पशुपालन घोटाला : .....जब जज के सामने लालू ने जोड़े हाथ और कहा, हुजूर हमने एक पैसा नहीं लिया, हमें फंसाया गया

Updated at : 17 Jan 2020 7:36 AM (IST)
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पशुपालन घोटाला : .....जब जज के सामने लालू ने जोड़े हाथ और कहा, हुजूर हमने एक पैसा नहीं लिया, हमें फंसाया गया

रांची : पशुपालन घोटाला में डोरंडा कोषागार से 139़ 35 करोड़ रुपये की अवैध निकासी के सबसे बड़े मामले (आरसी-47 ए/ 96) में गुरुवार को सीबीआइ के विशेष न्यायाधीश एसके शशि की अदालत में पूर्व सीएम व राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद का बयान दर्ज हुआ. उनसे बयान के दौरान 34 प्रश्न पूछ गये, जिनमें अधिकतर […]

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रांची : पशुपालन घोटाला में डोरंडा कोषागार से 139़ 35 करोड़ रुपये की अवैध निकासी के सबसे बड़े मामले (आरसी-47 ए/ 96) में गुरुवार को सीबीआइ के विशेष न्यायाधीश एसके शशि की अदालत में पूर्व सीएम व राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद का बयान दर्ज हुआ. उनसे बयान के दौरान 34 प्रश्न पूछ गये, जिनमें अधिकतर आरोपों से उन्होंने इनकार किया.
बयान के अंत में उन्होंने जज के सामने हाथ जोड़ कर कहा : हुजूर हमने किसी से एक पैसा नहीं लिया, यह राजनीतिक द्वेष का केस है. कायदा कानून इतना सख्त है कि कोई भी मुख्यमंत्री ट्रेजरी ऑफिस से 10 रुपये नहीं मांग सकता है, तो हम इतना पैसा कहां से ले लेंगे.
फैसला करने के पहले फाइल जरूर देखिएगा. इस केस में कोई तालमेल नहीं है, गवाह कुछ बोल रहा है और कागज कुछ और बोल रहा है. मामले की अगली सुनवाई 20 जनवरी को होगी. अदालत ने उस दिन सभी आरोपियों को अपने पक्ष में गवाही देनेवालों की लिस्ट देने का निर्देश दिया है. इस मामले के एक आरोपी शिवनंदन प्रसाद का बयान लेना शेष है.
वह बीमार हैं और गुजरात के एक अस्पताल में भर्ती हैं.क्या है मामला आरसी-47 ए/ 96 : डोरंडा कोषागार से अवैध निकासी का यह मामाला 1990-91 से 1995-96 के बीच का है. इस मामले में सीबीआइ की ओर से 11 मार्च 1996 को प्राथमिकी दर्ज की गयी थी. इसके तहत दो बार में 170 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दायर हुआ था. पहला चार्जशीट आठ मई 2001 को 102 लोगों के खिलाफ हुआ था. वहीं, दूसरा पूरक चार्जशीट सात जून 2003 में 68 लोगाें के खिलाफ हुआ था. इसमें बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद, जगन्नाथ मिश्र, सांसद जगदीश शर्मा, आरके राणा, विद्यासागर निषाद सहित कई राज नेताओं, आइएएस और आपूर्तिकर्ताओं को आरोपी बनाया गया था.
170 में से 142 आरोपियों के खिलाफ सितंबर 2005 में चार्ज फ्रेम हुआ था. 43 आरोपियों की मृत्यु हो गयी है, जबकि दो ने अपना दोष स्वीकार कर लिया. सात सरकारी गवाह बन गये. पांच फरार हैं. वर्तमान में इस मामले में 111 अारोपी ट्रायल फेस कर रहे हैं. इस मामले में सीबीआइ की ओर से विशेष लोक अभियोजक बीएमपी सिंह व बचाव पक्ष की ओर से प्रभात कुमार पैरवी कर रहे हैं.
…और लालू को आया गुस्सा
लालू प्रसाद रिम्स से भारी सुरक्षा के बीच 10:20 बजे सीबीआइ के विशेष न्यायाधीश एसके शशि की अदालत पहुंचे. वहां कुछ देर बैठने के बाद वे लघुशंका के लिए निकले, तो उनके पीछे मीडियावाले भागने लगे.
इस पर लालू खिसिया गये, कहा : अब लैट्रिन-बाथरूम भी नहीं करने दोगे क्या भाई? लगभग 11:20 बजे सुनवाई शुरू हुई, जो 12:45 बजे तक चली. एक-एक कर उनसे 34 प्रश्न पूछे गये. अधिकतर प्रश्नों के उत्तर में अपने ऊपर लगाये गये आरोप से लालू ने इनकार किया. लालू से प्रश्न किया गया कि श्याम बिहारी सिन्हा ने आरके राणा के माध्यम से पहले पांच लाख रुपये, फिर एक लाख रुपये, फिर एक करोड़ रुपये दिये थे.
उसके बाद फिर से आरके राणा के माध्यम से आपूर्तिकर्ता विजय मल्लिक ने 10 करोड़ रुपये दिये थे. इसके उत्तर में लालू ने कहा : इसमें कोई सच्चाई नहीं है. इस संबंध में आरके राणा ही बता सकते हैं. खड़े होकर बयान देने के दौरान लालू कांप रहे थे. दोपहर 1:15 बजे लालू प्रसाद अदालत से निकल कर रिम्स के लिए रवाना हो गये.
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