ePaper

प्रभात खबर से विशेष बातचीत में डीजीपी डीके पांडेय ने कहा, नौ प्रतिशत विकास दर से आगे बढ़ रहा है झारखंड

Updated at : 08 Oct 2018 5:48 AM (IST)
विज्ञापन
प्रभात खबर से विशेष बातचीत में डीजीपी डीके पांडेय ने कहा, नौ प्रतिशत विकास दर से आगे बढ़ रहा है झारखंड

ग्रोथ रेट 10 फीसदी हो गया, तो हर वाद खत्म हो जायेगा राज्य के डीजीपी डीके पांडेय का मानना है कि अपराध और सुरक्षा को लेकर समाज को सचेत रहने की जरूरत है. समाज का हर व्यक्ति पुलिस की भूमिका में रहे. सिस्टम की खामियां गिनाने से नहीं होगा. विकास की राह में हम आगे […]

विज्ञापन
ग्रोथ रेट 10 फीसदी हो गया, तो हर वाद खत्म हो जायेगा
राज्य के डीजीपी डीके पांडेय का मानना है कि अपराध और सुरक्षा को लेकर समाज को सचेत रहने की जरूरत है. समाज का हर व्यक्ति पुलिस की भूमिका में रहे. सिस्टम की खामियां गिनाने से नहीं होगा. विकास की राह में हम आगे बढ़ेंगे, तो नक्सलवाद क्या, जातिवाद से लेकर हर तरह का वाद खत्म हो जायेगा.
डीजीपी सामाजिक सरोकार के साथ पुलिसिंग पर बल देते हैं. गांव के साथ पुलिस के गहरे रिश्ते से ही विश्वास हासिल करने कि बात कहते हैं. साइबर क्राइम को लेकर वह लंबे समय के लिए रणनीति बनाने के पक्षधर हैं. कहते हैं 2018 नहीं, बल्कि 2050 की सोच रखकर अभी से काम करना होगा. डीजीपी से श्री पांडेय से विधि व्यवस्था के हालात, नक्सल से लेकर साइबर क्राइम सहित पुलिसिंग के विभिन्न आयाम पर प्रभात खबर के आनंद मोहन और प्रणव ने लंबी बातचीत की.
Q. नक्सलवाद झारखंड की चुनौती रही है, आपकी पुलिस इससे निबटने में कहां तक सफल रही है?
झारखंड सरकार का पहला संकल्प देखिए. मुख्यमंत्री के नेतृत्व में भ्रष्टाचार मुक्त झारखंड, उग्रवाद मुक्त झारखंड, सुरक्षित झारखंड, विकसित झारखंड, हर पेट को रोटी, हर हाथ को काम, सबका विकास. इस संकल्प को लेकर झारखंड पुलिस पिछले 1000 दिनों से आगे बढ़ रही है. इस संकल्प को पूरा करने के लिए 2018 की परिस्थितियों को 2014 की परिस्थितियों से एक साथ जोड़कर देखने की आवश्यकता है. एक हजार दिनों में परिस्थितियों को बदलने के लिए झारखंड पुलिस ने क्या किया है. इसके बाद एक सही आकलन की आवश्यकता है.
ग्राउंड की स्थिति को देखने के बाद एक इंप्रेशन किसी के दिमाग में आये, इसके बाद ही निष्कर्ष पर पहुंचने की जरूरत है. सिर्फ हम यह कहें कि हमने यह किया, हमने वह किया. वर्ष 2000 में झारखंड कैसा था. उस समय से 2014 तक कैसा रहा. फिर 2014 दिसंबर से अक्तूबर 2018 के बीच क्या बदलाव आया. सुरक्षा में क्या बदलाव आया. क्या चुनौतियां थीं. चुनौती के विरुद्ध हमलोग कहां तक पहुंचे.
