आधी रांची नहीं जानती कि किस भाव बिक रहा है चावल, जान जाएगी तो भागकर पहुंचेगी पंडरा मंडी
मंडी में बिक्री के लिए सजे चावल, दाल और सब्जियां.
Ranchi News: रांची के एपीएमसी पंडरा द्वारा जारी 17 जून 2026 की रिपोर्ट के अनुसार चावल, दाल, खाद्य तेल और अन्य आवश्यक वस्तुओं के दाम फिलहाल स्थिर हैं. खुदरा और थोक बाजार में कीमतों में मामूली अंतर देखा गया है, जबकि उपभोक्ताओं के लिए बाजार की स्थिति फिलहाल राहत भरी बनी हुई है. इससे जुड़ी खबर नीचे पढ़ें.
रांची से राजकुमार लाल की रिपोर्ट
Ranchi News: झारखंड की राजधानी रांची के खुदरा और थोक बाजार में चावल की कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है. कृषि उत्पादन बाजार समिति (एपीएमसी) पंडरा की ओर से 17 जून 2026 को रिपोर्ट जारी की गई है. एपीएमसी की रिपोर्ट के अनुसार, रोजमर्रा की अधिकांश वस्तुओं के दाम स्थिर बने हुए हैं. हालांकि, खुदरा और थोक बाजार में कई उत्पादों की कीमतों में बड़ा अंतर देखने को मिला.
खुदरा बाजार में लखीभोग चावल सबसे महंगा
पीएमसी पोर्टल पर दर्ज आंकड़ों के मुताबिक खुदरा बाजार में लखीभोग चावल की कीमत 55 रुपये प्रति किलो रही. वहीं परिमल चावल 38 रुपये और मंसूरी चावल 35 रुपये प्रति किलो के भाव से बिक रहा है. तीनों किस्मों का औसत खुदरा मूल्य 42.67 रुपये प्रति किलो दर्ज किया गया. इसके मुकाबले थोक बाजार में लखीभोग चावल 49.50 रुपये प्रति किलो, परिमल 34 रुपये और मंसूरी 31 रुपये प्रति किलो दर्ज किया गया. थोक बाजार में चावल का औसत मूल्य 38.17 रुपये प्रति किलो रहा.
दालों के दाम में ज्यादा बदलाव नहीं
दैनिक आवश्यक वस्तुओं की रिपोर्ट के अनुसार चना दाल, अरहर दाल, उड़द दाल, मूंग दाल और मसूर दाल के दाम सामान्य स्तर पर बने हुए हैं. बाजार में इन वस्तुओं की उपलब्धता पर्याप्त होने के कारण कीमतों में कोई उल्लेखनीय उतार-चढ़ाव नहीं देखा गया. विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल आपूर्ति की स्थिति बेहतर रहने से दालों के दाम नियंत्रित हैं. हालांकि मानसून की स्थिति और परिवहन लागत आने वाले दिनों में कीमतों को प्रभावित कर सकती है.
खाद्य तेलों की कीमतें भी स्थिर
रिपोर्ट में मूंगफली तेल, सरसों तेल, वनस्पति तेल, सोया तेल, सूरजमुखी तेल और पाम तेल के मूल्य भी शामिल किए गए हैं. इन उत्पादों के दाम में फिलहाल कोई बड़ा बदलाव दर्ज नहीं किया गया है. खुदरा और थोक बाजार में तेलों की कीमतों में कुछ अंतर जरूर है, लेकिन कुल मिलाकर बाजार में स्थिरता बनी हुई है. यह उपभोक्ताओं के लिए राहत की बात मानी जा रही है.
सब्जियों और अन्य खाद्य पदार्थों की उपलब्धता बरकरार
एपीएमसी के आंकड़ों के अनुसार आलू, प्याज और अन्य आवश्यक खाद्य पदार्थों की आपूर्ति सामान्य बनी हुई है. मंडी में सब्जियों की आवक नियमित रूप से हो रही है, जिससे कीमतों पर दबाव नहीं बढ़ा है. व्यापारियों के अनुसार, मौसम अनुकूल रहने और आपूर्ति श्रृंखला सुचारु होने के कारण बाजार में फिलहाल किसी तरह की कमी नहीं है. इसी वजह से उपभोक्ताओं को आवश्यक वस्तुएं सामान्य कीमतों पर उपलब्ध हो रही हैं.
खुदरा और थोक बाजार में कीमतों का अंतर स्वाभाविक
रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से देखा गया कि थोक बाजार की तुलना में खुदरा बाजार में कीमतें अधिक हैं. इसका कारण परिवहन खर्च, भंडारण, पैकेजिंग और खुदरा विक्रेताओं का मार्जिन माना जाता है. विशेष रूप से चावल की तीन प्रमुख किस्मों में खुदरा और थोक बाजार के बीच चार से छह रुपये प्रति किलो तक का अंतर दर्ज किया गया. इससे साफ है कि बड़ी मात्रा में खरीद करने वाले व्यापारियों को कम कीमत का लाभ मिलता है, जबकि अंतिम उपभोक्ता तक पहुंचते-पहुंचते वही उत्पाद महंगा हो जाता है.
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नियंत्रण में हैं कीमतें
रिपोर्ट के अनुसार, रांची और आसपास के इलाकों में आवश्यक खाद्य वस्तुओं की कीमतें फिलहाल नियंत्रण में हैं. चावल, दाल, खाद्य तेल और अन्य दैनिक उपयोग की वस्तुओं के दाम स्थिर बने हुए हैं. यदि आने वाले दिनों में मौसम और आपूर्ति व्यवस्था सामान्य रहती है, तो बाजार में कीमतों में बड़ी बढ़ोतरी की संभावना कम दिखाई देती है. फिलहाल रसोई का बजट किसी आपदा प्रबंधन योजना जैसा नहीं लग रहा, जो अपने आप में एक छोटी लेकिन महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा सकती है.
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By KumarVishwat Sen
कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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