रांची : प्राचीन या मध्यकालीन इतिहास की डिग्री को इतिहास माना जायेगा या नहीं : हाइकोर्ट
Updated at : 28 Jun 2019 9:20 AM (IST)
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यूजीसी को दो सप्ताह में लिखित रूप से स्थिति स्पष्ट करने का निर्देश मामला स्नातकोत्तर व हाइस्कूल शिक्षक नियुक्ति का सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रखा रांची : झारखंड हाइकोर्ट के जस्टिस डॉ एसएन पाठक की अदालत में गुरुवार को संयुक्त स्नातक स्तरीय शिक्षक प्रतियोगिता परीक्षा के तहत इतिहास-नागरिक शास्त्र विषय […]
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यूजीसी को दो सप्ताह में लिखित रूप से स्थिति स्पष्ट करने का निर्देश
मामला स्नातकोत्तर व हाइस्कूल शिक्षक नियुक्ति का
सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रखा
रांची : झारखंड हाइकोर्ट के जस्टिस डॉ एसएन पाठक की अदालत में गुरुवार को संयुक्त स्नातक स्तरीय शिक्षक प्रतियोगिता परीक्षा के तहत इतिहास-नागरिक शास्त्र विषय को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई हुई.
अदालत ने मामले की सुनवाई करते हुए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) से जानना चाहा कि प्राचीन या मध्यकालीन इतिहास पढ़ कर डिग्री लेनेवाले विद्यार्थियों को इतिहास स्नातक या इतिहास स्नातकोत्तर माना जायेगा या नहीं. यूजीसी को दो सप्ताह के अंदर लिखित रूप से अपना विचार प्रस्तुत करने का निर्देश दिया. अदालत ने विवि एक्सपर्ट कमेटी की रिपोर्ट भी देखी. सभी पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया.
इससे पूर्व प्रार्थी की अोर से वरीय अधिवक्ता आरएन सहाय ने अदालत को बताया कि प्राचीन या मध्यकालीन इतिहास पढ़ कर डिग्री लेनेवाले भी इतिहास से स्नातक व स्नातकोत्तर हैं. विज्ञापन में इतिहास विषय का जिक्र है.
उनकी उम्मीदवारी को झारखंड कर्मचारी चयन आयोग द्वारा रद्द किया जाना उचित नहीं है. वहीं झारखंड कर्मचारी चयन आयोग की अोर से अधिवक्ता संजय पिपरवाल व हस्तक्षेपकर्ता की अोर से अधिवक्ता नागमणि तिवारी ने पक्ष रखा. उल्लेखनीय है कि प्रार्थी अशोक कुमार द्विवेदी व अन्य की अोर से याचिका दायर कर हाइस्कूल शिक्षक प्रतियोगिता परीक्षा के मामले में झारखंड कर्मचारी चयन आयोग के फैसले को चुनाैती दी गयी है.
वहीं संतोष कुमार यादव व अन्य की अोर से दायर याचिका में स्नातकोत्तर प्रशिक्षित शिक्षक (पीजीटी) प्रतियोगिता परीक्षा में आयोग के फैसले को चुनाैती दी गयी है. कहा गया कि प्राचीन या मध्यकालीन इतिहास से स्नातक की डिग्री लेनेवाले अभ्यर्थी भी इतिहास विषय से स्नातक हैं, जबकि आयोग का कहना है कि संपूर्ण इतिहास पढ़ कर डिग्री लेनेवाले अभ्यर्थी ही टीजीटी व पीजीटी शिक्षक प्रतियोगिता परीक्षा के लिए योग्य अभ्यर्थी माने गये हैं
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