रोजगार केंद्रों का हाल : 10.39 लाख से अधिक निबंधित बेरोजगार हैं झारखंड में, रोजगार देनेवाली संस्था में ही है कर्मियों की कमी

रांची : राज्य में 10 लाख 39 हजार से अधिक बेरोजगारों ने निबंधन कराया है. यह सभी राज्य सरकार के श्रम नियोजन एवं प्रशिक्षण विभाग द्वारा संचालित रोजगार केंद्र में निबंधित हैं. सबसे अधिक निबंधित बेरोजगारों की संख्या बोकारो के निबंधन कार्यालय में है. यहां करीब 25,230 निबंधित बेरोजगार हैं. श्रम विभाग एक-एक जिले में […]
रांची : राज्य में 10 लाख 39 हजार से अधिक बेरोजगारों ने निबंधन कराया है. यह सभी राज्य सरकार के श्रम नियोजन एवं प्रशिक्षण विभाग द्वारा संचालित रोजगार केंद्र में निबंधित हैं. सबसे अधिक निबंधित बेरोजगारों की संख्या बोकारो के निबंधन कार्यालय में है. यहां करीब 25,230 निबंधित बेरोजगार हैं.
श्रम विभाग एक-एक जिले में कई तरह के रोजगार केंद्रों का संचालन कर रही है. रांची में मॉडल एक्सचेंज सेंटर है. इसे मॉडल करियर सेंटर के नाम से जाना जाता है. इसके अतिरिक्त रांची में यूनिवर्सिटी इम्प्लाॅयमेंट एंड गाइडेंस ब्यूरो चलाया जाता है. रांची में ही प्रोफेशनल और एक्जीक्यूटिव के लिए अलग से केंद्र में निबंधन होता है. महिलाओं के लिए अलग से निबंधन केंद्र का संचालन रांची स्थित केंद्र में हो रहा है. राज्य में दूसरों को रोजगार देने के लिए खोले गये इस कार्यालय में खुद कर्मियों की कमी है. एक भी रोजगार केंद्र में जरूरत के मुताबिक कर्मचारी नहीं हैं.
92 हजार 12वीं पास और 32 डॉक्टरेट भी निबंधित
रोजगार केंद्र में तकनीकी से लेकर मिडिल पास तक युवाओं ने निबंधन कराया है. सबसे अधिक 92,021 युवा 12वीं पास हैं. 75,311 मैट्रिक पास और करीब 63,471 स्नातक पास युवा निबंधित हैं. राज्य के विभिन्न केंद्रों में 32 डॉक्टरेट डिग्रीधारी भी निबंधित हैं. 8,931 पीजी और 38,592 आइटीआइ युवकों ने भी निबंधन कराया है.
58 हजार ओबीसी और 65 हजार सामान्य श्रेणी से निबंधित
रोजगार केंद्रों में करीब 58 हजार ओबीसी श्रेणी से युवा निबंधित हैं. सामान्य श्रेणी के 54,641 और पिछड़ा वर्ग के 47,809 विद्यार्थी इन केंद्रों में निबंधित हैं. करीब 27,705 अनुसूचित जाति के युवाओं का आवेदन रोजगार केंद्रों में है. सबसे अधिक 65,787 आदिवासी युवाओं ने रोजगार केंद्रों में आवेदन कर रखा है.
बेरोजगारों की समस्या को लेकर राज्य सरकार गंभीर है. उनकी समस्या कैसे दूर हो, इस पर जल्द विचार होगा. सरकार बेरोजगारों का पलायन रोकना चाहती है. -सत्यानंद भोक्ता, मंत्री, श्रम विभाग
रोजगार केंद्रों में निबंधन की स्थिति
एक्सचेंज पुरुष महिला
बोकारो 23,550 25,230
बोकारो (पीएच) 2707 3290
बीटीपीएस तेनुघाट 1892 2524
इइ तेनुघाट 907 1054
डीइइ चतरा 2187 2554
डीइइ देवघर 4028 4590
धनबाद 1080 9798
सिंदरी 7729 474
कुमारडुबी 1088 298
एसटी दुमका 2007 1956
एसआइसी दुमका 3324 1403
यूइजीबी दुमका 770 259
एसइइपीएच जमशेदपुर 1585 1841
एसआरइइ जमशेदपुर 18331 4702
इइ घाटशिला 4977 999
डीइइ गढ़वा 6114 2327
डीइइ गिरिडीह 6680 942
डीइइ गोड्डा 3683 805
इइ लालमटिया 604 210
डीइइ गुमला 3562 1924
एसआरइइ हजारीबाग 6012 1022
डीइइ जामताड़ा 4342 847
डीइइ कोडरमा 2142 513
डीइइ लातेहार 2255 885
डीइइ लोहरदगा 2733 1472
डीइइ पाकुड़ 1637 719
डीइइ डाल्टेनगंज 6950 1008
एसआरइइ रांची 22,218 21
एसइइपीएच रांची 1245 576
एसइइडब्ल्यू रांची — 11,482
पीएंडइ रांची 11,089 3415
यूइजीबी रांची 364 113
डीइइ साहेबगंज 3420 737
डीइइ खरसावां 3957 1633
इइ चांडिल 2617 567
इइ आदित्यपुर 1841 321
डीइइ सिमडेगा 2488 1352
डीइइ चाईबासा 3749 1355
इइ चक्रधरपुर 1244 333
इइ किरीबुरू 4485 523
डीइइ खूंटी 2945 1838
इइ तोरपा 653 521
डीइइ रामगढ़ 6211 1434
हजारीबाग : नियोजनालय भवन की छत जर्जर
सात साल पहले बने नियोजनालय भवन की छत जर्जर है, इससे पानी रिसता है. नियोजनालय में पीने के पानी की व्यवस्था नहीं है. नियमित बिजली नहीं आती. कर्मियों की कमी है. विभाग का अपना वाहन नहीं है. इससे फील्ड विजिट में कर्मियों को परेशानी होती है. जिला नियोजन पदाधिकारी सह जिला कौशल पदाधिकारी मनोज मंजीत कहते हैं कि बेरोजगारों का पंजीयन कार्य नियमित हो रहा है.
