रांची : चार साल से अपने ड्रीम हाउस के लिए खा रहे दर-दर की ठोकरें
Updated at : 02 Aug 2019 6:31 AM (IST)
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ड्रीम सिटी. खेलगांव-गाड़ीगांव के मुहाने पर बने अपार्टमेंट में बिल्डर और जमीन मालिक के बीच चल रहा विवाद रांची : राजधानी में बड़ी तादाद में प्रोजेक्ट अधूरे या निर्माणाधीन हैं. वहीं, कई लोगों को अब भी अपने घर का इंतजार है. रांची में दर्जनों इमारतें कागजों में बनाकर बिल्डरों ने कई करोड़ रुपये हजम कर […]
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ड्रीम सिटी. खेलगांव-गाड़ीगांव के मुहाने पर बने अपार्टमेंट में बिल्डर और जमीन मालिक के बीच चल रहा विवाद
रांची : राजधानी में बड़ी तादाद में प्रोजेक्ट अधूरे या निर्माणाधीन हैं. वहीं, कई लोगों को अब भी अपने घर का इंतजार है. रांची में दर्जनों इमारतें कागजों में बनाकर बिल्डरों ने कई करोड़ रुपये हजम कर लिए. इनके रसूख के आगे सरकारी दावे, नियम और अधिनियम दम तोड़ देते हैं. खेलगांव-गाड़ीगांव के मुहाने पर बने अपार्टमेंट ड्रीम सिटी की कहानी बिल्डरों के इस खेल को बखूबी समझाती है.
बिल्डर मनोज पांडेय ने ड्रीम सिटी के तहत जी प्लस फोर कैटेगरी में दो ब्लॉक-ए में 16 और ब्लॉक-बी में 20 फ्लैट बनाये. तय मसौदे के तहत कुछ फ्लैट जमीन मालिक नितेंद्र पांडेय को दिये जाने थे.
इधर, बिल्डर ने एक-एक कर फ्लैट अपने ग्राहकों को बेच डाले, लेकिन जमीन मालिक को उसका हिस्सा नहीं दिया गया. आज हालत यह है कि ड्रीम सीटी में रहनेवाले लोगों के सपने बिल्डर और जमीन मालिक के विवाद में पिस कर रह गये हैं.
चार साल से अधिक समय बीत गया, तकरीबन दो दर्जन लोग आज भी अपने आशियाने के इंतजार में है. इनमें से करीब 10 से 15 लोग अपने फ्लैट की वास्तविक कीमत से अधिक पैसे दे चुके हैं. इन लोगों का ज्यादातर वक्त धरना-प्रदर्शन करने, ज्ञापन देने और बिल्डर व जमीन मालिक के चक्कर काटने में बीत रहा है.
2014 में शुरू हुआ था प्रोजेक्ट
परियोजना लगभग एक एकड़ जमीन पर साल 20014 में ही शुरू हुई थी. कई नौकरीपेशा दंपती ने शुरू में ही फ्लैट के लिए बिल्डर के साथ एकरारनामा किया.
आइडीबीआइ बैंक ने प्रोजेक्ट की शुरुआती पड़ताल की और इसे अप्रूव कर दिया. फ्लैट मालिकों ने गृह प्रवेश की और अपने घर में रहने आ गये, लेकिन अगले ही दिन बिल्डर व जमीन मालिक के बीच विवाद सामने आ आया. इसके बाद जमीन मालिक ने लोगों से उनके घर खाली करा लिये. ड्रीम सिटी के लोगों का कहना है कि बिल्डर पर रुपयों के गबन और प्रोजेक्ट पूरा नहीं करने संबंधित विभिन्न मामले थाने में दर्ज हैं.
कहां-कहां है विवाद
बिल्डर ने बेघर लोगों को ब्लॉक बी में यह कहते हुए शिफ्ट कर दिया कि जल्द ही काम पूरा कर उन्हें इसे उपलब्ध करा दिया जायेगा. तब का दिन और आज का दिन लोग इन दोनों के विवाद में बी-ब्लॉक में रहने को मजबूर हैं.
ब्लॉक-बी के असली मालिक अब इन सभी पर अपने फ्लैट को खाली करने का दबाव बना रहे हैं. आये दिन घर खाली करने को लेकर लड़ाई होती है. हाल यह है कि तीनों पक्ष आपस में एक-दूसरे से मुकदमा लड़ रहे हैं. मामला कोर्ट में है और लोग अब भी अपने-अपने फ्लैट में रहने की उम्मीद की डोर से लटके हैं.
बिल्डर ने नहीं उठाया फोन : इस संबंध में बिल्डर मनोज पांडेय के मोबाइल नंबर 9431100068 पर कई बार फोन किया गया. लेकिन बिल्डर ने फोन नहीं उठाया.
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