पर झारखंड अनुसूचित जाति, जनजाति एवं पिछड़ा वर्ग तथा परिवहन विभाग मंत्री चंपई सोरेन ने कहा कि यह एक ऐतिहासिक आयोजन था. सरकार आदिवासी लोक चित्रकला को संरक्षित करेगी. उन्होंने कहा कि सरकार की सोच […]
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महुआडांड़ : नेतरहाट में आयोजित पांच दिवसीय प्रथम राष्ट्रीय आदिवासी एवं लोक चित्रकला शिविर का समापन शनिवार को हुआ. मौके पर झारखंड अनुसूचित जाति, जनजाति एवं पिछड़ा वर्ग तथा परिवहन विभाग मंत्री चंपई सोरेन ने कहा कि यह एक ऐतिहासिक आयोजन था. सरकार आदिवासी लोक चित्रकला को संरक्षित करेगी.
उन्होंने कहा कि सरकार की सोच है कि देश की आदिवासी परंपरा को एक सूत्र एवं आत्मीयता से जोड़ा जाये. इसी उद्देश्य से मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने पहाड़ों की नगरी नेतरहाट में आदिवासी लोक चित्रकारी का प्रथम राष्ट्रीय शिविर का आयोजन किया.
इस शिविर में देश के तेलंगाना से महाराष्ट्र तक के आदिवासी लोक चित्रकार जुटे एवं एक दूसरे की संस्कृति को जाना. सरकार प्रत्येक वर्ष ऐसे कार्यक्रम आयोजित कर आदिवासी लोक चित्रकारी को जोड़कर संरक्षित करने का कार्य करेगी.
चित्रकारों ने अपने चित्र के माध्यम से आदिवासी जीवनशैली को प्रस्तुत किया. उपायुक्त जिशान कमर ने भी इस शिविर में भाग लेने के लिए सभी चित्रकारों को धन्यवाद दिया.
कई राज्यों के ख्याति प्राप्त लोक चित्रकार हुए शामिल
10 फरवरी से शुरू शिविर में कई राज्यों के ख्याति प्राप्त लोक चित्रकार शामिल हुए. असम के सूचित दास ने पुथी चित्रकला शौली का प्रदर्शन किया. इस चित्रकला में विष्णु के 10 अवतारों का वर्णन किया जाता है. हैदराबाद के दो भाई साई किरण व श्रवण कुमार ने बताया कि उनके प्रदेश की चैरियल स्क्रोल चित्रकला पर्व से जुड़ी हुई है. चित्तौड़ निवासी आशाराम ने बताया कि वे शिविर में पिछवाई चित्रकला का प्रदर्शन कर रहे हैं.
शोधकर्ता आदित्य झा के नेतृत्व में जेएनयू से 11 छात्रों का एक दल नेतरहाट के शैले हाउस पहुंचा है. श्री झा ने कहा कि यह आयोजन सराहनीय है. बिहार के सुरेंद्र पासवान, संजीव कुमार व सुरेंद्र पासवान कहते हैं कि मधुबनी पेंटिंग भगवान कृष्ण और रामायण के दृश्यों पर आधारित होती है.
आंध्रप्रदेश की चित्रकार विजयलक्ष्मी एवं मुनिरतनमा ने बताया कि उनकी पेंटिंग में रामायण एवं भगवान राम के परिवारों का वर्णन किया जाता है. झारखंड सोहराई चित्रकला महिला समिति की अध्यक्ष अलका अलमा ने बताया कि सोहराई चित्रों में दीवारों की पृष्ठभूमि मिट्टी के मूल रंग की होती है.
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