रांची : सदन में विधायकों की संख्या दो-तिहाई से ज्यादा होना बना विलय का आधार

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 22 Feb 2019 9:23 AM

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31 पन्ने में आया है स्पीकर का फैसला, वादी-प्रतिवादी को कॉपी मिली रांची : दलबदल मामले में झाविमो के आठ में से छह विधायकों के भाजपा में शामिल होने के मामले में यह संख्या दो तिहाई से ज्यादा होने की स्थिति विलय का आधार बना है़ स्पीकर दिनेश उरांव के न्यायाधिकरण ने संख्या बल के […]

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31 पन्ने में आया है स्पीकर का फैसला, वादी-प्रतिवादी को कॉपी मिली
रांची : दलबदल मामले में झाविमो के आठ में से छह विधायकों के भाजपा में शामिल होने के मामले में यह संख्या दो तिहाई से ज्यादा होने की स्थिति विलय का आधार बना है़ स्पीकर दिनेश उरांव के न्यायाधिकरण ने संख्या बल के आधार पर ही छह सदस्यों की विधानसभा से सदस्यता खारिज नहीं करने का फैसला सुनाया है़ कुल 31 पन्ने में स्पीकर का फैसला आया है़ इसमें वादी-प्रतिवादी के द्वारा रखे गये तथ्यों को विस्तार से बताया है़
इसके साथ ही किन तथ्यों के आधार पर अपने निर्णय पर पहुंचे हैं, उसका उल्लेख है़ स्पीकर ने फैसले में कहा है कि सभा के अंदर की स्थिति देखने का अधिकार है़ सभा के अंदर विलय नियम-कानून व संवैधानिक है या नहीं, इसे देखना है़ सदन के अंदर झाविमो से भाजपा में जानेवाले विधायक दो तिहाई से ज्यादा है़ं ऐसी स्थिति में सदन के अंदर इनका विलय माना जायेगा़ सदन के बाहर पार्टी की क्या स्थिति है, यह स्पीकर के क्षेत्राधिकार से बाहर का मामला है़
अपने फैसले में यह भी कहा है कि संवैधानिक प्रावधान और दलबदल की स्थिति का आकलन करते हुए फैसला सुनाया है़ बाबूलाल मरांडी व प्रदीप यादव की ओर से सुनवाई के दौरान यह तथ्य रखा गया था कि पार्टी संविधान के तहत विलय नहीं हुआ है़ पार्टी के केंद्रीय समिति के सदस्यों ने विलय नहीं किया है़ ऐसी परिस्थिति में ये छह विधायक पार्टी छोड़ कर गये हैं, इनका विलय नहीं हुआ है़ स्पीकर ने झाविमो की ओर से दिये गये इस दलील को अमान्य करार दिया है़ स्पीकर का कहना है कि वह पार्टी के संवैधानिक प्रावधान को नहीं, बल्कि दलबदल के संवैधानिक प्रावधान को देखेंगे़
फैसले में 10वीं अनुसूची की धारा चार (दो ) को बनाया आधार :स्पीकर ने 10वीं अनुसूची की धारा चार (दो ) को निर्णय का आधार बनाया है़ इसमें कहा गया है कि किसी राजनीतिक दल के दो तिहाई से ज्यादा सदस्य दूसरी पार्टी में शामिल हो जाते हैं, तो उसे विलय समझा जाये़ 10वीं अनुसूची की धारा चार (एक) और (दो ) में उन परिस्थितियों का जिक्र है, जिसमें किसी विधानमंडल के सदस्यों की सदस्यता नहीं जायेगी़ इसमें उन शर्तों का उल्लेख किया गया है़ स्पीकर ने इन्हीं शर्तों का उल्लेख करते हुए छह विधायकों की सदस्यता रद्द नहीं की़
गुवाहाटी हाइकोर्ट के फैसले का जिक्र किया : स्पीकर ने अपने निर्णय में गुवाहाटी हाईकोर्ट के फैसले का भी जिक्र किया है़ गुवाहाटी हाइकोर्ट ने दलबदल के एक मामले में फैसला सुनाया था कि सदन के अंदर किसी पार्टी के दो तिहाई से ज्यादा सदस्य दूसरी पार्टी में शामिल हो जाते हैं, तो वह विलय ही समझा जायेगा़ सदस्यों की सदस्यता नहीं जायेगी़ इसमें अध्यक्ष को सदन की स्थिति ही देखनी है़ सदन के बाहर की स्थिति का आकलन नहीं करना है़
कुर्सी पर बने रहने के लिए स्पीकर ने विधायकों को बचाया : झाविमो
रांची़ : झाविमो ने स्पीकर दिनेश उरांव द्वारा दलबदल के मामले में दिये गये फैसले को असंवैधानिक व अलोकतांत्रिक बताया है़ झाविमो ने भाजपा में विलय को खारिज करते हुए कहा कि अध्यक्ष को इस पर फैसला लेने का अधिकार ही नहीं है़
चुनाव आयोग को पार्टी के विलय या विघटन पर निर्णय लेने का अधिकार है़ झाविमो के महासचिव बंधु तिर्की ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा है कि किसी भी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल के विलय पर फैसला लेना स्पीकर के संवैधानिक अधिकार से बाहर की बात है़ स्पीकर ने अपनी कुर्सी बचाने के लिए छह विधायकों की सदस्यता बचायी है़ उन्होंने कहा कि पार्टी के संविधान में साफ उल्लेखित है कि केंद्रीय समिति के दो तिहाई पदाधिकारियों की सहमति के बाद ही पार्टी का विलय हो सकता है़ झाविमो के केंद्रीय पदाधिकारी भाजपा में शामिल नहीं हुए है़ं
श्री तिर्की ने कहा कि स्पीकर के न्यायाधिकरण में प्रतिवादी पक्ष यानि छह विधायकों की ओर से 57 गवाह पेश किये गये, उसमें मात्र दो केंद्रीय समिति के पदाधिकारी थे़ ऐसे में यह निर्णय गलत है़ झाविमो महासचिव ने कहा कि झारखंड में लोकतंत्र की हत्या हुई है़ झाविमो इस मामले को लेकर उच्च न्यायालय और चुनाव आयोग के पास जायेगा़ मौके पर बाबूलाल मरांडी व प्रदीप यादव की ओर से इस मामले को देख रहे अधिवक्ता आरएन सहाय और प्रवक्ता योगेंद्र प्रताप सिंह मौजूद थे़
रांची़ : दलबदल मामले में स्पीकर द्वारा दिये गये फैसले के खिलाफ झाविमो के कार्यकर्ता व नेता सड़क पर उतरे और शव यात्रा निकाल कर विरोध प्रदर्शन किया़ स्पीकर सहित दलबदल करनेवाले विधायकों के खिलाफ नारेबाजी की़ राज्य के अलग-अलग हिस्से में प्रदर्शन किया गया़ स्पीकर के फैसले को अलोकतांत्रिक बताते हुए कहा कि स्पीकर ने देश में झारखंड को कलंकित किया है़ कार्यकर्ता सभी छह विधायकों की सदस्यता रद्द करने की मांग कर रहे थे़
राजधानी में महानगर अध्यक्ष सुनील गुप्ता के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने जयपाल सिंह स्टेडियम से अलबर्ट एक्का चौक तक विरोध मार्च किया़ शव यात्रा निकाल कर पुतला फूंका़ उन्होंने कहा कि इस फैसले से राजनीति शर्मसार हुई है़ केंद्रीय सचिव राजीव रंजन मिश्रा ने कहा कि फैसले का दिन लोकतंत्र के लिए काला दिन था. झाविमो फैसले के खिलाफ न्यायालय एवं सड़क दोनों पर लड़ेगा. महानगर महासचिव जितेंद्र वर्मा ने कहा कि स्पीकर ने राजनीति प्रभाव में यह निर्णय लिया है़ विधायकों के ऐसे चरित्र से जनता का राजनीति से विश्वास उठेगा़ ऐसे जन-प्रतिनिधियों की कोई विचारधारा नहीं होती है. प्रदर्शन में उत्तम यादव, बल्कु उरांव, शिव शर्मा, सुचिता सिंह, नजीबुल्लाह खान, शिवा कच्छप, दीपू गाड़ी, शिव संकर साहू, नदीम इकबाल,अनीता गाड़ी, इंदु भूषण गुप्ता, महाबीर नायक, मो रॉकी, भीम शर्मा, विजय प्रसाद, मंसूर अंसारी, तस्लीम अंसारी, सुरेश शर्मा, अशोक श्रीवास्तव सहित कई लोग शामिल हुए़
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