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रांची : नियमावली की आस में दो साल से लटका है शिक्षकों का स्थानांतरण

Updated at : 18 Mar 2019 9:31 AM (IST)
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रांची : नियमावली की आस में दो साल से लटका है शिक्षकों का स्थानांतरण

रांची : राज्य में शिक्षकों के गृह जिला में स्थानांतरण का मामला दो साल से नियमावली की आस में लटका हुआ है. स्कूली शिक्षा व साक्षरता विभाग ने वर्ष 2017 में राज्य के शिक्षकों के स्थानांतरण के लिए नयी नियमावली बनाने की प्रक्रिया शुरू की थी. नियमावली का प्रारूप जारी कर शिक्षक संगठन व शिक्षकों […]

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रांची : राज्य में शिक्षकों के गृह जिला में स्थानांतरण का मामला दो साल से नियमावली की आस में लटका हुआ है. स्कूली शिक्षा व साक्षरता विभाग ने वर्ष 2017 में राज्य के शिक्षकों के स्थानांतरण के लिए नयी नियमावली बनाने की प्रक्रिया शुरू की थी.
नियमावली का प्रारूप जारी कर शिक्षक संगठन व शिक्षकों से इस पर राय भी मांगी गयी थी. शिक्षक संगठनों ने नियमावली पर अपनी राय से विभाग को अवगत भी करा दिया था. इसके बाद नियमावली को वित्त विभाग की सहमति के लिए भेजा गया था. वित्त विभाग ने कुछ शर्तों के साथ नियमावली को स्वीकृति दे दी थी, लेकिन इसके बाद की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई.
स्थानांतरण नियमावली नहीं बनने के कारण राज्य के प्राथमिक व मध्य विद्यालयों में नियुक्त लगभग सात हजार शिक्षकों के अंतर जिला स्थानांतरण का मामला लटका हुआ है. राज्य में वर्ष 2015-16 में प्राथमिक व मध्य विद्यालयों में हुई शिक्षक नियुक्ति में एक अभ्यर्थी को एक से अधिक जिला में आवेदन जमा करने का अवसर दिया गया था. एकअभ्यर्थी का नाम एक से अधिक जिला के मेरिट लिस्ट में आया था. सभी जिलों में एक दिन एक साथ काउंसेलिंग नहीं हुई थी.
इस कारण जिस जिला में पहले काउंसेलिंग हुई, उसमें शामिल हो गये. ऐसे में अभ्यर्थी गृह जिला से बाहर नियुक्त हो गये. राज्य के प्राथमिक व मध्य विद्यालय के शिक्षक जिला कैडर में आते हैं. शिक्षकों का कैडर जिला होने के बाद भी लगभग सात हजार शिक्षक अपने जिला से बाहर कार्यरत हैं. नियमावली बनने से इन शिक्षकों को अपने जिला में जाने का मौका मिलता.
ऐसे होना था शिक्षकों का स्थानांतरण : नियमावली में शिक्षकों के स्थानांतरण के लिए जिला को छह जोन में बांटने का प्रावधान किया गया था. शिक्षक एक जोन में अधिकतम तीन स्कूल में पोस्टिंग का विकल्प दे सकते थे.
शेष तीन विकल्प उन्हें अलग-अलग जोन में देना होता. उपलब्ध रिक्ति के आधार पर दिये गये विकल्प को प्राथमिकता देते हुए मनपसंद स्कूल में शिक्षकों का स्थानांतरण करने का प्रावधान नियमावली में किया गया है.
नियमावली बनाने का उद्देश्य : नियमावली बनाने का मुख्य उद्देश्य विद्यालयों में शैक्षणिक माहौल को और बेहतर करना बताया गया था, ताकि बच्चों को गुणवत्तायुक्त शिक्षा मिल सके. राज्य में शिक्षक स्थानांतरण को लेकर जिला शिक्षा से लेकर राज्य मुख्यालय तक का चक्कर लगाते रहते हैं.
इससे पठन-पाठन पर प्रतिकूल असर पड़ता है. स्थानांतरण नीति लागू होने से शिक्षकों के स्थानांतरण में पारदर्शिता आयेगी. शिक्षक अपने मनपसंद स्कूल में पोस्टिंग पा सकेंगे.
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