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बच्चा बेचने के आरोप में फंसे मिशनरीज ऑफ चैरिटी की संस्था पर लगेगा ताला

Updated at : 06 Oct 2018 6:05 AM (IST)
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बच्चा बेचने के आरोप में फंसे मिशनरीज ऑफ चैरिटी की संस्था पर लगेगा ताला

रांची : बच्चा बेचने के आरोप में फंसे मिशनरीज ऑफ चैरिटी की संस्था निर्मल हृदय समेत 35 संस्थानों को बंद करने की सिफारिश बाल संरक्षण आयोग ने की है.आयोग ने पूरे राज्य को बदनाम करनेवाले इस कांड के बाद चार जांच दल बनाकर पूरे राज्य में 126 शेल्टर होम का निरीक्षण कराया और अपनी रिपोर्ट […]

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रांची : बच्चा बेचने के आरोप में फंसे मिशनरीज ऑफ चैरिटी की संस्था निर्मल हृदय समेत 35 संस्थानों को बंद करने की सिफारिश बाल संरक्षण आयोग ने की है.आयोग ने पूरे राज्य को बदनाम करनेवाले इस कांड के बाद चार जांच दल बनाकर पूरे राज्य में 126 शेल्टर होम का निरीक्षण कराया और अपनी रिपोर्ट तैयार की.
जिन संस्थानों के खिलाफ बंद करने की अनुशंसा की गयी वहां घोर अनियमितता पायी गयी हैं. और कुछ तो कागजों पर ही संचालित हो रहे हैं इसके अलावा 24 अन्य संस्थानों को तीन महीने में स्थिति दुरुस्त करने को कहा है. मुख्यमंत्री से मिलकर आयोग की अध्यक्ष आरती कुजूर ने गुरुवार को रिपोर्ट सौंपी जिसमें 67 संस्थानों को ठीक पाया गया है.
मुख्यमंत्री से मिलने के बाद आरती कुजूर ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि मिशनरीज ऑफ चैरिटी की संस्था निर्मल हृदय द्वारा बच्चों की बिक्री की सूचना पर जांच शुरू की गयी थी. आयोग ने चार टीमें बनाकर जांच पूरी की. एक टीम का नेतृत्व स्वयं अध्यक्ष आरती कुजूर कर रही थीं और इस टीम ने 68 संस्थाओं की जांच की. आयोग के सदस्य रवींद्र गुप्त व भूपन साव ने 46 संस्थानों की जांच की, जबकि अनहद लाल ने 12 संस्थानों की जांच की.
आरती कुजूर ने बताया कि कुछ शेल्टर होम में रहने लायक स्थिति नहीं है और इस कारण से उन्हें बंद करने की अनुशंसा की गयी है. कमरे ढंग के नहीं, सुरक्षा की व्यवस्था नहीं आदि समस्याएं हैं. कुजूर ने बताया कि मुख्यमंत्री रघुवर दास ने इस 35 शेल्टर होम को बंद करने के पूर्व यहां रह रहे बच्चों को सुरक्षित ठिकानों पर पहुंचाने का निर्देश दिया है. रिपोर्ट महिला एवं बाल विकास विभाग के सचिव को सौंप दी गयी है. उन्हें इस रिपोर्ट के आधार पर निर्णय लेना है.
प्राथमिकी की अनुशंसा नहीं : आरती कुजूर ने बताया कि शेल्टर होम बंद करने की अनुशंसा मात्र की गयी है. कहीं कोई बड़ी गड़बड़ी मिलती है, तो प्राथमिकी दर्ज करने की कार्रवाई विभाग को करनी है. ऐसी कोई अनुशंसा नहीं की गयी है.
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