बिना सुरक्षा मानक के ऑटो व वैन से आनेवाले विद्यार्थियों को नहीं करने दिया जायेगा स्कूल में प्रवेश
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :06 Oct 2018 1:07 AM (IST)
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रांची : लॉरेटो स्कूल प्रबंधन ने गुरुवार को अभिभावकों के साथ बैठक की. इस दौरान अभिभावकों से कहा गया कि अगर वे अपने बच्चों को सुरक्षा मापदंड पूरा नहीं करनेवाले ऑटो या वैन से स्कूल भेजते हैं, तो उन बच्चों को स्कूल में प्रवेश नहीं करने दिया जायेगा. अभिभावक अपने बच्चों को स्कूल बस या […]
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रांची : लॉरेटो स्कूल प्रबंधन ने गुरुवार को अभिभावकों के साथ बैठक की. इस दौरान अभिभावकों से कहा गया कि अगर वे अपने बच्चों को सुरक्षा मापदंड पूरा नहीं करनेवाले ऑटो या वैन से स्कूल भेजते हैं, तो उन बच्चों को स्कूल में प्रवेश नहीं करने दिया जायेगा. अभिभावक अपने बच्चों को स्कूल बस या सुप्रीम कोर्ट के सुरक्षा मानक का पालन करनेवाले ऑटो या वैन से ही स्कूल भेजें.
इस पर कई अभिभावकों ने अपनी असुविधा स्कूल प्रबंधन को बतायी. एक महिला अभिभावक ने कहा कि वह अकेली रहती है. उसके पति बाहर कार्यरत हैं. उनके दो बच्चे हैं. अगर एक को छोड़ने जाती हैं, तो दूसरा अकेला घर में रहता है. इससे घर में रहने वाले बच्चे पर खतरा है. स्कूल बस उनके घर से करीब एक किलोमीटर दूर आती है. अगर बच्ची को अकेले बस स्टैंड तक जाने दिया जाये, तो भी खतरा है.
वहीं, दूसरा बच्चा जो उस वक्त घर में रहता है, वह भी आधा घंटा बाद स्कूल जाता है. ऐसे में उसकी समस्या का हल बतायें. इस पर स्कूल प्रबंधन द्वारा सुरक्षा के निर्धारित मापदंड का हवाला दिया गया और कहा गया कि एक-दो विद्यार्थी के लिए हम मापदंड नहीं बदल सकते हैं.
हाइपावर कमेटी ने तय किये थे सुरक्षा के मानक : उच्च न्यायालय द्वारा गठित हाइपावर कमेटी ने 15 जून 2016 को बैठक बुलायी.
बैठक में स्कूल बसों में सुरक्षा के मानक क्या-क्या हो सकते हैं, इस पर विस्तार से चर्चा की गयी. चर्चा के बाद कमेटी द्वारा लिये गये निर्णय से स्कूल प्रबंधनों को भी अवगत कराया गया था. सुरक्षा के मानक के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय मापदंडों को आधार बनाया गया था.
उच्चतम न्यायालय द्वारा तय सुरक्षा के मानक
स्कूल बसों में अनिवार्य रूप से सामने व पीछे स्कूल बस लिखा रहे
स्कूल बसों में सीटों की क्षमता से अधिक बच्चों को न लिया जाये
स्कूल बसों में फर्स्ट एड बॉक्स हो
बसों की खिड़कियों में जाली व रॉड लगाये जायें
बसों में फायर स्टींगविशर भी रहे
स्कूल बसों पर स्कूल के नाम के साथ-साथ स्कूल का फोन नंबर भी डिस्प्ले हो
स्कूल बसों के दरवाजे का लॉक बेहतर ढंग से लगा रहे
बस चालकों को पांच साल का अनुभव हो
सुरक्षा के मानकों काे ध्यान में रखना होगा : डीटीओ
जिला परिवहन पदाधिकारी संजीव कुमार ने कहा कि वैन व ऑटो में जाने से बच्चों को रोका जायेगा, ऐसी बात नहीं है. बच्चे बस से जायें, ऑटो से जायें या वैन से जायें, लेकिन जिस पर बच्चे जा रहे हैं, उन्हें सुरक्षा के मानकों को पूरा करना होगा.
उच्चतम न्यायालय की गाइडलाइन भी है कि बच्चे ऑटो से जा रहे हैं, तो उसमें सीटों की संख्या से ज्यादा बच्चों को न बैठायें, दोनों तरफ रॉड लगा होना अनिवार्य है. वैन है, तो उसकी खिड़कियों में जाली लगी रहे. बच्चे बाइक से जाते हैं, तो उनके पास लाइसेंस रहे और हेलमेट जरूर पहनें.
स्कूल प्रबंधन ने बात करने से किया इनकार
जब इस संबंध में स्कूल प्रबंधन से बात करने का प्रयास किया गया, तो स्कूल के गेट के सामने तैनात गार्ड ने कहा कि प्राचार्या किसी से नहीं मिलेगी. वहीं, दूरभाष पर बात करने पर कोई उत्तर नहीं दिया गया.
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