लोस चुनाव में विस की बैटिंग करना चाहते हैं हेमंत, महागठबंधन के आसार कम झामुमो का मन-मिजाज नहीं
Author Prabhat khabar digital desk
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रांची : राज्य में भाजपा के खिलाफ गोलबंदी बनती नहीं दिख रही है. महागठबंधन के आसार कम हो रहे है़ं महागठबंधन के अंदर सबसे बड़े दल झामुमो का मन-मिजाज नहीं है. विपक्षी एकता के नाम पर झामुमो दिन ही काट रहा है. कांग्रेस-झाविमो से अब तक झामुमो की कोई बात नहीं बनी है. महागठबंधन को […]
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रांची : राज्य में भाजपा के खिलाफ गोलबंदी बनती नहीं दिख रही है. महागठबंधन के आसार कम हो रहे है़ं महागठबंधन के अंदर सबसे बड़े दल झामुमो का मन-मिजाज नहीं है. विपक्षी एकता के नाम पर झामुमो दिन ही काट रहा है. कांग्रेस-झाविमो से अब तक झामुमो की कोई बात नहीं बनी है. महागठबंधन को लेकर कोई खाका तैयार नहीं हुआ है.
यूपीए के अंदर के पेंच को सुलझाना आसान भी नहीं है. लोकसभा चुनाव में ही झामुमो के हेमंत सोरेन विधानसभा के लिए बैटिंग कर लेना चाहते हैं. झामुमो की कोशिश है कि लोकसभा चुनाव में ही हेमंत सोरेन को नेता के रूप में प्रोजेक्ट कर दिया जाये. महागठबंधन का चेहरा हेमंत सोरेन को बनाया जाये. वहीं कांग्रेस-झाविमो इस मूड में नहीं हैं. कोलेबिरा उपचुनाव जीतने के बाद कांग्रेस उत्साहित है. वह पहले की तरह बैकफुट पर नहीं रही. वहीं झाविमो अंदर ही अंदर कांग्रेस को आगे कर अपनी गोटी चल रहा है. बाबूलाल मरांडी को भी यह मंजूर नहीं है कि महागठबंधन में किसी चेहरे को प्रोजेक्ट कर चुनाव में जायें. झामुमो लोकसभा चुनाव के साथ ही विधानसभा की सीटों का बंटवारा चाहता है़
कांग्रेस-झाविमो को नेता घोषित करने में परहेज
17 को बैठक में नहीं बनेगी सीट बंटवारे पर कोई बात
झामुमो ने यूपीए खेमा में लीड लिया है. सभी विपक्षी दलों की बैठक 17 जनवरी को बुलायी गयी है. इस बैठक में सभी छोटे-बड़े दल बुलाये गये हैं. सपा, बसपा, तृणमूल, वाम दल सभी को न्योता भेजा गया है. झामुमो की कोशिश है कि राज्य के वाम दलों व छोटे दलों को भी विश्वास में लेकर चलें. कांग्रेस-झाविमो से बात बिगड़ने की सूरत में झामुमो छोटे दलों के साथ आगे बढ़ सकती है़
कांग्रेस-झाविमो दूसरे विकल्प पर भी कर रहे हैं काम
झामुमो के तेवर का एहसास कांग्रेस को भी है. झामुमो के रूख को कांग्रेस भांप रही है. ऐसे में कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि पार्टी के नेता दूसरे विकल्प पर भी विचार कर रहे हैं. झाविमो का भी कांग्रेस-झामुमो दोनों पर दबाव है कि गठबंधन का मामला जल्द से जल्द सलटा लिया जाये. झाविमो अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी लगातार इसके लिए कांग्रेस और झामुमो नेताओं से बात कर रहे थे. उन्होंने प्रतिपक्ष के नेता हेमंत सोरेन से भी मिल कर कहा है कि महागठबंधन का खाका तैयार कर चुनावी मैदान में उतरना चाहिए. इसमें देरी से भाजपा को ही लाभ मिलेगा़ लेकिन यूपीए खेमा में मामला लटकता ही नजर आ रहा है़
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