Q. आपने पहले 2016, फिर 2017 और फिर 2018 तक नक्सल के सफाये का दावा किया था, उसका क्या हुआ?
2014 में रांची से डालटनगंज पहुंचने में चार घंटे लगते थे. वाहनों का मूवमेंट शाम चार बजे के बाद बंद हो जाता था. वर्तमान में रांची से कुड़ू तक फोर लेन सड़क लगभग तैयार हो चुकी है. कुड़ू से डाल्टनगंज बाइलेन रोड है. इसके भी फोरलेन हो जाने पर राह और आसान हो जायेगी. अब रांची से टोरी के बीच इएमयू ट्रेन चलने लगी है. यह परिकल्पना से परे है. जोनल आइजी रहते पलामू जाता था, तो काफी कठिनाई होती थी.
उस वक्त ट्रैफिक नहीं था. अब दिन और रात हर समय ट्रैफिक रहता है. हर 500 गज पर ढाबा दिखता है. लोग रुक रहे हैं. पताकी में रुक कर लोग व्यू प्वाइंट पर इंतजार कर फोटो खिंचवा रहे हैं. इससे साफ है लोग खुद को सुरक्षित महसूस कर रहे हैं. जहां पर सुरक्षा आया, वहां विकास आया. जहां विकास आया, वहां पर रोजगार आया. जहां रोजगार आया, वहां मार्केट आया. चीजों का दाम आया. वहां लोगों की आमदनी बढ़ी. समाज में रहने के तरीके में बदलाव आया.
Q. तो क्या आप यह कहना चाह रहे हैं कि झारखंड से पूरी तरह से नक्सलियों का सफाया हो गया?
मैंने आपको पलामू रूट का एक्सिस दिखाया. अब झारखंड के अलग-अलग एक्सिस में ले चलता हूं. पूरे बिहार और झारखंड में पलामू रेंज से नक्सलियों की शुरुआत हुई थी. गिरिडीह का पीरटांड़ व मधुबन का इलाका देखिए. पहले रांची से मधुबन जाने पर चार घंटे लगता था. लोग शाम होने से पहले टाटी झरिया से भागने लगते थे. अब लोग वहां रुक कर खा रहे हैं.
देखते ही देखते अब लोग आसानी से गिरिडीह पहुंच जा रहे हैं. पहले नरकी जंगल जाने में लोग भय खाते थे. अब वहां मार्केट बन गया है. लोग अपना घर बना लिये हैं. चतरा, इटखोरी व चौपारण के इलाके को देखिए. सब बदला नजर आता है. इस बदलाव को कोई भी दुनिया की ताकत उग्रवाद की ओर मोड़ने की स्थिति में नहीं है. यह सब सरकार के स्तर पर हुआ है. मतलब विकास ने धारा मोड़ दी है.
Q. आप विकास की बात कर रहे हैं, पुलिसिंग के स्तर पर क्या हुआ?
मुहिम अभी अंतिम मुकाम पर नहीं पहुंची है. झारखंड देश का इकलौता राज्य है, जो लगभग नौ प्रतिशत ग्रोथ से आगे बढ़ रहा है. आंकड़ा इंटरनेट पर देख सकते हैं. जिस दिन हम 10 प्रतिशत विकास दर पा लेंगे, उस दिन यहां ऐसा परिवर्तन होगा, जो हर तरह के वाद को समाप्त करने वाला होगा. चाहे वह जातिवाद हो, नक्सलवाद हो, उग्रवाद हो सब समाप्त हो जायेगा. सिर्फ विकासवाद चलेगा.
Q. क्या झारखंड पुलिस गांव के लोगों का विश्वास जीत पायी है?
गुमला से सुबह में एक बस नौ बजे व शाम में रांची के लिए चलती थी. यह छूट जाने पर अगले दिन का इंतजार करना पड़ता था. अब एक घंटा 50 मिनट पर गुमला को हिट करते हैं. नेतरहाट जाने में लोग जगह-जगह रुककर चाय पीते हैं. आज एक हजार दिन में एक नहीं दर्जनों बस चल रही हैं. किस तरह से पुलिस कैंप से गांवों को लिंक किया गया. कैंप से चार किमी तक पड़ने वाले गांव को फायदा पहुंचाया गया.
