रांची : सिख दंगा पीड़ितों के मुआवजा मामले की जांच कर रहे आयोग को सुविधाएं नहीं देने पर नाराज
Author Prabhat khabar digital desk
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रांची : झारखंड हाइकोर्ट में शुक्रवार को सिख दंगा पीड़ितों के मुआवजा मामले में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई हुई. चीफ जस्टिस डॉ रवि रंजन व जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद की खंडपीठ ने सुनवाई करते हुए एक सदस्यीय जस्टिस डीपी सिंह आयोग को संसाधन उपलब्ध नहीं कराये जाने को लेकर नाराजगी जतायी. तत्काल गृह विभाग […]
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रांची : झारखंड हाइकोर्ट में शुक्रवार को सिख दंगा पीड़ितों के मुआवजा मामले में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई हुई. चीफ जस्टिस डॉ रवि रंजन व जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद की खंडपीठ ने सुनवाई करते हुए एक सदस्यीय जस्टिस डीपी सिंह आयोग को संसाधन उपलब्ध नहीं कराये जाने को लेकर नाराजगी जतायी. तत्काल गृह विभाग के सचिव को सशरीर हाजिर होने का आदेश दिया. खंडपीठ के आदेश के लगभग आधे घंटे के अंदर गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव सुखदेव सिंह सशरीर उपस्थित हुए.
खंडपीठ ने अपर मुख्य सचिव से पूछा कि वर्ष 2018 में सरकार ने शपथ पत्र दायर कर बताया था कि जांच आयोग को सारे जरूरी संसाधन उपलब्ध करा दिये गये हैं. आयोग को तो अब तक संसाधन मिला ही नहीं. कैसे आदेश की अनदेखी की गयी? इस पर श्री सिंह ने कोर्ट से क्षमा मांगते हुए कहा कि यह मेरे संज्ञान में नहीं लाया गया. वह मई 2019 से गृह विभाग के सचिव का पद संभाल रहे हैं. अब यह मामला मेरे संज्ञान में आ गया है.
एक माह के अंदर आयोग को सारे संसाधन उपलब्ध करा दिये जायेंगे. अपर मुख्य सचिव के जवाब को सुनने के बाद खंडपीठ ने कहा कि आयोग को एक माह के अंदर सभी बुनियादी सुविधा व संसाधन उपलब्ध करा दिये जायें. साथ ही शपथ पत्र दायर कर कोर्ट को भी अवगत कराया जाये. इसके बाद सुनवाई स्थगित कर दी गयी.
मामले की अगली सुनवाई के लिए 20 मार्च की तिथि निर्धारित की गयी. इससे पूर्व प्रार्थी की अोर से अधिवक्ता दिवाकर उपाध्याय ने खंडपीठ को बताया कि जांच आयोग को जरूरी बुनियादी सुविधा अब तक उपलब्ध नहीं करायी गयी है. इस कारण वह जांच नहीं कर पा रहे हैं. दंगा पीड़ितों के मुआवजा का मामला लंबित है. सरकार की ओर से कोर्ट को गलत जानकारी दी गयी है.
उल्लेखनीय है कि प्रार्थी सतनाम सिंह गंभीर ने जनहित याचिका दायर की है. उन्होंने 1984 दंगा के पीड़ितों के परिजनों को उचित मुआवजा दिलाने की मांग की है. पूर्व में हाइकोर्ट के आदेश के आलोक में सरकार ने वर्ष 2016 में हाइकोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस डीपी सिंह की एक सदस्यीय आयोग का गठन किया था. आयोग को सिख दंगा मामले में पीड़ितों के दावे की जांच कर रिपोर्ट देने काे कहा गया था.
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