स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने की हुई अनुशंसा
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :11 Jan 2020 3:06 AM (IST)
विज्ञापन

मनोज सिंह, रांची : सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंकों में हुई गड़बड़ी की जांच स्वतंत्र एजेंसी से कराने की अनुशंसा की गयी है. बैंकों में हुई गड़बड़ी की जांच कराने का प्रस्ताव रणधीर सिंह के मंत्रित्व काल में उनके पास गयी थी. श्री सिंह ने मंत्री रहते हुए चार बैंकों में गड़बड़ी की मिली शिकायत की जांच […]
विज्ञापन
मनोज सिंह, रांची : सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंकों में हुई गड़बड़ी की जांच स्वतंत्र एजेंसी से कराने की अनुशंसा की गयी है. बैंकों में हुई गड़बड़ी की जांच कराने का प्रस्ताव रणधीर सिंह के मंत्रित्व काल में उनके पास गयी थी. श्री सिंह ने मंत्री रहते हुए चार बैंकों में गड़बड़ी की मिली शिकायत की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी से कर दी गयी है.
गड़बड़ी की शिकायत मिलने के बाद सहकारिता विभाग ने इसका विशेष अंकेक्षण कराया था. इसमें प्राथमिक तौर पर गड़बड़ी की पुष्टि की गयी है. मालूम हो कि सहकारिता विभाग को सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक रांची, सरायकेला, चाईबासा और जादूगोड़ा में गड़बड़ी होने की शिकायत मिली थी. सहकारिता विभाग के तत्कालीन निबंधक ने इसकी जांच सीबीआइ से कराने का प्रस्ताव दिया था.
75 लाख के बैंक ड्राफ्ट का गबन : अंकेक्षण टीम ने 2015-16 से 2017-18 के एकाउंट सत्यापन के क्रम में पाया कि सरायकेला शाखा द्वारा निर्गत करीब 75 लाख बैंक ड्राफ्ट की निकासी बिष्टुपुर शाखा से हुई. लेकिन सरायकेला शाखा में इसकी इंट्री नहीं थी.
अंकेक्षण टीम ने लिखा है कि 75.79 लाख रुपये का फरजी ड्राफ्ट निर्गत किया गया था. अंकेक्षण टीम ने इसी तरह की गड़बड़ी अन्य शाखा में भी होने का संदेह जताया है.
32.37 लाख का खर्च संदेहास्पद
अंकेक्षण टीम ने पाया कि 2015-16 और 2016-17 में सरायकेला शाखा से विभिन्न तिथियों में करीब 32.37 लाख रुपये की निकासी हुई. इसमें 30 लाख रुपये विभिन्न सामानों के क्रय में दिखा दिया. इसकी फोटोकॉपी अंकेक्षण टीम को दी गयी.
इस क्रय को टीम ने संदेहास्पद बताया है. यह भी नहीं बताया गया कि किसके आदेश से सामानों का क्रय हुआ है. स्वीकृति आदेश अंकेक्षण टीम को नहीं दी गयी. 50 हजार या उससे अधिक का भुगतान बिना पैन नंबर के कर दिया गया.
अंकेक्षण में क्या-क्या मिली थी गड़बड़ी
अंकेक्षण टीम ने अपनी रिपोर्ट में जिक्र किया है कि द सिंहभूम सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक चाईबासा (एसडीसीसी) के अधीन 26 शाखाएं थी. सभी शाखा में दूसरी शाखा से लेन-देने के लिए मुख्यालय खाता के नाम से खाता संधारित किया जाता था.
सभी ब्रांच को मुख्यालय से अलग-अलग कोड दिया गया था. एक अप्रैल 2017 को झारखंड राज्य सहकारी बैंक रांची का गठन किया गया. इसमें अन्य सहकारी बैंकों के साथ-साथ एसडीसीसी का भी विलय कर दिया गया. डाटा मर्जर का काम एक जून 2017 तक करना था. लेकिन, इससे पूर्व तीन खाता धारकों को 4.14 करोड़ रुपये ट्रांसफर कर दिया गया.
15 करोड़ का अनियमित चेक
झारखंड राज्य सहकारी बैंक लिमिटेड रांची की ऋण नीति 2015 में बिल परचेज व डिस्काउंड का उल्लेख है. यह स्थानीय ग्राहकों को उनके साख व लेन-देन को देखते हुए कुछ समय के लिए दिया जा सकता है. इसमें पाया गया कि 15.45 करोड़ रुपये का चेक परचेज दिया गया. अंकेक्षण टीम ने बिना क्लीन चेक के इतनी बड़ी राशि के भुगतान पर संदेह जताया है.
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
विज्ञापन
लेखक के बारे में
By Prabhat Khabar Digital Desk
यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए
विज्ञापन




