अनुराग गुप्ता को नहीं मिली हाइकोर्ट से राहत

Updated at : 04 May 2019 1:40 AM (IST)
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अनुराग गुप्ता को नहीं मिली हाइकोर्ट से राहत

रांची : झारखंड हाइकोर्ट ने एडीजी अनुराग गुप्ता की याचिका को खारिज करते हुए भारत निर्वाचन आयोग के आदेश को बरकरार रखा है. कहा कि चुनाव आयोग के आदेश से माैलिक अधिकारों का कोई हनन नहीं होता है. चुनाव आयोग को अधिकार है कि वह निष्पक्ष चुनाव संपन्न कराने के लिए किसी अफसर को कहीं […]

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रांची : झारखंड हाइकोर्ट ने एडीजी अनुराग गुप्ता की याचिका को खारिज करते हुए भारत निर्वाचन आयोग के आदेश को बरकरार रखा है. कहा कि चुनाव आयोग के आदेश से माैलिक अधिकारों का कोई हनन नहीं होता है. चुनाव आयोग को अधिकार है कि वह निष्पक्ष चुनाव संपन्न कराने के लिए किसी अफसर को कहीं भी पदस्थापित कर सकता है.

प्रार्थी के खिलाफ आपराधिक केस चल रहा है, साथ ही विभागीय कार्यवाही भी लंबित है. यह पिछले राज्यसभा चुनाव से संबंधित है. वैसी स्थिति में एक राजनीतिक दल (झामुमो) की शिकायत पर चुनाव आयोग ने आदेश पारित किया है. प्रतिबंध सीमित समय (चुनाव प्रक्रिया पूरी होने तक) के लिए है.
हालांकि छुट्टी के मामले में कोर्ट ने यह माना है कि किसी अधिकारी की छुट्टी उसकी सेवा शर्त में निहित है, पर छुट्टी मिलना या नहीं मिलना नियोक्ता पर निर्भर है. छुट्टी मांगना अधिकार नहीं है. यदि वह छुट्टी का आवेदन देते हैं, तो चुनाव आयोग उस पर उचित निर्णय लेगा. शुक्रवार को जस्टिस आनंद सेन की अदालत ने उक्त फैसला सुनाया.
सुरक्षित रखा था फैसला: पूर्व में 26 अप्रैल को सभी पक्षों की बहस पूरी होने के बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था. इससे पूर्व सुनवाई के दाैरान प्रार्थी की अोर से अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा ने संविधान व सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों का उदाहरण देते हुए माैलिक अधिकारों की रक्षा करने का आग्रह किया था. चुनाव आयोग के आदेश व राज्य सरकार की अधिसूचना से उनके माैलिक अधिकारों का हनन होता है.
संविधान ने जो हमें माैलिक अधिकार दिया है, उससे उन्हें वंचित नहीं किया जा सकता है. वहीं चुनाव आयोग की अोर से अधिवक्ता डॉ अशोक कुमार सिंह ने प्रार्थी की दलील का विरोध करते हुए आयोग के आदेश को सही बताया था. निष्पक्ष व सुरक्षित चुनाव सुनिश्चित करना आयोग का दायित्व है. विपक्षी दलों ने प्रार्थी के खिलाफ शिकायत की थी.
राज्यसभा चुनाव को प्रभावित करने के आरोप में उनके खिलाफ आपराधिक मामला भी दर्ज है. आयोग के आदेश से माैलिक अधिकारों का हनन नहीं होता है. उल्लेखनीय है कि प्रार्थी एडीजी अनुराग गुप्ता ने याचिका दायर की है. उन्होंने चुनाव आयोग द्वारा एक अप्रैल 2019 को दिये गये आदेश को चुनाैती दी थी.
प्रार्थी का कहना था कि चुनाव आयोग का आदेश उनके माैलिक अधिकारों का हनन करता है. आदेश में कहा गया है कि अविलंब दिल्ली के झारखंड भवन में योगदान दें तथा चुनाव प्रक्रिया पूरी होने तक किसी भी परिस्थिति में (बिना अनुमति) झारखंड नहीं लाैटेंगे.
अायोग के आदेश के आलोक में राज्य सरकार ने अधिसूचना जारी कर अनुराग गुप्ता को दिल्ली स्थित झारखंड भवन में योगदान देने का निर्देश दिया था.
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