आज गांव के लोग कैंप लगाने के लिए बोल रहे हैं. बिना योजना के लोगों को फायदा हो रहा है. एक कैंप गांव में लगती है, तो इस पर तीन से चार लाख का खर्च होता है. यह पैसा मैंने गांव को दिया. उसी गांव से सब्जी, बकरी, दूध ले रहे हैं, गांव वालों को कैश पैसा दे रहे हैं. नदी नालों में श्रमदान से बोरी बांध बना रहे हैं. गांव को पानी दे रहे है. प्रधानमंत्री के मन की बात लोग कैंप में लगे टीवी के माध्यम से देख रहे हैं. अब खुद बताएं कि विकास का इससे बड़ा माॅडल क्या हो सकता है.
Q. मुख्यमंत्री से लेकर आपका निर्देश है कि थाने में एफआइआर पुलिस ले, क्या पुलिस आम आदमी की सुन रही है?
(नक्सलवाद वाला खत्म हो गइल, फिर ठहाके के साथ हंसते हैं. ) कहते हैं, किसी भी नकारात्मक वाइबरेशन को मेरा एंटिना कैच नहीं करता है. इ खामी है, ऊ खामी है. तेल नहीं है. पानी नहीं है. हमारे पास पत्थर है, तो उसी से लड़ेंगे. बैर का डंडा है, तो उसकी को हथियार बनायेंगे. जो हमारे पास साधन है, उसके जरिये ही परिणाम देने की क्षमता व संकल्प लेकर हम चलते हैं. कहीं बैठकर रोते नहीं हैं कि हवा नहीं है, तेल नहीं है, पानी नहीं है.
जहां तक जनता से जुड़ने का सवाल है, तो आप मेरे साथ पलामू के चेतमा गांव चलिए. 65 सालों से उस गांव में चार पहिया वाहन नहीं जाता था. गर्भवती महिलाआें को भी पैदल जाना पड़ता था. हमने चेतमा से सरायडीह आठ किमी की सड़क एक हजार रुपये और 45 लीटर डीजल में बनवा दिया. अब उस गांव में चार पहिया वाहनों के अलावा 108 पर डायल करने से एम्बुलेंस पहुंचती है. पहले उस गांव में दो लीटर दूध होता था. आज वहां 200 लीटर दूध हो रहा है. कैंप में कैश में दूध लोग बेच रहे हैं. जनसहयोग से सारे उग्रवादी को चुन-चुनकर मार दिये गये.
Q. क्या अब भी से आपके पास नक्सलवाद को खत्म करने की कोई डेडलाइन है?
जब विकास दर हमलोग 15 प्रतिशत एचिव कर लेंगे, उस समय समझ लीजियेगा कि झारखंड पूरी तरह से सुरक्षित और विकसित हो गया?
Q. यानी नक्सलियों का खात्मा विकास दर पर निर्भर करता है?
(हा…हा… हा..) कहते हैं : जब तक सारी परिस्थितियां राम राज में परिवर्तित नहीं होगी. दैहिक दैविक भौतिक तापा, राम राज नहिं काहुहि ब्यापा … यह रघुवर राज की जो परिकल्पना चल रही है, उसमें जब तक इन चीजों को समाप्त नहीं कर लिया जायेगा, सभी लोग संतुष्ट होकर जीवन यापन नहीं कर लेते हैं, तब तक संघर्ष जारी रहेगा.
Q. खुफिया तंत्र पुलिस की अहम कड़ी है, आपके खुफिया पर सवाल उठते रहे हैं, क्या कहेंगे?
सवाल अपनी जगह पर है, प्रयत्न अपनी जगह पर है. अगर सवाल नहीं होगा, तो उसका उत्तर नहीं ढूंढा जायेगा. सवाल से घबराने की जरूरत नहीं है. आलोचना से घबराने की जरूरत नहीं. निंदक को नियरे राखिये. हमारी कमी को उजागर करनेवाला नहीं होगा, तो हम समझेंगे कि हम ही है. अगर फिरदौस बररुए जमीनस्तो अमीनस्तो अमीनस्तो अमीनस्तो… चुनौती के विरुद्ध संघर्ष करके अच्छी स्थिति लाना है.
