खेत बचाने में महिलाएं आगे : दयामनी
Updated at : 01 Sep 2019 7:09 AM (IST)
विज्ञापन

रांची : नीदरलैंड के हेग शहर में स्थित इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल स्टडीज द्वारा ‘आदिवासियों के प्रतिदिन का जीवन : भारत से आदिवासियों की आवाज’ विषय पर सेमिनार का आयोजन हुअा, जिसमें आदिवासी प्रतिनिधि दयामनी बारला ने कहा कि आदिवासी समाज समतामूलक और सामुदायिकता पर आधारित है़ खेत में काम करने से लेकर खेत बचाने […]
विज्ञापन
रांची : नीदरलैंड के हेग शहर में स्थित इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल स्टडीज द्वारा ‘आदिवासियों के प्रतिदिन का जीवन : भारत से आदिवासियों की आवाज’ विषय पर सेमिनार का आयोजन हुअा, जिसमें आदिवासी प्रतिनिधि दयामनी बारला ने कहा कि आदिवासी समाज समतामूलक और सामुदायिकता पर आधारित है़
खेत में काम करने से लेकर खेत बचाने के आंदोलन तक में महिलाओं और पुरुषों ने बराबरी की भूमिका निभायी है़ जब ब्रिटिश हुकूमत ने आदिवासियों से उनकी जमीन का लगान मांगा, तब 1770 में प्रतिकार शुरू हुआ, जो 1900 तक अलग- अलग रूप में चला़
‘आदिवासियों की जमीन पर सरकार और माओवादी’ विषय पर एक्टिविस्ट ग्लैडसन डुंगडुंग ने कहा कि सरकार व माओवादियों के बीच संघर्ष में नुकसान आदिवासियों का हुआ है़ इसमें मारे गये ज्यादातर पुलिसकर्मी, आम आदमी और नक्सली आदिवासी ही हैं.
नक्सली आंदोलन की शुरुआत के दौर में उन्होंने आदिवासियों के हक की रक्षा के लिए कुछ काम जरूर किया, लेकिन इस आंदोलन की वजह से आज आदिवासियों के लोकतांत्रिक आंदोलनों को भी नक्सली आंदोलन बताकर सरकार कहर बरपाती है़ सेमिनार में बिजू टोप्पो द्वारा निर्देशित डॉक्यूमेंटरी फिल्म ‘प्रतिकार’ और ‘द हंट’ की स्क्रीनिंग भी हुई़ इसमें विश्वविद्यालय के शिक्षक और शोधार्थी शामिल हुए़
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
विज्ञापन
लेखक के बारे में
By Prabhat Khabar Digital Desk
यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।
Tags
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए
विज्ञापन




