सरकारी जमीन का लगान दिये बिना निकाला जा रहा है कोयला, कोल कंपनियां नहीं दे रही लीज बंदोबस्ती के 33,214 करोड़
Updated at : 07 Jun 2019 7:07 AM (IST)
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विवेक चंद्र रांची : कोल कंपनियां झारखंड में सरकारी जमीन का लगान दिये बिना कोयला निकाल रही हैं. राज्य के 10 जिलों में 50,381 एकड़ से अधिक सरकारी जमीन की खुदाई कर कंपनियां कोयला निकाल रही हैं. लेकिन, ऐसी कंपनियों में शामिल सीसीएल, बीसीसीएल और इसीएल ने जमीन की लीज बंदोबस्ती के एवज में सरकारी […]
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विवेक चंद्र
रांची : कोल कंपनियां झारखंड में सरकारी जमीन का लगान दिये बिना कोयला निकाल रही हैं. राज्य के 10 जिलों में 50,381 एकड़ से अधिक सरकारी जमीन की खुदाई कर कंपनियां कोयला निकाल रही हैं. लेकिन, ऐसी कंपनियों में शामिल सीसीएल, बीसीसीएल और इसीएल ने जमीन की लीज बंदोबस्ती के एवज में सरकारी खजाने में एक रुपये भी जमा नहीं कराया है.
तीनों कोल कंपनियों द्वारा उपयोग में लायी जा रही सरकारी भूमि की सलामी, लगान और सेस मद में 33,214 करोड़ रुपये से ज्यादा बकाया हो गया है. राज्य सरकार ने 29 वर्षों के लगान और सेस के आधार पर बकाया राशि की गणना की है.
बंगाल व ओड़िसा सरकार को किया भुगतान : कोयला कंपनियों ने पश्चिम बंगाल और ओड़िसा में उपयोग की जा रही सरकारी भूमि की लीज बंदोबस्ती के एवज में पूरा भुगतान किया है. लेकिन, झारखंड सरकार द्वारा बार-बार आग्रह किये जाने के बावजूद अब तक इन कंपनियां ने राशि जमा कराने के प्रति गंभीरता नहीं दिखायी है. राज्य सरकार ने नीति आयोग से मामले में हस्तक्षेप कर कोल इंडिया की अनुषंगी इकाइयों से भुगतान सुनिश्चित कराने का आग्रह किया है.
50,381 एकड़ से अधिक सरकारी जमीन की खुदाई कर निकाला जा रहा है कोयला 10 जिलों में
लीज बंदोबस्ती के एवज में अब तक झारखंड सरकार को एक पैसा भी नहीं दिया कोल कंपनियों ने
60% कोयले का उत्पादन झारखंड सेदेश के 60% कोयले का उत्पादन झारखंड से होता है. राज्य में काम करने वाली तीनों कोल कंपनियां सीसीएल, बीसीसीएल और इसीएल रैयती जमीन का इस्तेमाल कोयला निकालने के लिए करती है. प्रभावित परिवार को मुआवजा व नौकरी भी देती हैं. दूसरी ओर 50,000 एकड़ से अधिक सरकारी गैरमजरूआ जमीन के इस्तेमाल के बदले राजस्व अदा करने में कंजूसी कर रही हैं.
सीसीएल सबसे बड़ा बकायेदार
जमीन की लीज बंदोबस्ती के मामले में सीसीएल राज्य सरकार का सबसे बड़ा बकायेदार है. सीसीएल की देय राशि 26,000 करोड़ से अधिक है.
वहीं, बीसीसीएल पर लगभग 5,500 और इसीएल पर करीब 1,600 करोड़ रुपये बकाया है. लीज बंदोबस्ती की राशि जमा कराने के लिए भू-राजस्व विभाग कई बार कोल कंपनियों को नोटिस जारी कर चुका है. हालांकि, कोयला कंपनियां ने अब तक कोई कदम नहीं उठाया है. मालूम हो कि राज्य के बोकारो, चतरा, देवघर, धनबाद, गोड्डा, हजारीबाग, लातेहार, रामगढ़, रांची और गिरिडीह में कंपनियां सरकारी जमीन से कोयला निकाल रही हैं.
यहां कंपनियां निकाल रही हैं कोयला
स्थान जमीन (एकड़ में)
चंदनकियारी 547.69
गोमिया और बेरमो 8840.78
टंडवा 5765.59
सारठ, पालाजोरी 315.00
बाघमारा, धनबाद 5957.11
निरसा, झरिया
निरसा 1731.43
गोड्डा 5651.20
उरीमारी, पोटंगा 1362.12
स्थान जमीन (एकड़ में)
गिद्दी, रेलीगढ़ा, चरही,
असवा, उरीमारी, पोटंगा,
आंगो, जरजरा 5058.54
तेतरिया खाड़ 154.00
रजरप्पा, अरगड्डा 11642.04
चरही, बरकासयाल
खलारी 642.11
गिरिडीह 2713.12
कुल 50381.73
कंपनी जमीन(एकड़ में) कुल राशि (करोड़ में)
सीसीएल 36,179.3 26,132.2048
बीसीसीएल 6,504.8 5,489.1
इसीएल 7,697.63 1,593.76592
कुल 50,381.73 33,214.964
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