Q. आपको ऐसा नहीं लग रहा कि अपराध के क्षेत्र में साइबर क्राइम बड़ी चुनौती है?
दुनिया बदल रही है. नयी जेनरेशन टेक्नोलाॅजी के साथ आ रही है. छोटा बच्चा स्मार्ट फोन और कंप्यूटर हैंडिल कर रहा. अपराध के स्वरूप बदल रहे हैं. अब डकैती के लिए आदमी को घर में सब्बल ले जाने की जरूरत नहीं.
अब घर बैठे-बैठे स्मार्ट फोन और कंप्यूटर के जरिये एकाउंट से पैसा गायब हो जाता है. इब्तिदा-ए-इश्क़ है रोता है क्या, आगे-आगे देखिये होता है क्या… तैयार कीजिए. पुलिस क्या कर रही है, इससे बाहर निकलिये. हमने और मुख्यमंत्री जी ने ‘पुलिस आपके द्वार’ का मॉडल दिया था. इसके तहत हर मुहल्ला में समिति बनेगी. यह बीट अफसर से जुड़ेंगे. इस पर काम हो रहा है.
Q. राजधानी में सीएम हैं, राज्यपाल हैं, अाप हैं, फिर भी मेन रोड व कांके जैसे पॉश इलाके में लगातार घटनाएं हो जाती है? पुलिस कहां है?
समाज को समझिए. जहां समाज है, वहां सामाजिक लोग होंगे. जहां समाज है वहां असामाजिक लोग भी होंगे. अगर आप कहियेगा कि किसी पोखरे में सिर्फ रेहु-कतला पैदा होगा. क्या उसमें पानी का सांप नहीं आयेगा, मेढक नहीं आयेंगे? उसमें गोजर-बिच्छू नहीं होंगे? अगर आप अपना तालाब साफ रखियेगा, तो इस तरह के प्रवृत्ति के लोग नहीं आयेंगे. जहां गंदगी फैलाइयेगा, वहां गंदे लोग आयेंगे?
Q. तालाब साफ करने की जिम्मेदारी आपकी है?
लअ…! इस मानसिक सोच में तो बदलाव आना चाहिए. सुरक्षा आउटसोर्स नहीं किया जा सकता. आप अपने घर से चलते हैं, तो क्या उसमें ताला लगाते हैं या छोड़कर आ जाते हैं कि वह पुलिस के जिम्मे है.
काहे घर में ताला लगाते हैं? हमने कहा है? क्या पैसा हम दे रहे हैं ताले का? आपने ताला बंद कर दिया और चाबी पॉकेट में डाल दिया. ताला बंद किया कि आपका घर सुरक्षित रहे. हम दोबारा लौटें, तो ताला खोलकर घर में जाएं और सुकुन के पल बितायें. क्या इसके लिए डीके पांडेय ने कोई स्टैंडिंग आॅर्डर इश्यू किये हैं या किसी तरह के आॅर्डर की जरूरत है.
क्या इसकी जवाबदेही समाज के ऊपर नहीं है. लोग बच्चों को पढ़ने के लिए रांची भेज रहे हैं. बच्चा क्या पढ़ रहा है? क्या कर रहा है? क्या मैंने अभिभावकों को कहा हुआ है कि आप बच्चों को पल्सर और बुलेट मोटरसाइकिल दीजिए? क्या इसको देखने की जवाबदेही पैरेंटस की नहीं है कि जब वे बच्चे को एक हजार रुपये दे रहे हैं, तो वह कीमती मोटरसाइकिल की सवारी कहां से कर रहा है? बच्चा कौन की शिक्षा ले रहा है? वह सही शिक्षा ले रहा है कि गलत शिक्षा ले रहा है. इसको कौन देखेगा? यह पैरेंटस की जवाबदेही नहीं है.
