रांची : रिम्स के डॉक्टर अगर प्राइवेट प्रैक्टिस करते हैं, तो सूचना दें

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रांची : रिम्स एक स्वायत्त संस्था है तथा यहां कार्यरत चिकित्सकों को रिम्स अधिनियम व नियमावली 2002 के तहत गैर व्यावसायिक भत्ता यानी एनपीए (नॉन प्रैक्टिस अलाउंस) दिया जाता है. यह इसलिए दिया जाता है कि रिम्स के चिकित्सक प्राइवेट प्रैक्टिस के चक्कर में न रहें तथा समर्पित भाव से अपनी सेवा अस्पताल में दें, […]

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रांची : रिम्स एक स्वायत्त संस्था है तथा यहां कार्यरत चिकित्सकों को रिम्स अधिनियम व नियमावली 2002 के तहत गैर व्यावसायिक भत्ता यानी एनपीए (नॉन प्रैक्टिस अलाउंस) दिया जाता है.
यह इसलिए दिया जाता है कि रिम्स के चिकित्सक प्राइवेट प्रैक्टिस के चक्कर में न रहें तथा समर्पित भाव से अपनी सेवा अस्पताल में दें, पर ऐसा नहीं हो रहा है. शिकायत मिलती रहती है कि रिम्स के डॉक्टर एनपीए लेकर भी प्राइवेट प्रैक्टिस करते हैं. इस पर रोक लगाने के लिए स्वास्थ्य विभाग के स्तर पर एक कमेटी बनायी गयी है. इसमें एक अध्यक्ष (विशेष सचिव चंद्र किशोर उरांव) सहित दो सदस्य (अनिमेष नचिकेता तथा डॉ एलेन प्रदीप बाड़ा) हैं. यदि रिम्स के चिकित्सकों की प्राइवेट प्रैक्टिस करने संबंधी जानकारी आपके पास है, तो इसकी सूचना कमेटी के अध्यक्ष के मोबाइल 9471162067 तथा सदस्यों के मोबाइल 9471615425 व 8789669877 पर दें. इसके अलावा ई-मेल hlthdept.fdi@gmail.com पर भी इसकी जानकारी दी जा सकती है. सूचना देने वालों का नाम व पता गुप्त रखा जायेगा.
मेडिकल रिसर्च यूनिट खोलने के लिए आइसीएमआर की टीम ने निरीक्षण किया. तीन साल से यूनिट खोलने का प्रयास किया जा रहा था. अब उम्मीद है कि दो माह में हम शोध कार्य शुरू कर पायेंगे. बीमारी का अत्याधुनिक इलाज संभव हो पायेगा.
डॉ दिनेश कुमार सिंह, निदेशक, रिम्स

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