रांची : फाइलेरिया की तीसरी दवा के प्रभाव का मूल्यांकन करेगा पीएसएम विभाग
Updated at : 19 Apr 2019 9:06 AM (IST)
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रांची : केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने फाइलेरिया की बीमारी की रोकथाम के लिए तीसरी दवा के रूप में आइवर मैक्टीन को शामिल किया गया है. देश के चार राज्यों में पायलट प्रोजेक्ट के तहत इस दवा को नि:शुल्क खिलाया जा रहा है, जिसमें झारखंड भी शामिल है. साथ ही इसका मूल्यांकन भी किया जा रहा […]
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रांची : केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने फाइलेरिया की बीमारी की रोकथाम के लिए तीसरी दवा के रूप में आइवर मैक्टीन को शामिल किया गया है. देश के चार राज्यों में पायलट प्रोजेक्ट के तहत इस दवा को नि:शुल्क खिलाया जा रहा है, जिसमें झारखंड भी शामिल है. साथ ही इसका मूल्यांकन भी किया जा रहा है कि यह दवा कितनी कारगर है. झारखंड में इस दवा के मूल्यांकन की जिम्मेदारी रिम्स के प्रिवेंसिव एंड कम्युनिटिव मेडिसिन (पीएसएम) विभाग को दी गयी है.
विभाग की टीम दवा खानेवाले लोगों का स्वास्थ्य की मॉनिटरिंग कर रिपोर्ट तैयार करेगी, जिसे केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को भेजा जायेगा. रिम्स के अधीक्षक सह पीएसएम के विभागाध्यक्ष डॉ विवेक कश्यप ने बताया कि पायलेट प्रोजेक्ट के रूप में दवा के प्रयोग के लिए राजस्थान के अलवर, महाराष्ट्र के नागपुर, बिहार के पटना और झारखंड के सिमडेगा को चुना गया है. प्रोजेक्ट का कार्य 18 अप्रैल को पूरा हो गया है. इसके बाद इसका मूल्यांकन का कार्य शुरू किया जायेगा.
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