समाज में सभी लोग पुलिस है. सुरक्षा का दायित्व सबके ऊपर है. लेकिन, जो आउटसोर्स मेंटेलिटी है, उससे बाहर निकलकर हम देखें कि पुलिस भी समाज का अंग है. लोग एक करोड़ का फ्लैट ले रहे, लेकिन एक हजार रुपये सीसीटीवी कैमारा पर खर्च नहीं कर रहे. जहां पर सीसीटीवी कैमारा लगा, वहां पर अपराध खत्म हो रहा है. जहां हो भी रहा है, वहां अपराधी की पहचान कर उसे दबोच लिया जा रहा.
Q. पुलिस की चुस्ती पर लगातार सवाल उठते रहे हैं, क्या आपकी पुलिस अलर्ट नहीं है?
चार दिन पहले एक उदाहरण हमारे सामने आया. रांची के पिठोरिया से एक क्रिमिनल का ग्रुप एक गाड़ी से भागा. उसको पीसीआर ने दौड़ाया. भागते हुए अपराधी पागल की तरह से लॉ यूनिवर्सिटी के पास आकर वहां से कांके की ओर बढ़ने के बजाये रिंग रोड टप गये. पीसीआर ने भी उसे रिंग रोड पर खदेड़ा. इसी बीच चार पीसीआर चारों तरफ से वहां पहुंची और अपराधियों का रास्ता चारों ओर से ब्लॉक कर दिया. पहली बार ऐसा हुआ कि पुलिस की गाड़ी पंक्चर नहीं हुई, बल्कि अपराधी की गाड़ी पंक्चर हो गयी. अगर पुलिस चाहती, तो चारों को वहीं पर ठोक देती. लेकिन पुलिस ने किसी को ठोका नहीं.
सबको पकड़ा. पकड़ने के बाद सबको पुलिस साथ ले गयी और पूछताछ के बाद कानूनी कार्रवाई की. हमलोग छोटे थे, तब सिनेमा में देखते थे कि नाजिर साहब बनते थे दारोगा. डॉन आगे भाग रहा है और टुटही गाड़ी से दारोगा जी पीछा कर रहे हैं. अचानक दौड़ते-दौड़ते दारोगा जी की गाड़ी का पहिया खुलकर भाग जाता था. आप लोग भी देखे होंगे. लेकिन आज परिस्थितियां कैसे चेंज हुई?
Q. आनेवाले समय में सबसे बड़ी चुनौती क्या देखते हैं?
आनेवाले समय में आइओटी (इंटरनेट ऑफ थिंक्स) डिवाइसेस बड़ी चुनौती है. यह देश में आ चुका है. आप यहां बैठे हुए है. यहां से निकले मोबाइल का बटन दबाएं और गीजर आपके घर पर ऑन हो गया. आप घर गये और गरम-गरत पानी से नहा लिए.
आप जब तक नहा रहे हैं, तब तक बोलकर ही घर में फ्रिज भी ऑन कर दिये. जब तक आप स्नान करेंगे तब तब आइस तैयार हो जायेगा. आइस का यूज खत्म होने तक आपके बोलने पर किचेन में रोटी भी गरम हो जायेगी. आने वाला समय यह है. आइओटी डिवाइस के कारण आपका पूरा घर कंप्यूटराइज हो जायेगा. यह जो चुनौती है, उससे लड़ने की तैयारी आज ही से करना होगा. प्लास्टिक करेंसी, डिजिटल करेंसी, एम कॉमर्स, अब किसी के पास इतनी फुर्सत नहीं है कि वह दुकान में जाकर समान खरीदेगा. एम कॉमर्स, इ-कॉमर्स आने वाले समय की चुनौतियां हैं.