गुमला : नियोजनालय भवन पर है एनएच विभाग का कब्जा
गुमला : गुमला जिला नियोजनालय के अधिकारी व कर्मचारियों को अपने ही भवन में बेगानों की तरह काम करना पड़ रहा है. नियोजनालय के भवन के तीन कमरों पर एनएच विभाग ने कब्जा कर रखा है.
इससे नियोजनालय में काम करनेवाले कर्मचारी व अधिकारी परेशान हैं, जबकि गुमला के नियोजनालय को मॉडल करियर सेंटर बनाया गया है, परंतु कमरों की कमी के कारण नियोजनालय के कामों के संचालन में दिक्कत हो रही है. कमरा के अभाव में नियोजनालय के कई महत्वपूर्ण दस्तावेज बाथरूम व शौचालय में रखे हैं.
कुछ सामग्री एक कोने में प्लास्टिक से ढंक कर रखा हुआ है. नियोजनालय में पुस्तकालय भी है, परंतु कमरे के अभाव में पुस्तकालय ठीक ढंग से नहीं चल रहा है. मात्र 10 लोगों के बैठने की ही व्यवस्था है. पुस्तकालय के लिए कई सामग्री की खरीद हुई है, जो बेकार पड़ी हुई है. विभाग के सुधीर कुमार झा कहते हैं कि तीन माह से पुस्तकालय की सामग्री खरीद कर रखी हुई है. कमरे में एनएच विभाग का कब्जा है. इस कारण पुस्तकालय का संचालन सही से नहीं हो रहा है.
लोहरदगा : अभावों के बीच चल रहा है नियोजनालय
लोहरदगा नियोजनालय में दो सरकारी कर्मचारी के अलावे चार आउटसोर्सिंग के स्टाफ हैं. इन्हीं के भरोसे कार्यालय चल रहा है. तमाम अभावों के बीच जिला नियोजन पदाधिकारी संदीप किस्पोट्टा बेरोजगारों का करियर काउंसिलिंग भी करते हैं. यहां एक समृद्ध पुस्तकालय है. जिला नियोजनालय द्वारा वर्ष 2018-19 में एक रोजगार मेला एवं पांच भर्ती कैंप लगा कर 324 बेरोजगारों को रोजगार उपलब्ध कराया गया. वर्ष 2019-20 में दो रोजगार मेला लगाया गया, जिसमें 319 बेरोजगारों को प्राइवेट सेक्टर में रोजगार मुहैया कराया गया.
मेदिनीनगर : कर्मियों की कमी से कार्य प्रभावित
मेदिनीनगर पलामू का जिला नियोजनालय का नया भवन बना है, लेकिन यहां कर्मियों की कमी है. लिपिक के दो पद खाली हैं. कंप्यूटर अॉपरेटर व नाइट गार्ड आउटसॉर्सिंग के हैं. आदेशपाल के भी तीन पद खाली हैं.
कुल मिला कर कहें, तो भवन बेहतर होने के बाद भी कर्मियों की कमी के कारण कार्य प्रभावित हो रहा है. यहां नियोजन पदाधिकारी संतोष कुमार हैं, जबकि वरीय सहायक पद पर सुधेश कुमार मेहता अपनी सेवा दे रहे हैं. जो आंकड़े हैं, उसके मुताबिक चार फरवरी को निबंधन कैंप का आयोजन किया गया है, इसमें शिक्षित बेरोजगारों का निबंधन किया जायेगा.
कोडरमा : जरूरी सुविधाएं हैं, पर कर्मियों का अभाव
जिला नियोजनालय कार्यालय में करीब सभी प्रकार की मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध हैं. कार्यालय में पेयजल, शौचालय, स्टडी सेंटर आदि की सुविधा है. साथ ही आगंतुकों के लिए प्रतीक्षालय की भी व्यवस्था देखने को मिली. कार्यालय में कर्मियों का अभाव है. जिला नियोजन पदाधिकारी पंकज कुमार गिरि के मुताबिक कार्यालय में एक उच्चवर्गीय लिपिक, एक निम्न लिपिक, दो अनुसेवक के पद स्वीकृत हैं. कार्यालय में जिला नियोजन पदाधिकारी के अलावा मात्र एक उच्चवर्गीय लिपिक ही कार्यरत हैं.
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