रांची : तीन साल में भी वृद्धाश्रम का काम शुरू नहीं
Updated at : 21 Jul 2019 9:36 AM (IST)
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कांके में 15 अगस्त 2016 को किया गया था शिलान्यास रांची : राज्य सरकार की ओर पूरे प्रदेश में सिर्फ सात सीनियर सिटीजन होम (वृद्धाश्रम) का संचालन किया जा रहा है. वहीं पांच वृद्धाश्रम बनाये जाने हैं. पर यह कब बनेंगे, कहना मुश्किल है. समाज कल्याण विभाग की वित्तीय सहायता से रांची के हटिया में […]
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कांके में 15 अगस्त 2016 को किया गया था शिलान्यास
रांची : राज्य सरकार की ओर पूरे प्रदेश में सिर्फ सात सीनियर सिटीजन होम (वृद्धाश्रम) का संचालन किया जा रहा है. वहीं पांच वृद्धाश्रम बनाये जाने हैं.
पर यह कब बनेंगे, कहना मुश्किल है. समाज कल्याण विभाग की वित्तीय सहायता से रांची के हटिया में महिलाओं के लिए एक सीनियर सिटीजन होम (अपना घर) संचालित है. यह भवन निजी है. इधर, रांची के चिरौंदी (कांके) में 2016 में मॉडल सीनियर सिटीजन होम का शिलान्यास सरकार ने वेदनारायण गौर (102 वर्ष) के हाथों कराया था. पर यहां अब तक एक ईंट भी नहीं जोड़ी गयी है.
झारखंड हाइकोर्ट में दायर एक जनहित याचिका की सुनवाई के बाद कोर्ट के निर्देश पर 15 अगस्त 2016 को इस होम का शिलान्यास हुआ था. कुल 50 बेड वाले इस होम को 3.82 करोड़ की लागत से 13 माह में बन जाने की बात सरकार ने कही थी, पर 36 महीने बाद भी काम शुरू नहीं हो सका है. दरअसल राज्य भर में वृद्धा आश्रम की संख्या अपर्याप्त है. निजी वृद्धाश्रम हैं, पर वहां रहने के लिए हर माह दो से चार हजार रुपये देने पड़ते हैं. एक साधारण या गरीब पृष्ठभूमि के बुजुर्ग के लिए यह खर्च उठाना मुश्किल है.
सरकारी वृद्धाश्रम
संचालित : रांची, धनबाद, गिरिडीह, हजारीबाग, देवघर तथा प.सिंहभूम
जहां बनने हैं : रांची (कांके), सिमडेगा, गढ़वा, बोकारो व लोहरदगा.
(सरकार के सीनियर सिटीजन होम का संचालन गैर सरकारी संस्थाओं के माध्यम से हो रहा है)
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