इनसे समाज को रूबरू होना होगा. समाज किसी को दोष नहीं दे सकता है कि बाबा न बतवलें, हम त सुतल न रहनी. अगर सोने की जवाबदेही आपकी है, तो जगाने की जवाबदेही पुलिस की है क्या? जगने के लिए खुदे अलार्म लगावे के पड़ी कि छह बजे उठे के बा. पुलिस उठने के लिए अलार्म बनायेगी कि हम सब मिलकर एक जागरूक नागरिक की तरह हिंदुस्तान को बेहतर हिंदुस्तान बनायेंगे.
Q. सामाजिक सरोकार से आप जुड़े रहे हैं. अच्छे ओरेटर भी है. आगे का भविष्य राजनीति में तलाशेंगे़ ऐसी कोई प्लानिंग है क्या?
राज्य की सुरक्षा, राज्य का विकास, भ्रष्टाचार मुक्त व्यवस्था हमारा संकल्प है.
Q. लेकिन यह सब राजनीति से ही पूरा होता है?
हमरा काहे के उलझइ ब. गरीब आदमी बानी. रोटी प्याज खाय वाला बानी. लुंगी पहनते हैं. मार्केट जाते हैं. दाल, रोटी, सब्जी खरीदकर लाते हैं. हमको न तो लाव से मतलब है न लश्कर से. छोटा सा आदमी है. उससे ज्यादे कुछ नहीं.
Q. लेकिन आप जैसे लोग, पुलिस अफसर राजनीति में आएं हैं?
देखिए! दो चीज बहुत स्पष्ट समझिए. जो व्यक्ति कब्रिस्तान में जाकर कैंडिल जलाता है, उसको जिंदगी नहीं मिलती है. उसकी मुलाकात रूह से होती है. जो व्यक्ति भविष्य में कुछ टटोलने की कोशिश करता है, उसको भी कुछ नहीं मिलता है, क्योंकि वह अज्ञात है. सत्य क्या है? सत्य वर्तमान है. इस वर्तमान को वर्तमान में पूरा करना है.
Q. अवसर मिला, परिस्थितियां बनी, तो भी राजनीति में नहीं आयेंगे ?
हमने कहा न कि आप दो-चार एक्सिस पर जाकर देखिए. जो जरूरत है और जो संसाधन है उसके बीच काफी गैप है. उस गैप में जब आप जाते हैं, तो आप वहां पर अपने को बहुत छोटा महसूस करते हैं. वहां पर कोई किताब और प्लान किसी काम का नहीं रह जाता. जरूरत है लोगों के बीच बैठकर काम करने की, उनके साथ सतुआ-प्याज खाने की. बांटकर मिरचा खाने की. वह अजीब तरह की फिलिंग है, जो आंदोलित करती है. वर्तमान में भौतिकता से ऊपर उठने की जरूरत है. बाकी सब बेमानी है.
जोनल आइजी रहते पलामू जाता था, तो काफी कठिनाई होती थी. उस वक्त ट्रैफिक नहीं था. अब दिन और रात हर समय ट्रैफिक रहता है. हर 500 गज पर ढाबा दिखता है. लोग रुक रहे हैं. पताकी में रुक कर लोग व्यू प्वाइंट पर इंतजार कर फोटो खिंचवा रहे हैं. इससे साफ है लोग खुद को सुरक्षित महसूस कर रहे हैं.
दैहिक दैविक भौतिक तापा, राम राज नहिं काहुहि ब्यापा … यह रघुवर राज की जो परिकल्पना चल रही है, उसमें जब तक इन चीजों को समाप्त नहीं कर लिया जायेगा, सभी लोग संतुष्ट होकर जीवन यापन नहीं कर लेते हैं, तब तक संघर्ष जारी रहेगा.
इब्तिदा-ए-इश्क है रोता है क्या, आगे-आगे देखिये होता है क्या… तैयार कीजिए. पुलिस क्या कर रही है, इससे बाहर निकलिये. हमने और मुख्यमंत्री जी ने ‘पुलिस आपके द्वार’ का मॉडल दिया था. इसके तहत हर मुहल्ला में समिति बनेगी. यह बीट अफसर से जुड़ेंगे. इस पर काम हो रहा है.
विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola