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रांची : एस्सेल इंफ्रा को हटाया जायेगा

Updated at : 29 Jan 2019 9:10 AM (IST)
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रांची : एस्सेल इंफ्रा को हटाया जायेगा

नगर विकास सचिव ने दिया आदेश रांची : राजधानी में कचरे का प्रबंधन करनेवाली कंपनी एस्सेल इंफ्रा को हटाया जायेगा. रांची नगर निगम ने सफाई कार्य में लापरवाही बरतने और कचरा प्रबंधन प्लांट बनाने का काम शुरू नहीं करने की वजह से इस कंपनी को टर्मिनेट करने का फैसला किया है. नगर विकास विभाग के […]

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नगर विकास सचिव ने दिया आदेश
रांची : राजधानी में कचरे का प्रबंधन करनेवाली कंपनी एस्सेल इंफ्रा को हटाया जायेगा. रांची नगर निगम ने सफाई कार्य में लापरवाही बरतने और कचरा प्रबंधन प्लांट बनाने का काम शुरू नहीं करने की वजह से इस कंपनी को टर्मिनेट करने का फैसला किया है. नगर विकास विभाग के सचिव अजय कुमार सिंह ने इससे संबंधित निर्देश दिये हैं.
गौरतलब है कि एस्सेल इंफ्रा ने दो अक्तूबर 2016 से राजधानी में सफाई का कार्य शुरू किया गया था. उस वक्त कंपनी के अधिकारियों ने कहा था कि एक साल के अंदर कंपनी शहर के सभी 53 वार्डों में सफाई कार्य अपने हाथों में ले लेगी. आज दो साल से ज्यादा का वक्त बीत गया, लेकिन अब तक कंपनी केवल 33 वार्ड में ही सफाई कार्य शुरू कर पायी है.
कई बार दी जा चुकी है चेतावनी : रांची नगर निगम ने एस्सेल इंफ्रा को उसके क्षेत्राधिकार वाले 33 वार्डों में सफाई व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए अब तक एक दर्जन से अधिक बार चेतावनी दे चुका है. कंपनी को डिबार करने से लेकर टर्मिनेट करने तक की चेतावनी तक दी जा चुकी है, लेकिन हालत जस के तस हैं.
फिलहाल ये हाल है
शहर के 53 वार्डों में वर्तमान में 33 वार्डों में एस्सेल इंफ्रा और 20 वार्डों में रांची नगर निगम सफाई का कार्य संभाल रहे हैं. लेकिन, इन 53 वार्डों में सफाई की हालत खस्ता है. डोर-टू-डोर कचरा उठाव का कार्य अव्यवस्थित है. इस कारण लोग खुले में कचरा फेंकने को विवश हैं. नालियों की हालत तो और बुरी है. कचरे से नालियां पूरी तरह से पैक हैं. इस वजह से बारिश के दौरान नालियों का पानी सड़कों पर ही बहता रहता है.
नहीं होता कचरे का निष्पादन
हर राजधानीवासी प्रतिदिन औसतन 350 ग्राम कचरे का उत्पादन करता है. इसके निष्पादन के लिए नगर निगम के पास मानव संसाधन नहीं है. कचरा उठाने के आवश्यक उपकरण भी नहीं हैं. नगर विकास विभाग के आंकड़ों के मुताबिक शहर में 77.56 फीसदी घरों कचरे का उठाव नहीं होता है. 66.49 फीसदी गंदगी सड़कों और गलियों में पड़ी रहती है. केवल पांच फीसदी मेडिकल वेस्ट का ही निस्तारण हो रहा है.
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